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उत्तर कोरिया के लाइव-फायर अभ्यास में ‘भारी तबाही की ताकत’ का दावा, मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल

Harish Qureshi 2026-09-14 13:47:17
उत्तर कोरिया के लाइव-फायर अभ्यास में ‘भारी तबाही की ताकत’ का दावा, मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल

उत्तर कोरिया ने मिसाइलों, तोपखाने और ड्रोन को शामिल करते हुए संयुक्त लाइव-फायर अभ्यास किया। प्योंगयांग ने इसे एकीकृत फायरपावर और भारी विनाशकारी क्षमता का प्रदर्शन बताया।


वॉनसान | 14 सितंबर 2026

By Mohd Haris


उत्तर कोरिया ने दिखाई सैन्य ताकत


उत्तर कोरिया ने बड़े पैमाने पर संयुक्त लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस अभ्यास में मिसाइल, तोपखाने और ड्रोन समेत कई हथियार प्रणालियों को एक साथ इस्तेमाल किया गया। प्योंगयांग ने इसे अपनी एकीकृत फायरपावर नियंत्रण व्यवस्था की कार्यक्षमता और सैनिकों की युद्ध तैयारी परखने वाला अभ्यास बताया।


उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने अभ्यास के बाद दावा किया कि इसमें ‘कंसंट्रेशन फायर’ यानी केंद्रित गोलीबारी की भारी विनाशकारी शक्ति का प्रदर्शन हुआ। हालांकि, उत्तर कोरिया के सैन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है।


किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ


उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के अनुसार, अभ्यास में पांच सैन्य इकाइयों से चुने गए बल शामिल हुए। इनमें विभिन्न प्रकार के हमलावर ड्रोन, सामरिक क्रूज़ मिसाइल, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल और बड़े कैलिबर वाले रॉकेट लॉन्चर शामिल थे।


प्योंगयांग का कहना है कि अलग-अलग हथियार प्रणालियों को एकीकृत फायरपावर नियंत्रण व्यवस्था के तहत संचालित करने का अभ्यास किया गया। इसका मकसद युद्ध जैसी परिस्थितियों में विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल और प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर करना बताया गया है।


दक्षिण कोरिया ने क्या कहा


दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि 12 सितंबर की सुबह उत्तर कोरिया के वॉनसान इलाके से कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। दक्षिण कोरियाई सैन्य आकलन के मुताबिक मिसाइलों ने करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय की और समुद्र में गिरीं।


दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने इन प्रक्षेपणों की सटीक तकनीकी विशेषताओं का विश्लेषण अमेरिका के साथ मिलकर किए जाने की बात कही है। इससे यह स्पष्ट है कि उत्तर कोरिया के अपने दावों और बाहरी सैन्य आकलनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।


अभ्यास का समय क्यों अहम है


यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय हुआ जब दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने अपना त्रिपक्षीय ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास समाप्त किया था। तीनों देशों का संयुक्त अभ्यास 11 सितंबर को पूरा हुआ और उसके अगले दिन उत्तर कोरिया ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।


इस समय-क्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। प्योंगयांग लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ उकसावे की कार्रवाई बताता रहा है।


प्योंगयांग का संदेश क्या है


उत्तर कोरिया के शीर्ष सैन्य अधिकारी पाक जोंग चोन ने अभ्यास को अपनी फायरपावर क्षमता के प्रदर्शन के तौर पर पेश किया। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि इस तरह की क्षमता दुश्मन की सैन्य संरचना और युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।


यह बयान केवल सैन्य अभ्यास का विवरण नहीं है। इसमें उत्तर कोरिया की पारंपरिक सैन्य शक्ति के साथ मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को एकीकृत करने की कोशिश का संकेत भी दिखाई देता है।


एकीकृत फायरपावर पर जोर


इस अभ्यास का एक अहम पहलू केवल मिसाइलों की संख्या नहीं बल्कि अलग-अलग हथियार प्रणालियों का समन्वित इस्तेमाल है। उत्तर कोरिया ने इसे एकीकृत फायरपावर नियंत्रण प्रणाली की प्रक्रिया से परिचित होने के लिए किया गया अभ्यास बताया है।


अगर प्योंगयांग वास्तव में ड्रोन, रॉकेट, क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों को एक साझा कमांड व्यवस्था के तहत संचालित करने की क्षमता विकसित कर रहा है, तो यह उसके सैन्य ऑपरेशनल मॉडल में बदलाव का संकेत हो सकता है। लेकिन इस क्षमता की वास्तविक प्रभावशीलता का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध नहीं है।


किम जोंग उन अभ्यास में मौजूद नहीं थे


उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन इस विशेष अभ्यास में मौजूद नहीं थे। सरकारी मीडिया ने सैन्य अधिकारी पाक जोंग चोन की निगरानी में अभ्यास किए जाने की जानकारी दी।


यह पहलू इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि किम जोंग उन अक्सर उत्तर कोरिया के महत्वपूर्ण मिसाइल और फायरपावर परीक्षणों में व्यक्तिगत तौर पर नजर आते हैं। इस बार अभ्यास की सार्वजनिक प्रस्तुति सैन्य कमान और संचालन क्षमता पर अधिक केंद्रित दिखाई देती है।


मिसाइल प्रक्षेपण और सैन्य दबाव


दक्षिण कोरियाई सैन्य अधिकारियों के अनुसार 12 सितंबर के प्रक्षेपणों में कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं। कुछ स्रोतों ने इन्हें ह्वासोंग-11 श्रृंखला से जुड़ा होने का आकलन किया है। इसके साथ 600 मिलीमीटर के मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर भी शामिल होने की बात कही गई है।


इन हथियारों की मारक क्षमता और वास्तविक तैनाती को लेकर अलग-अलग तकनीकी आकलन मौजूद हैं। इसलिए किसी एक हथियार प्रणाली की क्षमता को उत्तर कोरिया के पूरे सैन्य संतुलन का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।


अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के लिए संकेत


उत्तर कोरिया की हालिया गतिविधियां तीनों देशों के लिए निगरानी और मिसाइल रक्षा चुनौती को बढ़ाती हैं। दक्षिण कोरिया और अमेरिका पहले से ही उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियों पर साझा निगरानी व्यवस्था बनाए हुए हैं। जापान को भी क्षेत्रीय मिसाइल प्रक्षेपणों की स्थिति में सुरक्षा और चेतावनी व्यवस्था को सक्रिय रखना पड़ता है।


इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर कोरिया पारंपरिक तोपखाने, रॉकेट, ड्रोन और मिसाइलों को एक ही अभ्यास में शामिल करके अपने सैन्य समन्वय का प्रदर्शन कर रहा है।


क्या यह नई सैन्य escalation है


इस अभ्यास को तुरंत किसी बड़े सैन्य टकराव की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। अभी उपलब्ध जानकारी मुख्य तौर पर एक सैन्य अभ्यास और उससे जुड़े मिसाइल प्रक्षेपणों की पुष्टि करती है।


हालांकि, लगातार मिसाइल गतिविधियां और अमेरिका, दक्षिण कोरिया तथा जापान के संयुक्त अभ्यासों के बीच बढ़ता सैन्य संदेश क्षेत्रीय तनाव को बनाए रखता है। इसीलिए आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया की अगली गतिविधियों पर नजर महत्वपूर्ण होगी।


क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स पर असर


कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य संतुलन पहले से ही संवेदनशील है। उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा रणनीति का प्रमुख हिस्सा मानता है, जबकि दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगी इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं।


हालिया घटनाक्रम में एक तरफ संयुक्त सैन्य अभ्यास हैं और दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण। यह चक्र दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी और रणनीतिक दबाव को और बढ़ा सकता है।


आगे क्या देखना होगा


अब सबसे अहम सवाल यह है कि उत्तर कोरिया अपनी अगली सैन्य गतिविधि किस स्तर पर ले जाता है। क्या वह इसी तरह के संयुक्त फायरपावर अभ्यास जारी रखेगा या नए मिसाइल परीक्षण करेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


दक्षिण कोरिया और अमेरिका भी उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर निगरानी जारी रखेंगे। किसी नए प्रक्षेपण, हथियार परीक्षण या बड़े सैन्य अभ्यास की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण फिर प्रभावित हो सकता है।


निष्कर्ष


उत्तर कोरिया ने अपने हालिया लाइव-फायर अभ्यास को ‘भारी विनाशकारी शक्ति’ के प्रदर्शन के तौर पर पेश किया है। मिसाइल, तोपखाने और ड्रोन को एक साथ शामिल किए जाने से प्योंगयांग ने अपनी एकीकृत फायरपावर क्षमता का संदेश देने की कोशिश की है।


लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को समझते समय उत्तर कोरियाई दावों और स्वतंत्र सैन्य आकलनों के बीच फर्क रखना जरूरी है। दक्षिण कोरिया ने मिसाइल प्रक्षेपणों की पुष्टि की है और करीब 250 किलोमीटर की उड़ान दूरी बताई है, जबकि अभ्यास की घोषित विनाशकारी क्षमता से जुड़े उत्तर कोरियाई दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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