मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत संपत्ति का पूरा ब्यौरा नहीं देने का आरोप तय हुआ है। उन्होंने आरोप से इनकार किया है।
मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब के खिलाफ संपत्ति का पूरा ब्यौरा घोषित नहीं करने के मामले में अदालत में आरोप तय किया गया है। 66 वर्षीय साबरी ने आरोप से इनकार करते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही है। कुआलालंपुर की सेशंस कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई में उनके खिलाफ मलेशियाई भ्रष्टाचार निरोधक आयोग से जुड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने जांच एजेंसी की ओर से जारी नोटिस के अनुरूप अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया।
अदालत में पेश आरोप के मुताबिक, इस्माइल साबरी ने 7 जनवरी 2025 को जारी एक नोटिस के जवाब में ऐसा लिखित बयान दिया, जिसे जांच एजेंसी ने संपत्ति घोषित करने की शर्तों के अनुरूप नहीं माना। यह नोटिस उन्हें 10 जनवरी 2025 को दिया गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कथित तौर पर अधूरी घोषणा में स्थानीय मुद्रा के साथ कई विदेशी मुद्राएं और सोने की छड़ें शामिल थीं। मामला मलेशियाई भ्रष्टाचार निरोधक आयोग कानून की धारा 36 के तहत दर्ज किया गया है। दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 5 साल की जेल और 100,000 रिंगिट तक जुर्माने का प्रावधान है।
अदालत में आरोप पढ़े जाने के बाद इस्माइल साबरी ने खुद को निर्दोष बताया। इसका अर्थ है कि इस स्तर पर आरोप साबित नहीं हुआ है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे चलेगी।
मलेशिया की सरकारी समाचार एजेंसी बर्नामा के मुताबिक, आरोप में लगभग 14.77 मिलियन रिंगिट नकद के अलावा कई विदेशी मुद्राओं का उल्लेख है। इनमें सिंगापुर डॉलर, अमेरिकी डॉलर, स्विस फ्रैंक, यूरो, जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड, न्यूजीलैंड डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात दिरहम और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शामिल हैं। आरोप में 5 स्विस फाइन गोल्ड बार का भी जिक्र किया गया है। ये विवरण अभियोजन पक्ष के आरोप का हिस्सा हैं और अदालत में अंतिम रूप से साबित होने बाकी हैं। मलेशियाई भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की पिछली कार्रवाई में इससे भी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बर्नामा के अनुसार, जांच के दौरान लगभग 170 मिलियन रिंगिट की विभिन्न विदेशी मुद्राओं में नकदी और 16 किलोग्राम शुद्ध सोने की छड़ें जब्त की गई थीं। सोने का अनुमानित मूल्य लगभग 7 मिलियन रिंगिट बताया गया था।
इन जब्तियों को कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के संदर्भ में देखा गया था। हालांकि, संपत्ति जब्ती और मौजूदा अदालत में तय आरोप को एक ही कानूनी निष्कर्ष मानना सही नहीं होगा। मौजूदा मामला मुख्य रूप से संपत्ति घोषणा से जुड़े कथित उल्लंघन पर आधारित है।
इस्माइल साबरी के वकील अमेर हमजा अरशद ने आरोप की वैधता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि आरोप की प्रकृति और उसके कानूनी आधार की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। बचाव पक्ष ने संकेत दिया है कि इस मामले में पहले संपत्तियों को जब्त करने या उनसे जुड़े दूसरे कानूनी कदमों की प्रक्रिया भी सामने आ चुकी थी। वकील ने अदालत में आरोप की वैधानिकता को चुनौती देने की संभावना जताई है।
इसका मतलब यह है कि आगे की सुनवाई में केवल संपत्तियों की सूची ही अहम नहीं होगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि जांच एजेंसी का नोटिस किस तरह जारी हुआ, जवाब किस रूप में दिया गया और कानून के तहत उस जवाब को किस आधार पर गैर-अनुपालन माना गया।
इस्माइल साबरी के खिलाफ संपत्ति और संभावित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी जांच उनके प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद तेज हुई। उन्हें मलेशियाई भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के सामने कई बार बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। जांच के दौरान उनके कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ और कार्रवाई हुई। अधिकारियों से जुड़े मामलों के बाद कुछ परिसरों की तलाशी ली गई, जहां बड़ी मात्रा में नकदी और सोना मिलने की बात सामने आई। इस पूरी जांच को सरकार के प्रचार और अन्य खर्चों से जुड़े संभावित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से भी जोड़ा गया है। हालांकि, इन व्यापक आरोपों और मौजूदा संपत्ति घोषणा मामले के बीच कानूनी संबंध को अदालत की आगे की कार्यवाही के आधार पर ही स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।
इस्माइल साबरी के खिलाफ आरोप पहले 7 अगस्त को तय किए जाने थे। लेकिन उनके स्वास्थ्य से जुड़ी वजहों के चलते कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। उनके वकील ने बताया था कि साबरी को नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में इलाज की जरूरत पड़ी थी। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अगस्त तक टाल दी। 27 अगस्त को वह कुआलालंपुर कोर्ट परिसर पहुंचे और अदालत में आरोप का सामना किया। सरकारी और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत में आरोप पढ़े जाने के बाद उन्होंने दोष स्वीकार नहीं किया।
इस मामले की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस्माइल साबरी मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और अगस्त 2021 से नवंबर 2022 तक देश की सत्ता संभाल चुके हैं। उनका कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता के दौर में रहा। उन्होंने आम चुनाव के बाद नहीं, बल्कि उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री पद संभाला था। उनका कार्यकाल लगभग 15 महीने रहा, जिसे मलेशिया के सबसे छोटे प्रधानमंत्री कार्यकालों में गिना जाता है। मलेशिया में हाल के वर्षों में पूर्व शीर्ष नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों ने राजनीति और प्रशासन में जवाबदेही के सवाल को प्रमुख बनाया है। इस्माइल साबरी पर आरोप तय होने के साथ वह ऐसे मामलों का सामना करने वाले लगातार तीसरे पूर्व प्रधानमंत्री बन गए हैं।
उनसे पहले नजीब रजाक और मुह्यिद्दीन यासिन भी भ्रष्टाचार से जुड़े कानूनी मामलों का सामना कर चुके हैं। नजीब रजाक को एक अलग मामले में जेल की सजा हुई है, जबकि मुह्यिद्दीन के खिलाफ भी भ्रष्टाचार और धनशोधन से जुड़े आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया चल चुकी है।
इस मामले की रिपोर्टिंग में एक अहम कानूनी अंतर को समझना जरूरी है। अदालत में आरोप तय होना दोष साबित होने के बराबर नहीं है।
अभियोजन पक्ष को अदालत के सामने यह साबित करना होगा कि इस्माइल साबरी ने संबंधित नोटिस की शर्तों के अनुरूप जानबूझकर संपत्ति का पूरा विवरण नहीं दिया। वहीं बचाव पक्ष को आरोप की कानूनी वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठाने का अधिकार है। इसलिए फिलहाल इस्माइल साबरी को संपत्ति छिपाने का दोषी बताना उचित नहीं होगा। सही स्थिति यह है कि उन पर संपत्ति घोषित करने से जुड़े कानून के कथित उल्लंघन का आरोप तय हुआ है और उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया है।
मामले की अगली न्यायिक कार्यवाही में अभियोजन पक्ष अपने आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों को आगे रख सकता है। बचाव पक्ष आरोप की वैधता और जांच प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाएगा। अदालत को यह भी देखना होगा कि संबंधित नोटिस की कानूनी शर्तें क्या थीं, आरोपी की ओर से क्या जानकारी दी गई थी और कथित तौर पर कौन सी संपत्तियां घोषित नहीं की गईं। दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत 5 साल तक की जेल और 100,000 रिंगिट तक जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन सजा का सवाल तभी उठेगा जब अदालत आरोप को प्रमाणित मानती है।
इस मामले का असर केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री की कानूनी स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा। मलेशिया में लंबे समय से सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की संपत्ति, सरकारी धन के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर बहस चलती रही है। इस्माइल साबरी के मामले में भी असल सवाल यही रहेगा कि जांच और मुकदमे की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है और अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों का कानूनी मूल्यांकन किस तरह होता है। बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने का उल्लेख इस मामले को सार्वजनिक चर्चा में महत्वपूर्ण बनाता है। लेकिन अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब पर संपत्ति घोषणा से जुड़े कानून के तहत आरोप तय हो चुका है। उन्होंने दोष स्वीकार नहीं किया है। अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां आरोपों, जांच की वैधता और उपलब्ध साक्ष्यों की कसौटी पर पूरी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।