SYNOPSIS
अमेरिकी अदालत ने गौतम अडानी और अन्य आरोपियों से जुड़े आपराधिक मामले को अभियोजन की मांग पर खत्म करने की मंजूरी दी। डीओजे ने केस को विदेशी प्रकृति और कठिन अभियोजन वाला बताया। जज ने प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई, लेकिन डिसमिसल को आरोपों की मेरिट पर फैसला नहीं माना।
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नई दिल्ली / न्यूयॉर्क | 11 अगस्त 2026 | अपूर्वा चौधरी
गौतम अडानी को अमेरिकी कोर्ट से बड़ी राहत
भारतीय कारोबारी गौतम अडानी को अमेरिका में चल रहे आपराधिक मामले में अहम कानूनी राहत मिली है। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत ने अमेरिकी अभियोजन पक्ष की मांग के बाद अडानी से जुड़े क्रिमिनल केस को खत्म करने की मंजूरी दे दी। अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गाराउफिस ने हालांकि केस समाप्त करने की प्रक्रिया को लेकर न्याय विभाग की कार्यशैली पर गंभीर चिंता भी दर्ज की।
यह वही मामला है जिसमें नवंबर 2024 में गौतम अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी, सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अडानी और अडानी ग्रुप ने आरोपों से इनकार किया था। मौजूदा फैसला आपराधिक अभियोजन को समाप्त करता है, लेकिन इसे आरोपों की मेरिट पर ट्रायल के बाद मिली क्लीन चिट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मामला अचानक खत्म कैसे हुआ
इस मामले में बड़ा बदलाव मई 2026 में आया, जब अमेरिकी न्याय विभाग यानी डीओजे ने अदालत से अभियोग को खत्म करने की अनुमति मांगी। सरकार ने कहा था कि वह इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करना चाहती। मामला अदालत की अनुमति के बिना स्वतः समाप्त नहीं हो सकता था, इसलिए अंतिम फैसला न्यायाधीश के सामने आया।
शुरुआत में जज गाराउफिस ने सरकार की दलील को पर्याप्त नहीं माना। 26 जून के आदेश में उन्होंने डीओजे से केस खत्म करने के हर आधार के साथ पर्याप्त तथ्यात्मक समर्थन देने को कहा था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन वापस लेने की अर्जी पर फैसला करते समय उसे सरकार के बताए कारणों को समझना जरूरी है।
डीओजे ने केस छोड़ने के क्या कारण बताए
जुलाई में डीओजे ने अदालत को अधिक विस्तृत स्पष्टीकरण दिया। विभाग ने तर्क दिया कि मामला मुख्य रूप से विदेशी घटनाक्रम से जुड़ा है, इसे सफलतापूर्वक साबित करना मुश्किल हो सकता है और यह मौजूदा अभियोजन प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है।
अभियोजन पक्ष का यह रुख मूल आरोपों पर अदालत का फैसला नहीं था। यह अमेरिकी सरकार की ओर से आगे आपराधिक कार्रवाई न करने का निर्णय था, जिसे संघीय अदालत की अनुमति की जरूरत थी।
जज ने डीओजे की प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठाए
अदालत के अंतिम फैसले में सिर्फ केस का अंत ही महत्वपूर्ण नहीं है। न्यायाधीश गाराउफिस ने डीओजे के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैकॉट्टर की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
रॉयटर्स के मुताबिक, जज ने कहा कि केस खत्म करने के फैसले में उन अभियोजकों और जांच अधिकारियों की पेशेवर राय को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया, जिन्होंने मामले पर काम किया था। अदालत ने निर्णय प्रक्रिया में मौजूद अनियमितताओं को चिंता का विषय बताया।
डीओजे की ओर से मैकॉट्टर ने अदालत में कहा था कि उन्होंने बचाव पक्ष के वकीलों और विभाग के अन्य वकीलों से बातचीत तथा अपने अध्ययन और विश्लेषण के बाद केस खत्म करने का निर्णय लिया। इस तरह अदालत और सरकार के बीच प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग नज़रिया सामने आया।
10 अरब डॉलर के निवेश का मुद्दा भी जांच के दायरे में आया
मामले की सुनवाई के दौरान गौतम अडानी की अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश की पूर्व प्रतिबद्धता भी चर्चा में आई। सवाल यह था कि क्या इस निवेश प्रस्ताव का आपराधिक मामले को खत्म करने के फैसले से कोई संबंध था।
अडानी ने अदालत में दिए गए शपथपत्र में अमेरिका में निवेश की अपनी पूर्व प्रतिबद्धता स्वीकार की थी। उनके वकीलों ने डीओजे के साथ बातचीत में यह भी संकेत दिया था कि समूह इस निवेश को किसी समाधान का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हो सकता है।
हालांकि, जज गाराउफिस ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर माना कि यह निवेश प्रतिबद्धता डीओजे के केस खत्म करने के निर्णय का कारण नहीं बनी। इसके बावजूद उन्होंने इस तरह के प्रस्तावों से न्याय की समानता और कानून के शासन को लेकर पैदा होने वाले सार्वजनिक सवालों का उल्लेख किया।
अडानी पर मूल आरोप क्या थे
नवंबर 2024 में अमेरिकी अभियोजन ने आरोप लगाया था कि गौतम अडानी और अन्य लोगों ने भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत देने की योजना बनाई, ताकि अडानी ग्रुप से जुड़ी एक कंपनी को सौर ऊर्जा परियोजना हासिल करने में मदद मिल सके।
अमेरिकी अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया था कि इस कथित योजना से जुड़ी जानकारी के बीच अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की एंटी-करप्शन और एंटी-ब्राइबरी व्यवस्था के बारे में भरोसा दिलाया गया। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को गलत बताते हुए लगातार उनका खंडन किया।
यहां यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि ये आरोप अभियोजन पक्ष के थे। चूंकि आपराधिक मामला ट्रायल के अंतिम चरण तक नहीं पहुंचा, इसलिए इन आरोपों की सत्यता या असत्यता पर ज्यूरी या अदालत का मेरिट-आधारित अंतिम फैसला नहीं आया।
क्या अडानी को अमेरिकी कोर्ट ने बरी कर दिया?
यहां शब्दों का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने क्रिमिनल केस को डिसमिस किया है, लेकिन इसे पारंपरिक अर्थ में “बरी” होना नहीं कहा जा सकता।
जज ने अपने फैसले में साफ किया कि मामले को खत्म करने का आदेश डीओजे के फैसले से उनकी सहमति या मूल आरोपों की मेरिट पर उनकी राय नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए खबर में “कानूनी राहत” या “क्रिमिनल केस डिसमिस” कहना अधिक सटीक है।
क्या अडानी के सभी अमेरिकी कानूनी मामले खत्म हो गए?
नहीं। यह मौजूदा घटनाक्रम को समझने का सबसे अहम हिस्सा है।
गौतम अडानी से जुड़ा क्रिमिनल केस अलग था, जबकि अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी एसईसी की सिविल कार्रवाई अलग कानूनी प्रक्रिया है। मई 2026 में एसईसी ने गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ प्रस्तावित अंतिम फैसलों की जानकारी दी थी।
एसईसी के मुताबिक, यह सिविल मामला 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी की 750 मिलियन डॉलर की बॉन्ड पेशकश से जुड़े कथित गलत और भ्रामक बयानों से संबंधित था। नियामक ने कहा कि अडानी और सागर अडानी ने आरोपों को स्वीकार या खारिज किए बिना क्रमशः 60 लाख डॉलर और 1.2 करोड़ डॉलर के सिविल दंड पर सहमति दी थी।
इसलिए अमेरिकी क्रिमिनल केस के खत्म होने को अडानी से जुड़े हर अमेरिकी नियामकीय मामले का अंत बताना सही नहीं होगा।
अलग मामलों को एक साथ देखना क्यों गलत होगा
अडानी समूह से जुड़े अमेरिकी मामलों में अलग-अलग एजेंसियां और अलग कानूनी आधार शामिल हैं। क्रिमिनल अभियोजन में डीओजे की भूमिका थी, जबकि एसईसी की कार्रवाई सिक्योरिटीज कानून से जुड़े सिविल दावों पर आधारित है।
इसी तरह अडानी एंटरप्राइजेज से जुड़ा अमेरिकी प्रतिबंधों का मामला भी अलग है। रॉयटर्स के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान से संबंधित कथित प्रतिबंध उल्लंघन के मामले को 275 मिलियन डॉलर के भुगतान के जरिए सुलझाया था। यह गौतम अडानी के मौजूदा क्रिमिनल केस से अलग प्रक्रिया है।
अडानी के लिए फैसले का कारोबारी महत्व
क्रिमिनल अभियोजन समाप्त होने से अडानी समूह पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी जोखिम का दबाव कम हुआ है। नवंबर 2024 से यह मामला समूह की वैश्विक कारोबारी साख और निवेशकों की नजर में महत्वपूर्ण मुद्दा रहा था।
अब इस खास आपराधिक मामले की मुकदमेबाजी आगे नहीं बढ़ेगी। इससे अडानी पक्ष को कानूनी अनिश्चितता में कमी मिल सकती है, लेकिन कारोबारी असर का अंतिम आकलन केवल अदालत के फैसले से नहीं किया जा सकता। बाजार की प्रतिक्रिया कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, नियामकीय स्थिति और निवेशकों की धारणा जैसे दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी।
क्या यह फैसला अमेरिकी न्याय व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है?
मामले का असर केवल अडानी ग्रुप तक सीमित नहीं है। अदालत की टिप्पणियों ने इस सवाल को भी सामने रखा है कि संघीय अभियोजन किसी हाई-प्रोफाइल केस को वापस लेने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत करता है और उस प्रक्रिया में जांचकर्ताओं तथा केस पर काम कर चुके अभियोजकों की राय का कितना महत्व होना चाहिए।
जज ने अंततः केस खत्म करने की अनुमति दी, लेकिन डीओजे की निर्णय प्रक्रिया पर उनकी टिप्पणियां इस मामले को सामान्य अभियोजन वापसी से अलग बनाती हैं। यह अमेरिकी न्याय व्यवस्था में अभियोजन विवेक, अदालत की निगरानी और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर बहस का विषय बन सकता है।
आगे क्या होगा
इस विशेष क्रिमिनल केस के संदर्भ में अडानी पक्ष को तत्काल राहत मिल चुकी है। हालांकि, अडानी से जुड़े अलग सिविल और नियामकीय मामलों की स्थिति स्वतंत्र रूप से बनी रहेगी।
आगे की तस्वीर इन अलग मामलों में अदालतों और नियामकीय संस्थाओं के फैसलों से साफ होगी। इसलिए मौजूदा निर्णय को व्यापक “कानूनी क्लीन चिट” के बजाय एक विशिष्ट आपराधिक मुकदमे के अंत के रूप में देखना अधिक तथ्यात्मक होगा।
पाठकों के पांच अहम सवाल
अमेरिकी कोर्ट ने गौतम अडानी के मामले में क्या फैसला दिया?
अमेरिकी संघीय अदालत ने अभियोजन पक्ष की मांग के बाद गौतम अडानी से जुड़े आपराधिक मामले को खत्म करने की मंजूरी दी।
डीओजे ने केस क्यों खत्म करना चाहा?
डीओजे ने मामले की विदेशी प्रकृति, इसे साबित करने में संभावित कठिनाई और विभाग की मौजूदा अभियोजन प्राथमिकताओं का हवाला दिया।
जज ने डीओजे पर सवाल क्यों उठाए?
जज गाराउफिस ने केस खत्म करने की प्रक्रिया में जांचकर्ताओं और अभियोजन टीम की राय को पर्याप्त रूप से शामिल किए जाने को लेकर चिंता जताई।
क्या अडानी को आरोपों से क्लीन चिट मिल गई?
नहीं। अदालत ने क्रिमिनल केस डिसमिस किया है, लेकिन मूल आरोपों की मेरिट पर ट्रायल के बाद कोई अंतिम फैसला नहीं दिया।
क्या अडानी के सभी अमेरिकी मामले खत्म हो गए?
नहीं। एसईसी से जुड़ी सिविल कार्रवाई और दूसरे नियामकीय मामले अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आते हैं।
निष्कर्ष
गौतम अडानी के लिए अमेरिकी अदालत का ताजा फैसला निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत है। अभियोजन पक्ष की मांग के बाद संघीय अदालत ने इस क्रिमिनल केस को समाप्त करने की अनुमति दी, जिससे लगभग दो साल से चले आ रहे इस आपराधिक मुकदमे का अध्याय बंद हो गया।
लेकिन इस फैसले की पूरी तस्वीर दो हिस्सों में है। एक तरफ अडानी को इस विशेष क्रिमिनल केस में राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ जज निकोलस गाराउफिस ने डीओजे की निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि डिसमिसल को मूल आरोपों की मेरिट पर अपनी राय नहीं माना जाना चाहिए।
इसलिए Gautam Adani US Case का सबसे सटीक संपादकीय निष्कर्ष यही है कि अडानी को अमेरिकी आपराधिक मामले में कानूनी राहत मिली है, लेकिन इसे सभी आरोपों पर न्यायिक क्लीन चिट या अडानी से जुड़े हर अमेरिकी मामले के अंत के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।