हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर राहुल गांधी का हमला, बीजेपी का पलटवार
Asif Khan
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2026-08-30 07:33:30
हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर राहुल गांधी ने कार्रवाई और प्राथमिकी की मांग की है। बीजेपी ने आरोपों को खारिज किया है।
📍 Haldwani 🗓️ 30 August ✍️ Asif Khan
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को इस मामले को दलित सम्मान और छुआछूत से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की। बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस के राजनीतिक और दलित संबंधी रिकॉर्ड पर पलटवार किया है।
क्या है पूरा मामला
मल्लिकार्जुन खड़गे ने ८ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, १० अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने उसी स्थल पर शुद्धिकरण यज्ञ किया था। इस आयोजन के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खड़गे के वहां कार्यक्रम करने के बाद मंच या मैदान का शुद्धिकरण कराया गया, जो दलितों के प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
इस घटना ने उत्तराखंड की राजनीति में विवाद खड़ा कर दिया। कांग्रेस ने इसे सामाजिक भेदभाव और जातिगत अपमान से जोड़ते हुए सवाल उठाए, जबकि बीजेपी ने इस आयोजन से पार्टी का संबंध होने से इनकार किया।
राहुल गांधी ने क्या कहा
राहुल गांधी ने २९ अगस्त को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण को सामान्य धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जा सकता और इसे दलितों के साथ होने वाले भेदभाव के व्यापक संदर्भ में समझना चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग भी की।
राहुल गांधी ने इस विवाद को केवल खड़गे तक सीमित नहीं रखा। उनका कहना था कि अगर देश के एक प्रमुख दल के दलित अध्यक्ष के साथ सार्वजनिक रूप से ऐसा व्यवहार होने का आरोप सामने आता है, तो इससे समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव के बड़े सवाल पर चर्चा जरूरी हो जाती है। उन्होंने इसे संविधान में निहित समानता और गरिमा के सिद्धांत से जोड़ते हुए बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा पर भी निशाना साधा।
हालांकि, राहुल गांधी के आरोप राजनीतिक बयान हैं। किसी कथित अपराध में संबंधित कानून की धाराएं लागू होंगी या नहीं, यह घटना के वास्तविक तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर तय किया जाना होता है।
बीजेपी ने आरोपों को किया खारिज
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वहां किसी व्यक्ति या जाति के शुद्धिकरण का यज्ञ नहीं हुआ था। उनके मुताबिक, रैली के दौरान कथित धार्मिक नारों से भावनाएं आहत होने के बाद रामलीला मैदान में यज्ञ कराया गया था। धामी ने यह भी कहा कि आयोजन कराने वाले लोग बीजेपी के पदाधिकारी या कार्यकर्ता नहीं थे।
केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने भी बीजेपी या सरकार की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में धार्मिक आयोजन होते रहते हैं और उनके मुताबिक रैली के बाद वहां काफी कूड़ा पड़ा था। उन्होंने आयोजन को सफाई और धार्मिक गतिविधि से जोड़ते हुए राहुल गांधी से उत्तराखंड को इस तरह बदनाम नहीं करने की अपील की।
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरीश चंद्र पांडे ने भी संगठन का बीजेपी और आरएसएस से संबंध होने से इनकार किया। उनके मुताबिक, यज्ञ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के कारण कराया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि आयोजन में कुछ दलित लोग भी शामिल थे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
बीजेपी का कांग्रेस पर पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों के बाद बीजेपी प्रवक्ताओं सुधांशु त्रिवेदी और गुरु प्रकाश पासवान ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर पलटवार किया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इतिहास दलित विरोधी रहा है और राहुल गांधी को बीजेपी पर आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी के रिकॉर्ड पर भी बात करनी चाहिए।
गुरु प्रकाश पासवान ने कांग्रेस नेतृत्व पर दलित नेताओं के साथ कथित व्यवहार को लेकर कई राजनीतिक सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दलित समाज की याद केवल राजनीतिक मुद्दों के लिए आती है। बीजेपी के इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस की ओर से इस रिपोर्ट के समय तक कोई विस्तृत प्रतिवाद उपलब्ध नहीं था।
विवाद का राजनीतिक असर
हल्द्वानी का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में २०२७ के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और दलित सम्मान के मुद्दे के रूप में उठा रही है, जबकि बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं और कांग्रेस की कथित तुष्टिकरण राजनीति से जोड़ रही है।
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि कथित शुद्धिकरण आयोजन कराने वाले संगठन और बीजेपी के बीच संबंध को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। कांग्रेस इसे बीजेपी से जुड़ा बताती रही है, जबकि बीजेपी और आयोजन से जुड़े लोगों ने पार्टी से संबंध होने से इनकार किया है। इसलिए इस पहलू को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश करने के बजाय आरोप और खंडन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या
राहुल गांधी ने प्राथमिकी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस की ओर से इस मामले में जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ाया जा रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी इस आरोप को खारिज करते हुए इसे धार्मिक आयोजन और राजनीतिक विवाद के रूप में पेश कर रही है।
यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई औपचारिक जांच, प्राथमिकी या अन्य कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में राजनीतिक आरोप और उनके जवाब स्पष्ट हैं, लेकिन किसी व्यक्ति या संगठन की आपराधिक जिम्मेदारी तय होना अभी अलग कानूनी प्रक्रिया का विषय है।
यहां सबसे अहम सवाल यही है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए आयोजन का वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या उसमें किसी व्यक्ति की जाति को आधार बनाया गया था। इस सवाल का जवाब राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आना चाहिए।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।