केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई-गोवा हाईवे चौड़ीकरण में हुई देरी पर नाराज़गी जताई। उन्होंने उद्घाटन में शामिल नहीं होने, अक्टूबर में निरीक्षण करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही।
पणजी | 10 सितंबर 2026
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में लगातार हो रही देरी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि परियोजना में इतनी देर हो चुकी है कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है और इसी वजह से वह हाईवे के उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे।
गडकरी ने यह बयान गोवा के पोरवोरिम में 6 लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि मुंबई-गोवा हाईवे की प्रगति को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई है।
गडकरी ने कहा कि वह अक्टूबर में मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से गोवा जाएंगे। इस दौरान वह मुंबई-गोवा हाईवे के जरिए यात्रा करेंगे और खुद देखेंगे कि परियोजना की स्थिति क्या है तथा यात्रियों के लिए सफर कितना सुविधाजनक हुआ है।
यह निरीक्षण ऐसे वक्त होगा जब परियोजना के कई हिस्सों में अभी भी काम, मरम्मत और यातायात प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण का काम कई साल से चल रहा है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक मुंबई से महाराष्ट्र-गोवा सीमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 66 के करीब 485 किमी हिस्से को 4 लेन में विकसित करने का काम चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया था। पहले पैकेज का काम दिसंबर 2011 में शुरू हुआ था।
फरवरी 2026 के संसदीय रिकॉर्ड में सरकार ने बताया था कि करीब 465 किमी हिस्से का 4 लेन विकास पूरा हो चुका था और लगभग 20 किमी काम बाकी था। उस समय शेष काम को चरणबद्ध तरीके से जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था।
लेकिन सितंबर 2026 तक परियोजना के कुछ हिस्सों में काम और गुणवत्ता से जुड़े सवाल बने हुए हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में परियोजना में देरी के लिए भूमि संबंधी अड़चन, जरूरी मंजूरियों में देरी और कुछ ठेकेदारों की धीमी प्रगति को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया था।
मीडिया रिपोर्टों में भी परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में डायवर्जन, जलभराव, मरम्मत और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं का उल्लेख हुआ है। हाल में अपग्रेड किए गए कुछ हिस्सों में मानसून के बाद सड़क की सतह और गड्ढों को लेकर भी शिकायतें सामने आईं।
इससे साफ है कि परियोजना की चुनौती केवल निर्माण पूरा करने तक सीमित नहीं है। सड़क की गुणवत्ता और यात्रियों की वास्तविक सुविधा भी बड़ा मुद्दा है।
गडकरी ने परियोजनाओं में देरी और खराब गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।
उन्होंने कहा कि वह ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने के मामले में सख्ती बरतेंगे। उनका कहना है कि खराब प्रदर्शन और काम में लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गडकरी ने यह भी कहा कि उनका मंत्रालय बड़ी संख्या में ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और अधिकारियों के निलंबन का रिकॉर्ड बनाने की स्थिति तक पहुंच सकता है।
गडकरी ने पोरवोरिम में 6 लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन किया। यह करीब 5.15 किमी लंबा कॉरिडोर है और इसका उद्देश्य उत्तर गोवा की व्यस्त सड़क पर यातायात दबाव कम करना है।
इस परियोजना के जरिए पोरवोरिम क्षेत्र में यातायात प्रवाह बेहतर होने और स्थानीय यात्रियों के सफर का समय कम होने की उम्मीद है।
गडकरी ने इस मौके पर सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुंबई-गोवा हाईवे की मौजूदा स्थिति ने एक अहम सवाल खड़ा किया है। किसी बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि निर्माण कब पूरा हुआ।
सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा, जल निकासी, पुलों की स्थिति और यातायात व्यवस्था भी उतनी ही अहम हैं।
यात्रियों के लिए हाईवे तभी उपयोगी होगा जब सफर लगातार, सुरक्षित और कम बाधाओं वाला हो।
मुंबई-गोवा मार्ग महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों को गोवा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण परिवहन गलियारा है। इस मार्ग से पर्यटन, स्थानीय कारोबार, माल परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क को फायदा मिलने की उम्मीद रहती है।
बेहतर सड़क संपर्क से मुंबई और कोंकण क्षेत्र के बीच यात्रा सुगम हो सकती है। इससे गोवा की ओर जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
लेकिन परियोजना के लगातार खिंचने से लोगों को लंबे समय तक निर्माण गतिविधियों, डायवर्जन और ट्रैफिक से जूझना पड़ा है।
गडकरी का अक्टूबर में खुद सड़क मार्ग से मुंबई से गोवा जाना इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण समीक्षा मानी जा रही है। वह निर्माण की स्थिति के साथ यात्रियों के अनुभव और सड़क की वास्तविक गुणवत्ता का जायज़ा लेने की बात कह चुके हैं।
इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष निर्माण कार्य किस गति से पूरा होता है और देरी के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों या अधिकारियों के खिलाफ कितनी कार्रवाई होती है।
मुंबई-गोवा हाईवे की कहानी अब केवल एक अधूरी सड़क परियोजना की कहानी नहीं रह गई है। यह समयसीमा, निर्माण गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक धन के प्रभावी इस्तेमाल से जुड़ा बड़ा बुनियादी ढांचा मुद्दा बन चुका है।
गडकरी का उद्घाटन से दूरी बनाने का फैसला उनकी नाराज़गी को स्पष्ट करता है। लेकिन असली कसौटी अक्टूबर का निरीक्षण और उसके बाद परियोजना की जमीन पर स्थिति होगी। यात्रियों के लिए अंतिम सवाल यही रहेगा कि हाईवे कब पूरी तरह तैयार होता है और क्या वह सुरक्षित तथा सुविधाजनक सफर का भरोसा पूरा करता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।