ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की रणनीति तेज, INDIA गठबंधन में मतभेद के दावे पर क्या है हकीकत?
Wasi Siddiqui
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2026-09-28 16:07:48
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी कार्रवाई तेज है। 30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक में SIR, चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है।
📍 नई दिल्ली 🗓️ 28 सितंबर 2026 ✍️ Wasi Siddiqui
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्ष की सियासी लामबंदी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव अब संसद और सियासी मंच से आगे बढ़कर विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति का मुद्दा बनता दिख रहा है। हालांकि, इसे INDIA गठबंधन के पूरी तरह बिखरने के रूप में पेश करना मौजूदा घटनाक्रम से मेल नहीं खाता। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी दल 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक कर इसी मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की तैयारी में हैं।
इस घटनाक्रम का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया है। विपक्षी दलों ने SIR और आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं।
ज्ञानेश कुमार कौन हैं
ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने। वे 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। वर्तमान चुनाव आयोग में उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं।
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और लोकसभा, राज्यसभा से संबंधित चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ विधानसभा और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनावों के प्रशासन की जिम्मेदारी निभाता
है। मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
विवाद की असली वजह क्या है
मौजूदा राजनीतिक विवाद का एक बड़ा हिस्सा SIR को लेकर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल पैदा हुए हैं।
इसी दौरान चुनाव आयोग के भीतर SIR से संबंधित फैसलों पर अलग-अलग राय होने की खबरें सामने आईं। विपक्ष ने इन रिपोर्टों को आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल के तौर पर इस्तेमाल किया।
चुनाव आयोग ने इन मतभेदों की व्याख्या अलग तरीके से की है। आयोग के मुताबिक अलग-अलग विचार संस्थागत deliberation का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय आयोग की संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
26 सितंबर की आयोग बैठक में SIR से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा गया कि जिन लोगों को unmapped या logical discrepancies के कारण नोटिस मिला है, उनके घर BLO दस्तावेज लेने के लिए जा सकते हैं। इसके बाद दस्तावेज ECI प्रणाली पर अपलोड किए जाएंगे।
विपक्ष ने पहले भी हटाने की कोशिश की
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी कार्रवाई कोई नई पहल नहीं है।
24 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नया नोटिस दिया था। विपक्ष ने इसमें 9 आरोपों का उल्लेख किया था और संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
इससे पहले भी विपक्ष की ओर से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की गई थी। अप्रैल की कार्रवाई को विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े अपने आरोपों के आधार पर आगे बढ़ाया था।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ अंतिम रूप से सिद्ध आरोप एक ही चीज नहीं हैं। मौजूदा विवाद में विपक्ष के आरोपों को उसी रूप में attribution के साथ देखना जरूरी है।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी की भूमिका
मौजूदा घटनाक्रम में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर संवाद महत्वपूर्ण हो गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से संपर्क कर विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की बात कही। 30 सितंबर को दिल्ली के Constitution Club में INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक प्रस्तावित है। बैठक का एजेंडा चुनाव आयोग, SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की रणनीति से जुड़ा है।
इससे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक तथ्य सामने आता है। ज्ञानेश कुमार का मुद्दा फिलहाल विपक्षी दलों के बीच दूरी बढ़ाने के बजाय कई दलों को साझा मंच पर ला रहा है।
विशेष रूप से TMC और CPI(M) जैसे पश्चिम बंगाल के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दल भी इस मुद्दे पर समान चिंता व्यक्त करते दिखाई दे रहे हैं।
क्या INDIA गठबंधन टूट गया है?
मौजूदा तथ्यों के आधार पर INDIA गठबंधन के टूटने की पुष्टि नहीं होती।
इसके उलट, 30 सितंबर की बैठक की तैयारी बताती है कि विपक्षी दल एक साझा राजनीतिक और संसदीय रणनीति पर विचार कर रहे हैं। अलग-अलग दलों की अपनी क्षेत्रीय राजनीति और चुनावी प्राथमिकताएं जरूर हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार और SIR का मुद्दा फिलहाल साझा विपक्षी कार्रवाई का आधार बना हुआ है।
इसलिए ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी और ममता बनर्जी की रणनीति को “उम्मीदें धरी रह गईं” या “गठबंधन बिखर गया” जैसे निष्कर्षों से जोड़ना एक राजनीतिक interpretation होगा, स्थापित तथ्य नहीं।
30 सितंबर की बैठक क्यों महत्वपूर्ण है
30 सितंबर की बैठक में विपक्षी दल आगे की संसदीय और राजनीतिक कार्रवाई पर चर्चा कर सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक और removal notice की तैयारी पर भी विचार चल रहा है।
इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले कानूनी पहलुओं की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है। विपक्ष पहले ही संसद में हटाने की कोशिश कर चुका है।
बैठक में SIR को लेकर संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम और विरोध की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।
विवाद का दूसरा पक्ष
चुनाव आयोग का पक्ष इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है।
आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय या observations संस्थागत deliberation का हिस्सा हैं। आयोग ने अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है।
इसलिए पूरे विवाद को केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं होगा। SIR के नियम, मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया, नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए उपलब्ध प्रक्रिया और आयोग के आदेशों की कानूनी स्थिति, ये सभी पहलू महत्वपूर्ण हैं।
आगे क्या होगा
30 सितंबर की बैठक के बाद विपक्ष की रणनीति अधिक स्पष्ट हो सकती है। तीन प्रमुख मुद्दों पर नजर रहेगी।
पहला, क्या विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक नया संसदीय removal motion आगे बढ़ाता है।
दूसरा, क्या INDIA गठबंधन SIR को लेकर संयुक्त विरोध कार्यक्रम घोषित करता है।
तीसरा, क्या अलग-अलग राजनीतिक दल चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी अलग रणनीति के बावजूद साझा संसदीय कार्रवाई पर सहमत होते हैं।
इन सवालों का जवाब बैठक और उसके बाद सामने आने वाले आधिकारिक फैसलों से मिलेगा।
ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद ने विपक्षी राजनीति में नया coordination पैदा किया है। अप्रैल में 73 विपक्षी सांसदों की ओर से हटाने का नोटिस दिया गया था और अब सितंबर में विपक्षी दल फिर से संयुक्त रणनीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इसलिए मौजूदा स्थिति को INDIA गठबंधन के बिखराव के रूप में देखना उपलब्ध तथ्यों से समर्थित नहीं है। फिलहाल ज्यादा स्पष्ट तस्वीर यह है कि चुनाव आयोग और SIR का मुद्दा विपक्षी दलों के लिए साझा राजनीतिक और संसदीय agenda बन रहा है।
आगे की दिशा 30 सितंबर की बैठक और उसके बाद होने वाली औपचारिक कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।