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बारिश का डबल अलर्ट: रैट फीवर, डेंगू और मलेरिया का बढ़ा खतरा

Shahana • 2026-07-20 21:39:07
बारिश का डबल अलर्ट: रैट फीवर, डेंगू और मलेरिया का बढ़ा खतरा

बारिश से मिली राहत, लेकिन इन बीमारियों ने बढ़ाई चिंता

मौसम बदला, खतरा नहीं, डॉक्टरों ने जारी की अहम एडवाइजरी


Location:-  Mumbai, India

Date:- 20 July 2026

Byline:- Shahana


बारिश के बाद बड़ा हेल्थ अलर्ट, रैट फीवर और डेंगू का बढ़ा खतरा
देश के कई राज्यों में बारिश से भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। मुजफ्फरनगर में तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक गिरा। दूसरी ओर लगातार बारिश और जलभराव के बीच स्वास्थ्य विभागों ने रैट फीवर, डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमणों के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बारिश से राहत, लेकिन स्वास्थ्य पर बढ़ा नया खतरा

लगातार कई दिनों की भीषण गर्मी और उमस के बाद उत्तर भारत के कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश लोगों के लिए राहत लेकर आई है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में तापमान लगभग 10 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की खबर सामने आई, जिससे मौसम सुहाना हो गया। हालांकि मौसम में आए इस बदलाव के साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नई चुनौतियों की तरफ भी ध्यान दिलाया है। बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव, गंदा पानी और बढ़ती नमी ने कई संक्रामक बीमारियों का जोखिम बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विभागों का कहना है कि राहत के इस मौसम में लापरवाही लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।

मुजफ्फरनगर में मौसम ने बदली तस्वीर

मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हुई बारिश ने लंबे समय से जारी गर्मी का असर काफी हद तक कम कर दिया। तापमान में आई उल्लेखनीय गिरावट से लोगों को राहत मिली और बाजारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य गतिविधियां फिर से बढ़ने लगीं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। हालांकि लगातार बारिश की स्थिति में जलभराव और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

BMC ने जारी की रैट फीवर एडवाइजरी

लगातार बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने लेप्टोस्पायरोसिस, जिसे आम बोलचाल में रैट फीवर कहा जाता है, को लेकर हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से चूहों के पेशाब से दूषित हुए पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैल सकता है। बारिश के दौरान सड़कों और गलियों में जमा पानी इस संक्रमण का माध्यम बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों के पैरों या शरीर पर कट या घाव हैं, उनमें संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है।

रैट फीवर कितना गंभीर है

Journal of Infection में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार दुनिया भर में हर वर्ष लगभग 10 लाख लोग लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित होते हैं और लगभग 60 हजार लोगों की मौत होती है। भारत में मानसून के दौरान इस बीमारी के मामलों में वृद्धि देखी जाती है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां जलभराव और स्वच्छता की समस्या अधिक होती है। हालांकि सभी संक्रमित मरीज गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचते, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण किडनी, लीवर और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

डॉक्टरों के अनुसार तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी, कमजोरी और ठंड लगना शुरुआती संकेत हो सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी, पीलिया, किडनी फेलियर और आंतरिक रक्तस्राव जैसी जटिलताएं भी विकसित हो सकती हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

डेंगू और मलेरिया का भी बढ़ा जोखिम

बारिश के मौसम में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसी कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कई लोग शुरुआती बुखार को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

तेज बुखार, शरीर में दर्द, प्लेटलेट्स में गिरावट, लगातार कमजोरी, ठंड लगना और उल्टी जैसे लक्षण दिखने पर जांच कराना जरूरी है।

जलजनित बीमारियों का भी खतरा

बारिश के मौसम में केवल मच्छरजनित बीमारियां ही नहीं बढ़तीं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण टाइफॉयड, हैजा और फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और बिना उबाले पानी से बचना चाहिए। घर में पीने के पानी की स्वच्छता बनाए रखना संक्रमण रोकने का महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है।

क्या केवल बारिश जिम्मेदार है

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश अपने आप बीमारी नहीं फैलाती। वास्तविक समस्या जलभराव, खराब ड्रेनेज, कचरे का उचित निस्तारण न होना और व्यक्तिगत स्वच्छता में कमी है। यदि शहरी निकाय समय पर जलनिकासी सुनिश्चित करें और नागरिक भी साफ-सफाई का ध्यान रखें तो संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आगे क्या

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम से मिली राहत का आनंद तभी सुरक्षित रहेगा जब लोग स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को गंभीरता से अपनाएं। मानसून के दौरान सतर्कता ही सबसे प्रभावी बचाव है। समय पर पहचान, शीघ्र उपचार और स्वच्छता की आदतें हजारों लोगों को गंभीर संक्रमण से बचा सकती हैं।

 

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Shahana

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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