बरसात में बच्चों को किन संक्रमणों से ज्यादा खतरा रहता है?
बारिश का मौसम बच्चों के लिए कई मायनों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जलभराव, दूषित पानी, गंदगी, मच्छरों की बढ़ती संख्या और घर के आसपास नमी जैसी परिस्थितियां कुछ संक्रामक बीमारियों के फैलाव को बढ़ावा दे सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बच्चों में पर्यावरण से जुड़े प्रमुख स्वास्थ्य जोखिमों में दस्त और श्वसन संक्रमण शामिल हैं, जबकि बारिश के मौसम में मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है। हालांकि हर बच्चे को बारिश में संक्रमण होगा, ऐसा नहीं है। जोखिम स्थानीय मौसम, स्वच्छता, पानी की गुणवत्ता, मच्छरों की संख्या, बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
१. दस्त और पेट के संक्रमण
बरसात में बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चिंताओं में से एक दस्त और आंतों के संक्रमण हैं। दूषित पानी और संक्रमित भोजन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बच्चों में दस्त कई तरह के वायरस, बैक्टीरिया और परजीवियों के कारण हो सकता है और खराब स्वच्छता तथा असुरक्षित पानी संक्रमण फैलने में भूमिका निभाते हैं। छोटे बच्चों में दस्त होने पर सबसे बड़ी चिंता शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी यानी डिहाइड्रेशन की होती है।
किन लक्षणों पर ध्यान दें?
बच्चे को बार-बार पतला दस्त, उल्टी, अत्यधिक प्यास, कम पेशाब, सुस्ती या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दस्त में ओआरएस घोल शरीर से खोए पानी और इलेक्ट्रोलाइट की भरपाई में महत्वपूर्ण है।
२. डेंगू का खतरा
बारिश के बाद जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां बना सकता है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर घरों और उनके आसपास भी पाया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डेंगू का संक्रमण गर्म और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आम है तथा इसका प्रसार अक्सर बारिश के मौसम और उसके बाद बढ़ता है। बच्चे को अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मतली या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डेंगू में कुछ चेतावनी संकेत बुखार कम होने के बाद भी सामने आ सकते हैं। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
३. मलेरिया
मलेरिया भी मच्छर से फैलने वाला संक्रमण है और इसका जोखिम कई क्षेत्रों में बारिश के दौरान बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मलेरिया का जोखिम उष्णकटिबंधीय देशों में बारिश के मौसम में अधिक हो सकता है और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे गंभीर बीमारी के लिए विशेष रूप से संवेदनशील समूहों में शामिल हैं। बुखार, ठंड लगना और सिरदर्द इसके सामान्य शुरुआती लक्षण हैं। मलेरिया के लक्षण दूसरी बुखार वाली बीमारियों जैसे भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से दवा शुरू करना उचित नहीं है
४. वायरल और श्वसन संक्रमण
बरसात के मौसम में तापमान और वातावरण में बदलाव के साथ बच्चों में सर्दी, खांसी और अन्य श्वसन संक्रमण भी देखने को मिल सकते हैं। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर श्वसन संक्रमण सिर्फ बारिश के कारण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन बच्चों के स्वास्थ्य पर पर्यावरणीय प्रभावों में श्वसन संक्रमण और निमोनिया को महत्वपूर्ण चिंता के रूप में शामिल करता है। अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, तेज सांस, लगातार खांसी, अत्यधिक सुस्ती या तेज बुखार हो तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
५. टाइफाइड और दूषित भोजन-पानी से संक्रमण
बारिश के दौरान जलभराव और खराब स्वच्छता की स्थिति में पीने के पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। इससे पानी और भोजन से फैलने वाले कई संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सुरक्षित पेयजल, बेहतर स्वच्छता और हाथों की सफाई दस्त जैसे संक्रमणों से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं। इसलिए बच्चों को सड़क किनारे खुले में रखे खाद्य पदार्थ, संदिग्ध पानी और ठीक से न धुले फल-सब्जियों से बचाना महत्वपूर्ण है।
बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए क्या करें?
साफ पानी ही पिलाएं
बच्चों को पीने के लिए सुरक्षित पानी दें। पानी के स्रोत या उसकी गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा बताए गए सुरक्षित पानी के उपाय अपनाएं।
हाथ धोने की आदत डालें
खाना खाने से पहले, शौचालय के बाद और बाहर से घर लौटने पर साबुन और पानी से हाथ धोना जरूरी है। छोटे बच्चों को अभिभावकों को हाथ धोने की सही आदत सिखानी चाहिए।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें
गमले, बाल्टी, पुराने टायर, कूलर या ऐसी दूसरी जगह जहां पानी जमा हो सकता है, उनकी नियमित जांच करें। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रमणों की रोकथाम में महत्वपूर्ण है।
बच्चों को मच्छरों से बचाएं
बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जो शरीर को पर्याप्त ढकें। घर में खिड़की-दरवाजों पर मच्छररोधी जाली और जरूरत के अनुसार मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। मच्छररोधी उत्पाद बच्चों पर इस्तेमाल करने से पहले उसके लेबल और उम्र संबंधी निर्देश जरूर देखें।
भोजन की स्वच्छता पर ध्यान दें
बच्चों को ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन दें। भोजन को ढककर रखें और लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखे भोजन के इस्तेमाल से बचें।
टीकाकरण पूरा रखें
बच्चे का नियमित टीकाकरण राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार समय पर कराना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बच्चों को निर्धारित समय पर टीकाकरण कराने की सलाह देता है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
बारिश में बच्चे को बुखार या दस्त होने पर हर बार गंभीर बीमारी मानना जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
तुरंत चिकित्सकीय मदद लें अगर बच्चे में:
* सांस लेने में परेशानी हो
* बहुत ज्यादा सुस्ती या बेहोशी जैसा व्यवहार हो
* लगातार उल्टी हो
* बच्चा पानी या दूध न पी पा रहा हो
* पेशाब बहुत कम हो जाए
* तेज या लगातार बुखार बना रहे
* दौरे पड़ें
* शरीर पर असामान्य खून बहने के संकेत दिखें
* दस्त के साथ डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार छोटे बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, बुखार, दौरे, कम सक्रियता या खाने-पीने में परेशानी जैसे संकेतों पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
खुद से एंटीबायोटिक देना क्यों सही नहीं?
बच्चे को बुखार, खांसी या दस्त होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक देना उचित नहीं है। हर संक्रमण बैक्टीरिया से नहीं होता और वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक सामान्यतः उपचार नहीं है।सही कारण जाने बिना दवा देने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है और अनावश्यक दवाओं से नुकसान भी हो सकता है। इसलिए बच्चे की उम्र, लक्षण और स्थिति के आधार पर चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
बरसात अपने साथ सिर्फ ठंडक और हरियाली नहीं लाती, बल्कि बच्चों के आसपास संक्रमण फैलने के कुछ जोखिम भी बढ़ा सकती है। दस्त, पानी और भोजन से फैलने वाले संक्रमण, डेंगू, मलेरिया और श्वसन संक्रमण इस मौसम में विशेष ध्यान देने योग्य स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए साफ पानी, स्वच्छ भोजन, साबुन से हाथ धोना, मच्छरों से बचाव, आसपास पानी जमा न होने देना और समय पर टीकाकरण जैसे बुनियादी उपाय बेहद महत्वपूर्ण हैं। सबसे अहम बात यह है कि बच्चे में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक सुस्ती या डिहाइड्रेशन जैसे संकेत दिखाई दें तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय चिकित्सकीय सहायता ली जाए।