बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेता राजेश खन्ना के प्रतिष्ठित बंगले 'आशीर्वाद' को भूतिया, शापित या अशुभ बताने वाली मीडिया रिपोर्टों और ऑनलाइन पोस्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने माना कि ऐसी सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है और याचिकाकर्ता के सम्मान के अधिकार का उल्लंघन कर सकती है।
📍 Location: मुंबई, महाराष्ट्र
📰 Date: 30 जुलाई 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 'आशीर्वाद' बंगले पर फैलाई जा रही अफवाहों पर लगाई रोक
बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के ऐतिहासिक बांद्रा स्थित बंगले 'आशीर्वाद' को लेकर प्रसारित की जा रही 'भूतिया', 'शापित' और 'अशुभ' जैसी खबरों पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि इस तरह की सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक है और संपत्ति के वर्तमान मालिक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है।
न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की एकल पीठ ने 24 जुलाई को पारित अंतरिम आदेश में बंगले के वर्तमान मालिक व्यवसायी शशि शेट्टी को राहत प्रदान की।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता शशि शेट्टी ने अदालत को बताया कि पुराने 'आशीर्वाद' बंगले को पहले ही ध्वस्त कर नया आवास बनाया जा चुका है, लेकिन कई वेबसाइट, यूट्यूब वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट अब भी इस संपत्ति को 'भूतिया' या 'शापित' बताकर गलत जानकारी फैला रहे हैं।
याचिका में कहा गया कि इससे उनकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
अदालत की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ऐसी सामग्री प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिवादी इस प्रकार के दावों को प्रमाणित करने में विफल रहे हैं।
इसी आधार पर अदालत ने संबंधित मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को विवादित सामग्री के प्रसार पर अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दिया।
'आशीर्वाद' नाम को लेकर भी उठा मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सराफ ने अदालत में कहा कि भले ही पुराना बंगला अब अस्तित्व में नहीं है, लेकिन नया भवन भी 'आशीर्वाद' नाम से ही जाना जाता है। इसलिए पुराने अंधविश्वासों को नए घर से जोड़ना अनुचित और मानहानिकारक है।
ऑनलाइन लेख भी बना विवाद की वजह
याचिका में विशेष रूप से एक ऑनलाइन लेख का उल्लेख किया गया, जिसमें 'आशीर्वाद' को भारत के कथित 'भूतिया घरों' की सूची में शामिल किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस प्रकार की सामग्री बिना किसी तथ्यात्मक आधार के प्रकाशित की गई।
21 अगस्त तक प्रभावी रहेगा आदेश
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश 21 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा। मामले की अगली सुनवाई इसी दिन निर्धारित की गई है। अंतिम निर्णय अदालत में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद लिया जाएगा।