शनिवार, 15 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
India

हरियाली तीज पर क्यों पहनती हैं महिलाएं हरी चूड़ियां और ड्रेस?

Neelam Saini 2026-08-15 19:25:53
हरियाली तीज पर क्यों पहनती हैं महिलाएं हरी चूड़ियां और ड्रेस?

हरियाली तीज पर हरा रंग क्यों है खास? जानिए वजह

हरी चूड़ियां और हरी ड्रेस पहनने की क्या है परंपरा?

हरियाली तीज पर महिलाएं क्यों पहनती हैं हरे कपड़े?

हरियाली तीज सावन की हरियाली, प्रकृति के नवजीवन और शिव-पार्वती की आराधना से जुड़ा पर्व है। हरे वस्त्र और चूड़ियां इसी मौसमी तथा सांस्कृतिक प्रतीकवाद को दर्शाते हैं। हरा पहनना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में रीति बदल सकती है, लेकिन हरा रंग पर्व की प्रमुख परंपरा है।

LOCATION | DATE | BYLINE

📍 नई दिल्ली | 13 अगस्त 2026 | ✍️ शाह टाइम्स डिजिटल डेस्क

हरियाली तीज पर हरे रंग का इतना महत्व क्यों?

हरियाली तीज सावन महीने में मनाया जाने वाला ऐसा पर्व है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ मौसम, प्रकृति और लोकपरंपराओं का भी गहरा मेल दिखाई देता है। वर्ष 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी। भारत सरकार के इनक्रेडिबल इंडिया पोर्टल के मुताबिक तीज के अवसर पर महिलाएं पारंपरिक रूप से हरे और लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। 
इस पर्व की सबसे पहचानने योग्य परंपराओं में महिलाओं का हरी साड़ी, हरे परिधान और हरी चूड़ियां पहनना शामिल है। सवाल यह है कि आखिर सावन के इस त्योहार में हरे रंग को ही इतनी प्रमुखता क्यों मिली? इसका जवाब केवल धार्मिक मान्यता में नहीं, बल्कि मानसून, प्रकृति के बदलाव और सदियों से विकसित हुई सांस्कृतिक परंपराओं में भी मिलता है।

‘हरियाली’ नाम में ही छिपा है हरे रंग का संकेत

हरियाली तीज का नाम ही सावन में चारों तरफ दिखाई देने वाली हरियाली से जुड़ा है। मानसून के दौरान बारिश के बाद पेड़-पौधों और खेतों में नई हरियाली दिखाई देती है। भारत सरकार के उत्सव पोर्टल पर भी इस पर्व को मानसून के आगमन और धरती पर छाई हरियाली से जोड़ा गया है। यही वजह है कि हरा रंग इस पर्व के मौसमी स्वरूप का एक प्रमुख प्रतीक बन गया। बारिश के मौसम में प्रकृति के पुनर्जीवन को देखकर लोगों के बीच उत्सव का माहौल बनता है और महिलाओं के परिधान तथा श्रृंगार में भी इसका असर दिखाई देता है।
इस दृष्टि से हरी ड्रेस केवल पहनावे का हिस्सा नहीं है, बल्कि सावन की प्रकृति और जीवन में आए नएपन को दर्शाने वाली सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी मानी जाती है।

हरी चूड़ियों का क्या है सांस्कृतिक महत्व?

हरियाली तीज पर हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा भी इसी व्यापक सांस्कृतिक प्रतीकवाद से जुड़ी है। विभिन्न परंपराओं और लोकप्रिय धार्मिक व्याख्याओं में हरे रंग को समृद्धि, उर्वरता, विकास, सौहार्द और नए आरंभ से जोड़ा जाता है। विवाहित महिलाओं के लिए तीज का पर्व दांपत्य जीवन की खुशहाली और परिवार के मंगल की कामना से जुड़ा रहा है। ऐसे में हरे रंग को जीवन, वृद्धि और समृद्धि के प्रतीक के तौर पर देखने की परंपरा ने हरी चूड़ियों और हरे वस्त्रों को त्योहार के श्रृंगार का अहम हिस्सा बना दिया। हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हरी चूड़ियां पहनना हर महिला के लिए कोई सार्वभौमिक या अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और समुदायों में तीज के पहनावे और रस्मों में अंतर देखने को मिलता है।

शिव-पार्वती की कथा से कैसे जुड़ा है यह पर्व?

हरियाली तीज का धार्मिक संदर्भ भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा है। भारतीय धार्मिक परंपरा में इसे माता पार्वती की भक्ति, तपस्या और शिव को पति के रूप में प्राप्त करने की कथा से जोड़ा जाता है। तीज के अवसर पर महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। लोकप्रिय धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कथा को तीज की आस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस कथा के विवरण और स्थानीय परंपराओं में कुछ भिन्नताएं मिलती हैं, इसलिए इन्हें धार्मिक लोकविश्वास के संदर्भ में समझना अधिक उचित है। इसी धार्मिक पृष्ठभूमि में तीज का श्रृंगार भी केवल सौंदर्य प्रदर्शन नहीं रह जाता, बल्कि पूजा, आस्था और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन जाता है।

क्या हरा रंग केवल धार्मिक वजह से पहना जाता है?

नहीं। उपलब्ध सांस्कृतिक स्रोतों को देखें तो हरे रंग की लोकप्रियता के पीछे कई परतें हैं। एक तरफ इसका संबंध सावन और मानसून की हरियाली से है, दूसरी तरफ इसे प्रकृति, विकास, समृद्धि और नवजीवन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। द इंडियन एक्सप्रेस ने भी हरियाली तीज को सावन और मानसून की शुरुआत से जोड़ते हुए बताया है कि इस अवसर पर महिलाएं चमकीले लाल और हरे परिधानों के साथ रंग-बिरंगी चूड़ियां पहनती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि त्योहार का पहनावा क्षेत्रीय संस्कृति और मौसम दोनों से प्रभावित है। इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि हरा रंग तीज की परंपरा में धार्मिक आस्था, प्राकृतिक वातावरण और लोकसंस्कृति—तीनों के मेल से प्रमुख हुआ है।

क्या हरियाली तीज पर सिर्फ हरे कपड़े ही पहनना जरूरी है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा। तीज के दौरान हरा रंग सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक रंगों में से एक है, लेकिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के परिधान में लाल, गुलाबी और अन्य चमकीले रंग भी दिखाई देते हैं। भारत सरकार के इनक्रेडिबल इंडिया पोर्टल के अनुसार भी तीज पर हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा प्रचलित है। इससे यह समझना जरूरी है कि त्योहार की सांस्कृतिक परंपरा को किसी एक रंग तक सीमित नहीं किया जा सकता। हरा रंग पहचान का प्रमुख हिस्सा जरूर है, लेकिन इसे धार्मिक बाध्यता के तौर पर प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। आधुनिक समय में महिलाएं अपनी पसंद, क्षेत्रीय परंपरा और फैशन के मुताबिक तीज का परिधान चुनती हैं। इसलिए हरी साड़ी या हरी ड्रेस पहनना परंपरा का सम्मान हो सकता है, लेकिन त्योहार मनाने की अनिवार्य शर्त नहीं।

हरियाली तीज में श्रृंगार की परंपरा क्यों महत्वपूर्ण है?

तीज के अवसर पर मेहंदी, चूड़ियां, पारंपरिक आभूषण और अन्य श्रृंगार की परंपरा भी व्यापक रूप से दिखाई देती है। कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन सजती-संवरती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीतों में हिस्सा लेती हैं। भारत सरकार के पर्यटन स्रोत तीज को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी दर्ज करते हैं। हरियाली तीज के सामाजिक पक्ष को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कई इलाकों में यह पर्व महिलाओं के सामूहिक मिलन, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर बनता है। हरियाणा और पंजाब में तीज से जुड़े आयोजनों में पारंपरिक लोकनृत्य और सामुदायिक कार्यक्रमों की परंपरा का उल्लेख सरकारी पर्यटन स्रोत में भी मिलता है। 

सिंधारा और मायके से जुड़ी परंपरा

हरियाली तीज से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सामाजिक परंपरा सिंधारा भी है। कई उत्तर भारतीय परिवारों में विवाहित बेटियों को मायके से कपड़े, श्रृंगार सामग्री, मिठाइयां और अन्य उपहार भेजे जाते हैं। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के उत्सव पोर्टल के अनुसार, तीज से पहले महिलाओं को मायके बुलाने और कपड़े, आभूषण, सौंदर्य सामग्री, मेहंदी तथा मिठाइयां देने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इस परंपरा का सामाजिक अर्थ केवल उपहार देने तक सीमित नहीं है। यह मायके और ससुराल के रिश्तों, बेटी के प्रति स्नेह और पारिवारिक जुड़ाव की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी मानी जाती है।

क्या हरा रंग समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक है?

लोकप्रिय सांस्कृतिक और धार्मिक व्याख्याओं में हरे रंग को जीवन, वृद्धि, उर्वरता और समृद्धि से जोड़ा जाता है। मानसून में सूखी धरती पर हरियाली लौटना इस प्रतीकवाद को और मजबूत करता है। लेकिन इन अर्थों को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। ये मुख्यतः धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताएं और प्रतीकात्मक व्याख्याएं हैं, जिनका महत्व समाज और परंपरा के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। यही अंतर पत्रकारिता में महत्वपूर्ण है। किसी रंग को शुभ मानने की परंपरा का उल्लेख किया जा सकता है, लेकिन उससे जुड़े धार्मिक विश्वासों को प्रमाणित वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

अलग-अलग राज्यों में बदल सकता है तीज का रंग-रूप

हरियाली तीज उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोकप्रिय है, लेकिन इसकी रस्मों और उत्सव के तौर-तरीकों में क्षेत्रीय विविधता मिलती है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में तीज की अपनी-अपनी लोकपरंपराएं हैं। कहीं झूले और लोकगीत मुख्य आकर्षण होते हैं, तो कहीं मंदिरों में पूजा और सामूहिक आयोजन अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इसी तरह पहनावे में भी स्थानीय संस्कृति का असर दिखाई देता है। इसलिए हरियाली तीज को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान के बजाय धर्म, लोकसंस्कृति, मौसम और सामाजिक रिश्तों के साझा उत्सव के रूप में देखना ज्यादा व्यापक दृष्टिकोण है।

पाठकों के सवाल, सीधे जवाब

हरियाली तीज पर महिलाएं हरी चूड़ियां क्यों पहनती हैं?

हरी चूड़ियों की परंपरा हरे रंग के सांस्कृतिक प्रतीकवाद से जुड़ी है। हरा रंग सावन की हरियाली, प्रकृति, विकास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। तीज के दांपत्य और पारिवारिक संदर्भ ने इस परंपरा को और मजबूत किया है। 

हरियाली तीज पर हरी ड्रेस क्यों पहनी जाती है?

सावन में प्रकृति हरी हो जाती है और इसी कारण तीज को ‘हरियाली’ से जोड़ा गया है। हरे वस्त्र इस मौसमी बदलाव और प्रकृति के नवजीवन को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाते हैं। 

क्या हरा पहनना जरूरी है?

नहीं। हरा रंग तीज की प्रमुख परंपरा है, लेकिन इसे हर महिला के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जा सकता। अलग-अलग क्षेत्रों में लाल, हरे और अन्य पारंपरिक रंगों के परिधान भी पहने जाते हैं। 

हरियाली तीज किसकी पूजा से जुड़ी है?

यह पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना तथा उनके दांपत्य संबंध से जुड़ा है। महिलाएं पारिवारिक सुख और दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए पूजा करती हैं। 

2026 में हरियाली तीज कब है?

भारत सरकार के इनक्रेडिबल इंडिया पोर्टल के अनुसार 2026 में तीज शनिवार, 15 अगस्त को है। 

निष्कर्ष

हरियाली तीज पर हरी चूड़ियां और हरे कपड़े पहनने की परंपरा को किसी एक धार्मिक कारण तक सीमित करना उचित नहीं होगा। इसके पीछे सावन की हरियाली, मानसून के बाद प्रकृति का पुनर्जीवन, समृद्धि और विकास से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक तथा शिव-पार्वती की आराधना—कई पहलू मौजूद हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हरा रंग तीज की परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है, लेकिन इसे अनिवार्य धार्मिक नियम मानना जरूरी नहीं। समय के साथ पहनावे और उत्सव के तौर-तरीके बदल रहे हैं, जबकि प्रकृति, आस्था और सामाजिक रिश्तों से जुड़ा तीज का मूल भाव आज भी कायम है।

ADVERTISEMENT
Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है? जानिए इतिहास और धार्मिक महत्व

2026-08-13 17:48:26

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है? जानिए हरी चूड़ियों का महत्व

2026-08-09 14:19:00

सावन में महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां? जानिए परंपरा, आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

2026-08-02 16:48:48

कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए इसका इतिहास और पूरी कहानी

2026-07-30 14:41:57

क्या जमीन के नीचे बहती है सरस्वती नदी? जानिए पूरा सच

2026-08-09 17:40:31

भारत में ‘नमस्ते’ की परंपरा कैसे शुरू हुई? जानिए इसका हजारों साल पुराना इतिहास

2026-08-01 18:05:24

कांवड़ यात्रा 2026: एसपी सिटी ने यात्रा मार्ग व गंगनहर सुरक्षा का लिया जायजा

2026-07-11 11:11:57

सावन में उपवास: सेहत का ख्याल कैसे रखें? जानिए जरूरी बातें

2026-08-10 15:49:39

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर