गाजियाबाद से हरिद्वार तक बेहतर सड़क संपर्क देने वाली Gang Nahar Patri Road परियोजना का संयुक्त सर्वे पूरा हो गया है। अंतिम तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। संशोधित डिजाइन के जरिए पर्यावरण संरक्षण और बेहतर कनेक्टिविटी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
गाजियाबाद से हरिद्वार तक सफर आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम
सर्वे पूरा, अंतिम मंजूरी का इंतजार
गाजियाबाद से मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और हरिद्वार तक यात्रा को अधिक तेज़ और सुगम बनाने वाली Gang Nahar Patri Road परियोजना एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त टीम ने परियोजना का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया है। अब शासन स्तर से अंतिम तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में कनेक्टिविटी, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बेहतर बनाने वाली महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर योजना माना जा रहा है।
नए डिजाइन ने बदली तस्वीर
परियोजना के शुरुआती प्रस्ताव में सड़क को गंग नहर से लगभग 7.5 मीटर की दूरी पर बनाने की योजना थी। इस योजना के तहत एक लाख से अधिक पेड़ों के कटान की आशंका जताई गई थी, जिस पर पर्यावरण संबंधी चिंताएं सामने आईं और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने हस्तक्षेप किया।
इसके बाद डिजाइन में बदलाव किया गया। संशोधित योजना के अनुसार अब सड़क नहर से लगभग दो मीटर की दूरी पर बनाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव से करीब 95 हजार से अधिक पेड़ों को बचाया जा सकेगा और केवल सीमित संख्या में पेड़ों पर असर पड़ेगा।
111 किलोमीटर लंबी परियोजना
प्रस्तावित दो-लेन सड़क गाजियाबाद के मुरादनगर से शुरू होकर मेरठ और मुजफ्फरनगर के रास्ते आगे बढ़ेगी। इसकी कुल लंबाई लगभग 111 किलोमीटर होगी। परियोजना की अनुमानित लागत 628 से 700 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क बनने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बीच यात्रा का समय कम होगा और माल परिवहन भी अधिक सुगम बनेगा।
कांवड़ यात्रा को मिलेगा बड़ा लाभ
हर वर्ष सावन के दौरान कांवड़ यात्रा के समय राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है। इस नई सड़क के बनने से श्रद्धालुओं और सामान्य वाहनों के लिए अलग एवं बेहतर यातायात व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
इससे सड़क सुरक्षा में सुधार होने के साथ-साथ लंबी दूरी के यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
विकास और पर्यावरण का संतुलन
यह परियोजना इस बात का उदाहरण बन सकती है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण के साथ भी आगे बढ़ सकते हैं। संशोधित डिजाइन में पेड़ों को बचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे विकास और हरित संतुलन दोनों को प्राथमिकता मिल सके।
हालांकि परियोजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निर्माण के दौरान पर्यावरणीय शर्तों और सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जाता है।
आगे क्या?
अब पूरी परियोजना की निगाह शासन स्तर से मिलने वाली अंतिम तकनीकी मंजूरी पर टिकी है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी और धार्मिक पर्यटन दोनों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
Gang Nahar Patri Road परियोजना केवल एक नई सड़क नहीं बल्कि बेहतर परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास का साझा मॉडल बन सकती है। यदि संशोधित डिजाइन के अनुरूप निर्माण पूरा होता है, तो गाजियाबाद से हरिद्वार तक का सफर अधिक सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।