हुंडई मोटर में फिर हड़ताल, वेतन समझौते पर नहीं बनी बात
हुंडई कर्मचारियों का बड़ा फैसला, फिर रुकेगा उत्पादन
वेतन विवाद गहराया, हुंडई मोटर यूनियन ने बढ़ाई हड़ताल
दक्षिण कोरिया की हुंडई मोटर यूनियन ने वेतन वार्ता विफल रहने के बाद फिर आंशिक हड़ताल का फैसला किया है। यूनियन चार घंटे की शिफ्ट हड़तालों के साथ शुक्रवार को आठ घंटे का वॉकआउट करेगी। वेतन, बोनस, रिटायरमेंट उम्र और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली प्रमुख विवाद हैं।
दक्षिण कोरिया की हुंडई मोटर के करीब 40,000 सदस्यीय यूनियन ने मैनेजमेंट के साथ वेतन समझौता नहीं होने के बाद इस सप्ताह फिर आंशिक हड़ताल करने का फैसला किया है। 18 अगस्त को हुई 16वें दौर की मुख्य वार्ता में दोनों पक्ष वेतन और अन्य प्रमुख मुद्दों पर सहमति तक नहीं पहुंच सके।
यूनियन के मुताबिक बुधवार और गुरुवार को चार-चार घंटे की हड़ताल होगी, जबकि शुक्रवार को आठ घंटे का वॉकआउट प्रस्तावित है। अगले सप्ताह सोमवार और मंगलवार को भी चार-चार घंटे की आंशिक हड़ताल की योजना है। इस साल वेतन वार्ता शुरू होने के बाद यूनियन अब तक कुल 44 घंटे की आंशिक हड़ताल कर चुकी है।
विवाद का सबसे सीधा मुद्दा बेस पे है। यूनियन हर महीने मूल वेतन में 149,600 वॉन की बढ़ोतरी मांग रही है, जबकि कंपनी ने 80,000 वॉन की वृद्धि का प्रस्ताव रखा है।
बोनस को लेकर भी फासला काफी बड़ा है। यूनियन पिछले साल के कंपनी नेट प्रॉफिट के 30 प्रतिशत के बराबर परफॉर्मेंस बोनस चाहती है। मैनेजमेंट ने 350 प्रतिशत मासिक वेतन के बराबर बोनस, अतिरिक्त 10 मिलियन वॉन और 15 कंपनी शेयर देने का प्रस्ताव रखा है। सियोल इकोनॉमिक डेली की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का तर्क है कि यूनियन की परफॉर्मेंस पे मांग को स्वीकार करने पर कम से कम 3 ट्रिलियन वॉन का खर्च आएगा। इससे दोनों पक्षों के बीच वित्तीय अंतर की गंभीरता सामने आती है।
मामला अब बेस पे और बोनस से आगे बढ़ चुका है। यूनियन रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने और बर्खास्त यूनियन कर्मचारियों की बहाली की मांग भी कर रही है। मैनेजमेंट इन मुद्दों पर तत्काल सहमति के लिए तैयार नहीं है। रिटायरमेंट उम्र पर कंपनी का रुख है कि किसी नए प्रावधान को लागू करने से पहले कानूनी बदलाव जरूरी हैं। बर्खास्त कर्मचारियों के मामले में मैनेजमेंट का कहना है कि वह मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा के बाद साल के अंत में फैसला करेगा। इससे साफ है कि मौजूदा टकराव को केवल वेतन बढ़ोतरी की लड़ाई मानना अधूरा होगा। दोनों पक्ष रोजगार सुरक्षा, भविष्य की आय और लेबर रिलेशंस की व्यापक शर्तों पर भी आमने-सामने हैं।
हुंडई मोटर के लिए यह विवाद पहले से ही उत्पादन पर असर डाल रहा है। अगस्त की नई कार्रवाई से पहले जुलाई में यूनियन ने कुल 30 घंटे की हड़ताल की थी और चार बार शनिवार का ओवरटाइम भी नहीं किया था। इसके चलते करीब 42,510 वाहनों के उत्पादन में व्यवधान का अनुमान लगाया गया था। उद्योग के अनुमान के मुताबिक इससे जुड़ा बिक्री नुकसान कम से कम 1.8 ट्रिलियन वॉन तक पहुंच चुका था। हड़ताल जारी रहने पर यह आर्थिक असर बढ़ सकता है, हालांकि वास्तविक नुकसान उत्पादन कार्यक्रम, डिलीवरी और बाद में पूरी होने वाली यूनिट्स पर निर्भर करेगा। हड़ताल का असर कर्मचारियों की आय पर भी पड़ा है। कंपनी से जुड़े पहले के आंकड़ों के मुताबिक नो-वर्क, नो-पे व्यवस्था के कारण कुछ तकनीकी कर्मचारियों की औसत वेतन हानि करीब 1.92 मिलियन वॉन तक पहुंची थी।
18 अगस्त की वार्ता 41 दिन के अंतराल के बाद फिर शुरू हुई थी। दोनों पक्षों के बीच यह 16वां मुख्य वार्ता दौर था, लेकिन बातचीत में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई।
यूनियन की रणनीति साफ है। वह उत्पादन पर दबाव बढ़ाकर मैनेजमेंट से बेहतर आर्थिक पैकेज और रोजगार संबंधी मुद्दों पर ठोस जवाब चाहती है। कंपनी दूसरी तरफ लागत, कानूनी प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धात्मक दबाव को देखते हुए यूनियन की सभी मांगों को स्वीकार करने से बच रही है। यही गतिरोध हड़ताल के नए दौर की मुख्य वजह बना है। योनहाप के मुताबिक यूनियन ने बातचीत में अंतर कम नहीं होने के बाद इस सप्ताह और अगले सप्ताह के लिए नया हड़ताल कार्यक्रम तय किया।
मौजूदा घटनाक्रम में एक अहम बदलाव यह है कि विवाद आंशिक हड़तालों से आगे बढ़ रहा है। सियोल इकोनॉमिक डेली के मुताबिक यूनियन ने 21 अगस्त को आठ घंटे की पूर्ण हड़ताल का फैसला किया है। रिपोर्ट इसे 2016 के बाद हुंडई मोटर यूनियन की पहली पूरे दिन की पूर्ण हड़ताल बताती है। यूनियन की योजना उस दिन सभी फिनिश्ड-व्हीकल उत्पादन लाइनों को रोकने और बाद में सियोल स्थित कंपनी मुख्यालय की ओर मार्च करने की है। इससे विवाद का आर्थिक और सियासी दोनों असर बढ़ सकता है।
यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। 18 अगस्त की योनहाप रिपोर्ट मुख्य रूप से इस सप्ताह और अगले सप्ताह की आंशिक हड़तालों की पुष्टि करती है, जबकि सियोल इकोनॉमिक डेली ने 21 अगस्त की पूर्ण हड़ताल का अतिरिक्त कार्यक्रम रिपोर्ट किया है। इसलिए आगामी उत्पादन व्यवधान का वास्तविक स्तर यूनियन के कार्यक्रम और बाद की वार्ताओं पर निर्भर करेगा।
हुंडई मोटर वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल, हाइब्रिड और पारंपरिक वाहनों के बीच रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में घरेलू उत्पादन में लंबे व्यवधान से सप्लाई चेन, डीलर डिलीवरी और निर्यात कार्यक्रम प्रभावित होने का जोखिम रहता है।
कंपनी के लिए चुनौती केवल हड़ताल से होने वाला तत्काल उत्पादन नुकसान नहीं है। लंबे लेबर विवाद से श्रम लागत, उत्पादन स्थिरता और निवेश रणनीति पर भी दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ यूनियन के लिए भी लंबी हड़ताल आसान विकल्प नहीं है। नो-वर्क, नो-पे व्यवस्था के कारण कर्मचारियों की आय प्रभावित होती है। इसलिए यूनियन को आर्थिक दबाव और सदस्य हित के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
हुंडई मोटर की अपनी सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार कंपनी दक्षिण कोरिया में कर्मचारियों के संगठन बनाने, सामूहिक वार्ता और सामूहिक कार्रवाई के अधिकार को मान्यता देती है। कंपनी ने लेबर-मैनेजमेंट संवाद और जॉब स्टेबिलिटी कमेटी जैसे तंत्र भी स्थापित किए हैं। लेकिन इस साल की स्थिति बताती है कि संस्थागत संवाद होने के बावजूद प्रमुख आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों पर सहमति बनाना कठिन हो रहा है। यह अंतर कंपनी की औपचारिक लेबर पॉलिसी और मौजूदा औद्योगिक विवाद के बीच महत्वपूर्ण संदर्भ देता है। इस विवाद का नतीजा आगे की सामूहिक वार्ता के लिए भी मिसाल बन सकता है। अगर दोनों पक्ष व्यापक समझौते तक पहुंचते हैं तो उत्पादन सामान्य होने की संभावना बढ़ेगी। अगर गतिरोध बना रहता है तो हड़ताल का दायरा और आर्थिक असर बढ़ सकता है।
यूनियन का पक्ष है कि कंपनी के मुनाफे और कर्मचारियों के योगदान को देखते हुए वेतन और परफॉर्मेंस बोनस में बेहतर हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। वह रिटायरमेंट उम्र और बर्खास्त कर्मचारियों जैसे मुद्दों को भी मौजूदा वार्ता में शामिल करना चाहती है। मैनेजमेंट का नजरिया अलग है। कंपनी आर्थिक लागत, कानूनी स्थिति और रिटायरमेंट उम्र में बदलाव के लिए विधायी प्रक्रिया का हवाला दे रही है। उसका प्रस्ताव यूनियन की मांग से अलग है, लेकिन इसमें बेस पे वृद्धि, बोनस और शेयर शामिल हैं। दोनों पक्षों के तर्कों को देखते हुए यह विवाद किसी एक मुद्दे से हल होता नहीं दिखता। आर्थिक पैकेज के साथ रोजगार सुरक्षा और भविष्य की श्रम नीति पर भी समझौते की जरूरत होगी।
निकट भविष्य में सबसे अहम घटनाक्रम नई हड़तालों और वार्ता के बीच संबंध होगा। अगर मैनेजमेंट बेहतर प्रस्ताव देता है तो यूनियन हड़ताल कार्यक्रम में बदलाव कर सकती है। अगर प्रस्ताव में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आता तो उत्पादन व्यवधान जारी रहने का खतरा है।
21 अगस्त की प्रस्तावित पूर्ण हड़ताल इस विवाद का महत्वपूर्ण मोड़ बन सकती है। यदि यह कार्यक्रम लागू होता है तो घरेलू उत्पादन पर एक दिन का सीधा असर पड़ेगा और बातचीत पर दबाव बढ़ेगा। इसके बाद भी अंतिम परिणाम को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। लेबर विवादों में अंतिम समझौता अक्सर वेतन, बोनस और रोजगार संबंधी मुद्दों को एक पैकेज में जोड़कर होता है।
हुंडई मोटर का मौजूदा लेबर विवाद अब सामान्य वेतन वार्ता से आगे निकल चुका है। यूनियन 149,600 वॉन मासिक बेस पे बढ़ोतरी और कंपनी के पिछले साल के नेट प्रॉफिट के 30 प्रतिशत के बराबर परफॉर्मेंस बोनस मांग रही है, जबकि मैनेजमेंट ने इससे अलग आर्थिक पैकेज पेश किया है। हड़तालों का आर्थिक असर पहले ही उत्पादन और बिक्री पर दिखाई दे रहा है। 42,510 वाहनों के अनुमानित उत्पादन व्यवधान और कम से कम 1.8 ट्रिलियन वॉन के संभावित बिक्री नुकसान ने इस विवाद की गंभीरता बढ़ा दी है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि दोनों पक्ष आर्थिक मांगों के साथ रिटायरमेंट उम्र और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली जैसे विवादित मुद्दों पर किस तरह समझौता करते हैं। हुंडई मोटर के लिए स्थिर उत्पादन जरूरी है, जबकि यूनियन अपने सदस्यों के वेतन और रोजगार सुरक्षा को लेकर दबाव बनाए रखना चाहती है। आने वाले हफ्ते इस लेबर विवाद की दिशा तय करने में अहम होंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।