विजय माल्या ने ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने ब्रिटेन में कानूनी पाबंदी और ईडी द्वारा बैंकों को लौटाई गई ₹14,131.60 करोड़ की संपत्ति का हवाला दिया।
लंदन | 10 सितंबर 2026
By Mohd Haris
विजय माल्या एक बार फिर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और ‘भगोड़ा’ कहे जाने को लेकर चर्चा में हैं। लंदन में रह रहे माल्या ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनके साथ लगातार अन्याय हो रहा है। इसी क्रम में उन्होंने तंज करते हुए सवाल किया कि क्या उन्हें कॉकरोच बन जाना चाहिए, क्योंकि शायद वहां जिंदगी बेहतर हो।
माल्या ने अपने बयान में प्रवर्तन निदेशालय के एक अदालत में दाखिल हलफनामे का हवाला दिया। उनका दावा है कि बैंकों को उनकी संपत्तियों से ₹14,131.60 करोड़ की रिकवरी मिल चुकी है। ईडी की वर्ष 2025-26 की आधिकारिक वार्षिक रिपोर्ट भी बताती है कि माल्या से जुड़े मामलों में ₹14,131.60 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गईं और एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम को इतनी ही राशि की संपत्तियां बहाल की गईं।
‘कॉकरोच’ वाले बयान में क्या कहा
माल्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने खिलाफ कथित अन्याय का जिक्र करते हुए ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी की। उनका बयान उनकी व्यक्तिगत स्थिति और लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को लेकर नाराजगी के तौर पर सामने आया है।
माल्या ने इसके साथ यह सवाल भी उठाया कि जब बैंकों को बड़ी रकम की रिकवरी हो चुकी है तो उन्हें अब भी धोखाधड़ी करने वाला या ‘भगोड़ा’ क्यों कहा जाता है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ₹14,131.60 करोड़ की संपत्ति की रिकवरी और माल्या के खिलाफ चल रही आपराधिक तथा कानूनी कार्यवाही अलग-अलग मुद्दे हैं। रिकवरी होने से अदालतों में लंबित कानूनी प्रक्रिया अपने आप समाप्त नहीं होती।
₹14,131.60 करोड़ की रिकवरी का मामला
विजय माल्या ने ईडी के कथित हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि 2021 में बैंकों को ₹14,131.60 करोड़ की संपत्ति वापस की गई थी।
ईडी की वर्ष 2025-26 की आधिकारिक वार्षिक रिपोर्ट में भी किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े मामले का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक माल्या को 5 जनवरी 2019 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था और ₹14,131.60 करोड़ की संपत्तियां भारत सरकार के पक्ष में जब्त की गई थीं। इसके बाद एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम के आवेदन पर लगभग ₹14,131.60 करोड़ की संपत्तियां एसबीआई को बहाल की गईं।
इसलिए माल्या की ओर से रिकवरी का जो मुद्दा उठाया गया है, उसमें ईडी के आधिकारिक रिकॉर्ड का एक महत्वपूर्ण आधार मौजूद है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ सभी कानूनी आरोप खत्म हो चुके हैं।
‘भगोड़ा’ कहे जाने पर माल्या की दलील
माल्या ने अपने हालिया पोस्ट में कहा कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और फिलहाल ब्रिटेन छोड़ने पर कानूनी रोक का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि भारत नहीं लौट पाने की मौजूदा स्थिति को केवल ‘भगोड़ा’ कहकर पेश करना सही नहीं है।
उन्होंने स्थायी निवास और नागरिकता के बीच अंतर का भी हवाला दिया। माल्या के मुताबिक, उनकी भारत वापसी और बैंक कर्ज की रिकवरी को एक ही मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यह माल्या का पक्ष है। इसे अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
बॉम्बे हाईकोर्ट में क्या हुआ
माल्या की भारत वापसी और भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून से जुड़ी कार्यवाही बॉम्बे हाईकोर्ट में भी चल रही है।
फरवरी 2026 में माल्या ने अदालत के सामने कहा था कि वह भारत लौटने की कोई निश्चित तारीख नहीं बता सकते। उन्होंने ब्रिटेन की अदालतों से जुड़े यात्रा प्रतिबंधों का हवाला दिया था।
दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह रुख रखा कि भारत की अदालतों से कानूनी राहत मांगने वाले व्यक्ति को भारतीय न्यायिक प्रक्रिया से बचने की स्थिति में समान आधार पर राहत मांगने में कठिनाई होगी। अदालत ने माल्या को भारत लौटने की स्थिति स्पष्ट करने का अवसर भी दिया था।
माल्या पर मामला क्या है
विजय माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े बैंक कर्ज और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले लंबे समय से जांच और न्यायिक प्रक्रिया में हैं।
ईडी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े प्रमुख बैंक धोखाधड़ी मामले में ₹6,777.36 करोड़ का उल्लेख है। एजेंसी के अनुसार किंगफिशर एयरलाइंस को कमजोर वित्तीय स्थिति और खराब क्रेडिट स्थिति के बावजूद कंसोर्टियम लोन दिए गए थे।
ईडी ने माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस और अन्य से जुड़ी ₹5,042.66 करोड़ की संपत्तियां अटैच की थीं। रिपोर्ट में अतिरिक्त ₹1,694.52 करोड़ की संपत्तियों का भी उल्लेख है, जिन्हें अदालत की संपत्ति के रूप में माना गया।
किंगफिशर कर्मचारियों को भी राहत
माल्या ने अपने हालिया पोस्ट में यह भी दावा किया कि ईडी ने उनकी अटैच संपत्तियों से ₹350 करोड़ से ज्यादा की राशि किंगफिशर कर्मचारियों को भुगतान के लिए जारी की।
ईडी की आधिकारिक वार्षिक रिपोर्ट इससे जुड़ा एक अलग और अधिक विशिष्ट आंकड़ा देती है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों की लंबित देनदारी के लिए ₹311.67 करोड़ जारी कराने में ईडी ने मदद की। यह कार्रवाई एसबीआई और ऋण वसूली अधिकरण के निर्देशों के साथ समन्वय में हुई।
इसलिए माल्या के सोशल मीडिया दावे और ईडी के आधिकारिक वार्षिक आंकड़े को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
कानूनी स्थिति अभी खत्म नहीं हुई
माल्या को 2019 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। अक्टूबर 2025 में लोकसभा में सरकार की ओर से बताया गया था कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत कुल 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है।
माल्या इस कानूनी स्थिति और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत चल रही कार्यवाही को चुनौती दे रहे हैं।
उनकी मौजूदा दलील यह है कि भारत नहीं लौट पाने की वजह कानूनी प्रतिबंध हैं। वहीं भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में उनकी स्थिति से जुड़े मामले अभी समाप्त नहीं हुए हैं।
विवाद का असल केंद्र क्या है
माल्या के हालिया बयान ने दो अलग-अलग सवालों को फिर सामने ला दिया है।
पहला सवाल बैंक कर्ज की वसूली का है। ईडी के रिकॉर्ड के अनुसार बड़ी मात्रा में संपत्तियां जब्त और बैंकों को बहाल की गई हैं। दूसरा सवाल माल्या की कानूनी जवाबदेही और भारत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया का है।
इन दोनों मुद्दों को एक ही निष्कर्ष में बदलना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
बैंकों को संपत्ति की रिकवरी मिलना वित्तीय नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं किसी व्यक्ति की आपराधिक या कानूनी स्थिति अदालतों में चल रही प्रक्रिया से तय होती है।
अब आगे क्या
माल्या के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी भारत वापसी और लंबित कानूनी कार्यवाही का है। फिलहाल उन्होंने ब्रिटेन में मौजूद कानूनी प्रतिबंधों का हवाला दिया है।
भारतीय एजेंसियों और अदालतों की कार्रवाई अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। माल्या की ओर से उठाए गए रिकवरी और ‘भगोड़ा’ टैग से जुड़े सवालों का अंतिम निर्धारण अदालतों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होगा।
पाठकों के लिए अहम बात यह है कि माल्या की ओर से लगाए गए ‘अन्याय’ के आरोप उनके अपने दावे हैं। वहीं ₹14,131.60 करोड़ की संपत्ति की जब्ती और बैंक कंसोर्टियम को बहाली का तथ्य ईडी की आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज है। दोनों पहलुओं को अलग रखकर देखना ही इस पूरे विवाद को समझने का सबसे सटीक तरीका है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।