बरसात में दाल को घुन से बचाना है तो अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके, नमी पर रखें खास नजर
बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं घर की रसोई में रखे अनाज और दालों के भंडारण के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पैदा कर देता है। वातावरण में नमी बढ़ने पर दालों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और भंडारण में लगने वाले कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार नमी, तापमान और भंडारण की परिस्थितियां दालों की गुणवत्ता तथा उनमें होने वाले नुकसान को प्रभावित करने वाले अहम कारक हैं। ऐसे में सवाल है कि बारिश के मौसम में घर में रखी दाल को घुन से कैसे बचाया जाए? इसका सबसे महत्वपूर्ण जवाब है—दाल को सूखा रखना, नमी से बचाना, साफ-सुथरे और अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखना तथा नियमित रूप से उसकी जांच करना।
घुन क्यों लगती है दाल?
आम बोलचाल में दाल में लगने वाले छोटे कीड़ों को अक्सर घुन कहा जाता है। भंडारित दालों में कई तरह के कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें दालों को प्रभावित करने वाले भंडारण कीट भी शामिल हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भी दालों के लंबे समय तक भंडारण के दौरान कीटों और नमी को महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल किया है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से रसोई में रखे खाद्य पदार्थों को सूखा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि दाल पहले से पर्याप्त सूखी न हो या उसे ऐसे स्थान पर रखा जाए जहां भाप और नमी अधिक रहती है, तो उसकी भंडारण गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
दाल खरीदते समय ही बरतें सावधानी
दाल को घुन से बचाने की शुरुआत उसे खरीदने से ही हो जाती है। पैकेट या खुली दाल खरीदते समय ध्यान दें कि दाल साफ, सूखी और सामान्य दिखाई दे। उसमें किसी तरह के छेद, जाला, असामान्य गंध या कीड़ों की मौजूदगी नजर आए तो उसे न खरीदें। बहुत अधिक मात्रा में दाल एक साथ खरीदकर लंबे समय तक रखने के बजाय घर की जरूरत के मुताबिक सीमित मात्रा रखना भी व्यावहारिक तरीका है। इससे दाल लंबे समय तक भंडारित नहीं रहती और खराब होने या कीट लगने की संभावना कम की जा सकती है।
बारिश में दाल को नमी से रखें दूर
बरसात के मौसम में सबसे जरूरी है कि दाल को नमी से दूर रखा जाए। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की घरेलू खाद्य सुरक्षा संबंधी सामग्री में भी खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण के दौरान नमी, अत्यधिक गर्मी और धूल से बचाने पर जोर दिया गया है। दाल के डिब्बे को सिंक, गैस के बिल्कुल पास, पानी की टंकी या ऐसी जगह पर न रखें जहां भाप और पानी की छींटें पहुंचती हों। रसोई की ऐसी अलमारी बेहतर है जो सूखी और साफ हो।
एयरटाइट डिब्बा हो सकता है बेहतर विकल्प
दाल को खुले थैले या ढीले ढक्कन वाले बर्तन में रखने के बजाय अच्छी तरह बंद होने वाले साफ और सूखे कंटेनर में रखना ज्यादा उचित है। डिब्बे में नमी प्रवेश करने की गुंजाइश जितनी कम होगी, भंडारण की स्थिति उतनी बेहतर रहेगी। हालांकि केवल एयरटाइट डिब्बा इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। अगर दाल पहले से नम है या डिब्बा अंदर से गीला है, तो बंद कंटेनर में रखने से समस्या दूर नहीं होगी। इसलिए डिब्बा पूरी तरह सूखा होना चाहिए और उसमें रखने वाली दाल भी सूखी होनी चाहिए।
डिब्बे में पुरानी दाल बची हो तो नई दाल न मिलाएं
रसोई में अक्सर एक गलती की जाती है—पुरानी दाल खत्म होने से पहले उसी डिब्बे में नई दाल डाल दी जाती है। ऐसा करने से पुरानी दाल में मौजूद किसी संभावित कीट या अंडे का संक्रमण नई दाल तक पहुंच सकता है। इसलिए बेहतर है कि पहले पुरानी दाल पूरी तरह इस्तेमाल करें। डिब्बे को खाली करके अच्छी तरह साफ और पूरी तरह सुखाने के बाद ही उसमें नई दाल रखें।
समय-समय पर दाल की जांच करते रहें
दाल को महीनों तक बिना देखे छोड़ देना ठीक नहीं है। कुछ समय के अंतराल पर डिब्बा खोलकर दाल को ध्यान से देखें। यदि छोटे कीड़े, छेद, जाला, असामान्य गंध या दाल के रंग-रूप में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे तो उसे सामान्य मानकर इस्तेमाल न करें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की भंडारण संबंधी जानकारी में भी संग्रहित दालों की नियमित जांच की जरूरत बताई गई है, ताकि भंडारण के दौरान होने वाले कीट संक्रमण का पता समय रहते लगाया जा सके।
तेज धूप में सुखाने की बात में रखें सावधानी
घरेलू स्तर पर दाल को धूप दिखाने की सलाह अक्सर दी जाती है। लेकिन बरसात के मौसम में धूप और नमी की स्थिति लगातार बदलती रहती है। इसलिए दाल को बाहर रखने से पहले मौसम की स्थिति देखना जरूरी है। यदि दाल को सुखाया जाए तो उसे पूरी तरह सूखने देना जरूरी है और उसके बाद ही साफ, सूखे कंटेनर में रखना चाहिए। आधी सूखी दाल को तुरंत बंद डिब्बे में भर देना सही तरीका नहीं है। साथ ही, वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा कीट नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नियंत्रित ताप उपचार को घर में मनमाने तापमान और समय के साथ दोहराना उचित नहीं है। ऐसे उपचारों के लिए निश्चित तापमान, समय और उपकरण की जरूरत होती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने दालों में भंडारण कीट नियंत्रण के लिए नियंत्रित ताप उपचार संबंधी तकनीकें विकसित की हैं।
तेजपत्ता, नीम या लहसुन रखने से क्या घुन पूरी तरह खत्म हो जाती है?
दाल में तेजपत्ता, नीम की पत्तियां या लहसुन रखने जैसे घरेलू उपायों का इस्तेमाल कई घरों में पारंपरिक तौर पर किया जाता है। लेकिन इन्हें घुन से बचाव का पक्का या वैज्ञानिक रूप से हर परिस्थिति में प्रभावी तरीका मानना उचित नहीं होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भंडारण कीटों के नियंत्रण के लिए कुछ पौधों से प्राप्त आवश्यक तेलों और वनस्पति आधारित तकनीकों पर वैज्ञानिक काम किया है। हालांकि संस्थागत शोध में इस्तेमाल की गई मात्रा, विधि और परिस्थितियां घरेलू रसोई में किसी पत्ती या खाद्य सामग्री को सीधे दाल में डालने के बराबर नहीं हैं। इसलिए घरेलू स्तर पर सबसे भरोसेमंद प्राथमिकता दाल को सूखा, साफ और उचित तरीके से बंद करके रखना होनी चाहिए।
अगर दाल में घुन लग जाए तो क्या करें?
यदि दाल में स्पष्ट रूप से कीड़े दिखाई दे रहे हैं, बहुत अधिक छेद हो चुके हैं, जाला नजर आ रहा है या दाल से असामान्य गंध आ रही है तो उसे बचाकर खाने की कोशिश करने के बजाय फेंक देना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है। सिर्फ कीड़े निकालकर बाकी दाल को तुरंत इस्तेमाल कर लेना हर स्थिति में सुरक्षित नहीं माना जा सकता, क्योंकि संक्रमण का स्तर बाहर से दिखाई देने से अधिक हो सकता है। खासकर ऐसी दाल जिसमें फफूंद, बदबू या स्पष्ट खराबी के संकेत हों, उसका सेवन नहीं करना चाहिए। जिस डिब्बे में संक्रमित दाल रखी थी, उसे भी खाली करके अच्छी तरह साफ और पूरी तरह सुखाना जरूरी है। आसपास रखी दूसरी दालों और अनाज की भी जांच करनी चाहिए।
रसोई की सफाई भी है जरूरी
दालों को घुन से बचाने के लिए सिर्फ डिब्बे पर ध्यान देना काफी नहीं है। जिस अलमारी में अनाज और दालें रखी जाती हैं, वहां गिरे हुए दाने, धूल और पुराने खाद्य अवशेष जमा न होने दें। नियमित सफाई से भंडारण क्षेत्र को स्वच्छ रखा जा सकता है। खाद्य पदार्थों को सीधे फर्श पर रखने के बजाय साफ और सूखी जगह पर रखना भी बेहतर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुताबिक दालों के भंडारण में नमी के साथ-साथ कीट, फफूंद, बैक्टीरिया और अन्य जैविक कारक भी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
छोटी मात्रा में खरीदना क्यों हो सकता है बेहतर?
यदि घर में दालों की खपत कम है तो बहुत बड़ी मात्रा में दाल खरीदकर लंबे समय तक रखने की जरूरत नहीं है। छोटी मात्रा में खरीदने से दाल जल्दी इस्तेमाल हो सकती है और लंबे भंडारण से जुड़ी परेशानियों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा अलग-अलग दालों को अलग साफ कंटेनर में रखना चाहिए। इससे किसी एक दाल में समस्या आने पर दूसरी दालों तक उसके फैलने का जोखिम कम किया जा सकता है।
क्या कहता है वैज्ञानिक नजरिया?
दालों के सुरक्षित भंडारण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मूल आधार केवल किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि उचित भंडारण परिस्थितियां बनाए रखना है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और उपभोक्ता मामले विभाग ने प्रमुख दालों के सुरक्षित भंडारण से जुड़े प्रोटोकॉल विकसित करने के लिए संयुक्त अध्ययन भी शुरू किया है। इसमें मूंग, उड़द, चना, अरहर और मसूर जैसी प्रमुख दालें शामिल हैं। इससे साफ है कि दालों की गुणवत्ता बनाए रखने में भंडारण की परिस्थितियों की अहम भूमिका है।
निष्कर्ष
बरसात में दाल को घुन से बचाने का सबसे आसान तरीका किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि नमी से बचाव, साफ-सूखा कंटेनर, उचित भंडारण, छोटी मात्रा में खरीद और नियमित जांच को अपनी आदत बनाना है। अगर दाल में कीट संक्रमण के स्पष्ट संकेत दिखाई दें तो उसे बचाने के बजाय खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहतर है। बारिश के मौसम में रसोई की अलमारी को सूखा और साफ रखना तथा दालों को अच्छी तरह बंद डिब्बों में रखना छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं। यही सावधानियां दालों की गुणवत्ता बनाए रखने और अनावश्यक खाद्य बर्बादी को कम करने में मदद कर सकती हैं।