SIR और Form 6 विवाद के बीच राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग तक मार्च किया। पुलिस ने उन्हें रोका, जिसके बाद सांसदों ने सड़क पर धरना दिया।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 6 October 2026
✍️ Mohd Naved
नई दिल्ली में मंगलवार को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवाद ने राजनीतिक रंग और तेज कर दिया। INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां रहीं।
मार्च के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी हाथ में एक तख़्ती लिए दिखाई दिए, जिस पर लिखा था, “ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो।” राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसके साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफ़ा देने की मांग भी रखी।
मार्च को पुलिस ने चुनाव आयोग मुख्यालय पहुंचने से पहले रोक दिया। इसके बाद विपक्षी सांसद सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने कुछ विपक्षी नेताओं को हिरासत में भी लिया। राहुल गांधी मौके पर अन्य सांसदों के साथ धरने पर बैठे रहे।
मुख्य घटनाक्रम
विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग की तरफ बढ़े थे। उन्हें नीति आयोग कार्यालय और आकाशवाणी भवन के बीच वाले रास्ते पर रोका गया। यह मार्ग चुनाव आयोग मुख्यालय की दिशा में जाता है। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
मार्च में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी सांसद शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की।
विपक्ष की मुख्य आपत्ति
विपक्ष का कहना है कि SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में संभावित बदलावों को लेकर पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष के नेताओं ने Form 6 से जुड़े विवाद को भी अपने प्रदर्शन का अहम आधार बनाया। Form 6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने से जुड़ा वैधानिक आवेदन है।
5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत ने चुनाव आयोग के रिकॉर्ड देखने की बात कही, ताकि यह पता लगाया जा सके कि Form 6 में बदलाव किस स्तर पर किया गया था।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब चुनाव आयोग की ओर से पहले कहा गया था कि SIR से जुड़े Form 6 में संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का समर्थन हासिल था। आयोग ने बाद में अपने रुख में यह भी कहा कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया था और अतिरिक्त घोषणा एक अलग प्रक्रिया के तहत जोड़ी गई थी।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़ा उसका 24 June 2025 का आदेश पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के ढांचे को सुप्रीम कोर्ट के 27 May 2026 के फैसले में बरकरार रखा गया था।
Form 6 के विवाद में आयोग और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बीच जो अंतर सामने आया है, वही मौजूदा राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा है। अदालत अब रिकॉर्ड के आधार पर यह देखना चाहती है कि Form 6 से संबंधित बदलाव या अतिरिक्त घोषणा किस प्रक्रिया के तहत लागू हुई।
यानी इस स्तर पर यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने किसी व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया है। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और पक्षों से जवाब मांगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्यों अहम है
5 October की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 के बदलाव को लेकर स्पष्टता मांगी। इसी विवाद से जुड़ी याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अदालत ने यह संकेत भी दिया है कि अगर चुनाव आयोग का कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसे न्यायिक समीक्षा के दायरे में लिया जा सकता है। फिलहाल अदालत के सामने तथ्य और रिकॉर्ड की जांच का चरण जारी है।
राहुल गांधी का राजनीतिक संदेश
राहुल गांधी की “ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो” वाली तख़्ती ने प्रदर्शन को एक अलग राजनीतिक संदेश दिया। इसका मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की इस्तीफ़े की मांग को सीधे और सार्वजनिक तरीके से पेश करना था।
यह भाषा पारंपरिक राजनीतिक नारे से अलग थी। लेकिन इसके पीछे मुद्दा वही था, SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष की आपत्ति।
विपक्ष का दावा और उसकी सीमा
विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कुछ नेताओं ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा भी किया है। ऐसे दावों को स्वतंत्र आधिकारिक सत्यापन के बिना स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
मौजूदा स्थिति में स्थापित तथ्य यह है कि SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। Form 6 से जुड़े बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है। चुनाव आयोग अपने फैसलों और SIR की प्रक्रिया का बचाव कर रहा है। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की मांग कर रहा है।
धरना और आगे की रणनीति
मार्च रोके जाने के बाद विपक्षी सांसद सड़क पर बैठ गए। इस प्रदर्शन ने संसद और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव को और मुखर कर दिया।
विपक्षी दल इस मुद्दे को आगे भी राजनीतिक और कानूनी मंचों पर उठाने की तैयारी में हैं। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की इच्छा भी जताई है।
क्या होगा आगे
अब सबसे अहम घटनाक्रम चुनाव आयोग द्वारा अदालत के सामने रिकॉर्ड और जवाब पेश करना होगा। Form 6 में अतिरिक्त घोषणा कैसे जोड़ी गई, किस प्रक्रिया के तहत लागू हुई और संबंधित फैसलों में आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया क्या रही, इन सवालों पर न्यायिक पड़ताल आगे बढ़ सकती है।
राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष SIR और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को बड़ा मुद्दा बनाए रखने की कोशिश करेगा। वहीं चुनाव आयोग के सामने अपनी प्रक्रिया और फैसलों की संवैधानिक तथा कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती रहेगी।
राहुल गांधी की “इट्स डन ब्रो” तख़्ती मंगलवार के प्रदर्शन की सबसे चर्चित तस्वीर बनी, लेकिन विवाद का असल केंद्र एक राजनीतिक नारा नहीं है। असली सवाल मतदाता सूची की प्रक्रिया, Form 6 में हुए बदलाव, SIR की वैधानिकता और चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा है।
इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकलेंगे। फिलहाल विपक्ष आरोप लगा रहा है, चुनाव आयोग अपने फैसलों का बचाव कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। यही तथ्य इस विवाद की मौजूदा स्थिति को सबसे सटीक तरीके से बयान करते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।