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भारत का Forex Reserve रिकॉर्ड ऊंचाई पर, ₹95.55 के कमजोर रुपये के बीच RBI का बड़ा कदम

Apurva Choudhary 2026-09-11 19:10:08
भारत का Forex Reserve रिकॉर्ड ऊंचाई पर, ₹95.55 के कमजोर रुपये के बीच RBI का बड़ा कदम
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर पहुंच गया। यह लगातार दसवीं साप्ताहिक बढ़ोतरी है। विदेशी पूंजी प्रवाह ने रिजर्व को मजबूती दी, लेकिन महंगे तेल से रुपया दबाव में है। RBI ने अतिरिक्त लिक्विडिटी नियंत्रित करने के लिए बॉन्ड बिक्री का ऐलान किया।

LOCATION | DATE | BYLINE
📍 Mumbai/New Delhi | 📰 11 September 2026 | ✍️ Apurva Choudhary 

भारत के Forex Reserve ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में करीब 44.9 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके साथ ही Forex Reserve में लगातार दसवें सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
यह बढ़त ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले दबाव झेल रहा है। यानी एक तरफ देश की external financial position मजबूत होती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ currency market और banking liquidity के मोर्चे पर RBI के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
पिछले दस सप्ताह में भारत के Forex Reserve में करीब 120 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। ताज़ा उछाल मुख्य रूप से Foreign Currency Assets में तेज बढ़ोतरी से आया, जबकि Gold Holdings के मूल्य में कमी ने कुछ हद तक इस बढ़त को सीमित किया।

विदेशी पूंजी प्रवाह बना बड़ी वजह
इस रिकॉर्ड वृद्धि के पीछे सबसे अहम कारण विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह माना जा रहा है। जून में सरकार और RBI की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने तथा overseas borrowings और deposits को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए थे।
इन व्यवस्थाओं के तहत 5 जून से 31 अगस्त के बीच करीब 136.3 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई। इसमें Non-Resident Indian यानी NRI deposits का हिस्सा लगभग 127 अरब डॉलर रहा। यह आंकड़ा अनुमान से काफी ज्यादा रहा और इसी वजह से Forex Reserve में तेज उछाल देखने को मिला।
ताज़ा सप्ताह में Foreign Currency Assets करीब 47.4 अरब डॉलर बढ़े। दूसरी ओर Gold Holdings के मूल्य में करीब 2.6 अरब डॉलर की कमी आई। इसके बावजूद कुल रिजर्व नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया।
यह तस्वीर बताती है कि भारत के external sector में फिलहाल विदेशी मुद्रा की उपलब्धता मजबूत है। हालांकि इस तरह के inflows को केवल स्थायी capital strength के रूप में देखना भी उचित नहीं होगा, क्योंकि कुछ प्रवाह आगे चलकर RBI और बैंकिंग सिस्टम के लिए देनदारी या liquidity management की जरूरत बढ़ा सकते हैं।

रिकॉर्ड रिजर्व के बीच रुपया क्यों कमजोर?
Forex Reserve में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। शुक्रवार, 11 सितंबर को रुपया करीब ₹95.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ और पूरे सप्ताह में लगभग 1.1 प्रतिशत कमजोर हुआ।
इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण महंगा crude oil और वैश्विक bond yields में बढ़ोतरी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे बड़े oil importer के लिए डॉलर की मांग और import bill पर दबाव बढ़ता है।
यही वजह है कि Forex Reserve का रिकॉर्ड स्तर रुपये को हर परिस्थिति में मजबूत बनाए, ऐसा जरूरी नहीं है। रिजर्व देश को बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता देता है, लेकिन currency की तत्काल दिशा पर crude prices, global interest rates, dollar demand और capital flows जैसे कई factors असर डालते हैं।

RBI ने रुपये को संभालने के लिए किया हस्तक्षेप
रुपये में तेज गिरावट को सीमित करने के लिए RBI की ओर से forex market में intervention की संभावना और गतिविधियां सामने आई हैं। बाजार में dollar-rupee sell-buy swaps का इस्तेमाल भी किया गया है।
इन swaps का एक मकसद केवल रुपये को सपोर्ट करना नहीं, बल्कि banking system में मौजूद अतिरिक्त rupee liquidity को absorb करना भी है। RBI के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेशी मुद्रा के बड़े inflow के बदले घरेलू वित्तीय प्रणाली में liquidity बढ़ सकती है।
11 सितंबर को RBI Governor Sanjay Malhotra ने संकेत दिया कि liquidity management के लिए central bank के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें Open Market Operations और FX Swaps जैसे उपाय शामिल हैं और किसी भी tool को विकल्पों की सूची से बाहर नहीं माना जा रहा है।

Banking System में बढ़ी अतिरिक्त Liquidity
इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू banking system की liquidity है। विदेशी मुद्रा जुटाने की विशेष व्यवस्था के तहत बड़े inflows आने के बाद बैंकों के पास अतिरिक्त cash liquidity बढ़ी है।
इस excess liquidity का असर overnight money market rates पर भी पड़ा है। ऐसे माहौल में RBI के लिए यह जरूरी हो जाता है कि banking system में पैसा इतना अधिक न हो कि short-term interest rates policy corridor के निचले स्तर से नीचे जाने लगें।
यही कारण है कि Forex Reserve की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ liquidity management भी इस समय RBI की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।

RBI का ₹1 लाख करोड़ का बड़ा कदम
इसी बीच RBI ने 11 सितंबर को liquidity absorb करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। केंद्रीय बैंक ने करीब ₹1 लाख करोड़ यानी 1 ट्रिलियन रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने की योजना घोषित की है।
यह बिक्री 16 सितंबर से शुरू होने वाली है और इसे तीन हिस्सों में किया जाएगा। पहले चरण में 17 सितंबर को ₹50,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचे जाएंगे, जबकि 21 सितंबर और 28 सितंबर को ₹25,000 करोड़-₹25,000 करोड़ की बिक्री प्रस्तावित है।
इसका सीधा मकसद banking system में मौजूद excess liquidity को सोखना है। बाजार के नजरिये से यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI आम तौर पर liquidity management के लिए कई instruments का इस्तेमाल करता है और इस बार बड़े पैमाने पर bond sales का फैसला सामने आया है।

क्या रिकॉर्ड Forex Reserve रुपये के लिए सुरक्षा कवच है?
भारत के लिए करीब 786 अरब डॉलर का Forex Reserve निश्चित तौर पर एक मजबूत external buffer है। इससे देश को oil imports, external payments और global financial volatility जैसे हालात में बेहतर resilience मिलती है।
लेकिन रिकॉर्ड रिजर्व का मतलब यह नहीं है कि रुपये पर दबाव खत्म हो गया। यदि crude oil लंबे समय तक महंगा रहता है, global yields ऊंची रहती हैं और dollar demand बढ़ती है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
RBI की चुनौती इसलिए दोहरी है। एक तरफ उसे currency market में अत्यधिक volatility को सीमित करना है, वहीं दूसरी तरफ banking system में बढ़ी liquidity को इस तरह manage करना है कि monetary policy transmission और short-term interest rates प्रभावित न हों।

आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?
आने वाले दिनों में बाजार की नजर crude oil prices, global bond yields, अमेरिकी inflation data और foreign capital flows पर रहेगी। इन factors में बदलाव से रुपये और भारतीय financial markets की दिशा प्रभावित हो सकती है।
इसके साथ RBI की liquidity operations भी महत्वपूर्ण रहेंगी। यदि विदेशी मुद्रा inflows जारी रहते हैं तो central bank को liquidity absorption के लिए FX swaps, bond sales और अन्य monetary tools का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर भारत का $785.7 अरब का Forex Reserve देश की बाहरी वित्तीय स्थिति की मजबूती का अहम संकेत है। लेकिन इसी समय रुपये का ₹95.55 के आसपास रहना यह भी दिखाता है कि मजबूत reserves और मजबूत currency एक ही चीज नहीं हैं।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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