महाराष्ट्र में एफडीए ने नामी कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की है। ब्लिंकिट के मलाड स्थित वेयरहाउस में कॉकरोच मिलने पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। वहीं, रिलायंस रिटेल में काजू कतली के अंदर कीड़े पाए गए, जबकि अमेज़न को एक्सपायर्ड सामान सौंपने का अदालती आदेश मिला है।
📍 Location:Mumbai
📰 Date:11 August 2026
✍️ Byline:Apurva Choudhary
फूड सेफ्टी पर बड़ा खुलासा: ब्लिंकिट के वेयरहाउस में कॉकरोच, रिलायंस की मिठाई में निकले कीड़े
महाराष्ट्र में फ़ूड सेफ्टी नियमों को लेकर एक बेहद गंभीर और परेशान करने वाला मुआमला सामने आया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने दिग्गज रिटेल और ई-कॉमर्स कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है। रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) और ब्लिंकिट (Blinkit) जैसी नामी कंपनियों के ठिकानों पर सड़ा हुआ खाना, कॉकरोच और कीड़े पाए गए हैं। इस कार्रवाई ने ग्राहकों के भरोसे और इन कंपनियों के दावों के बीच के गहरे फासले को उजागर कर दिया है।
इस पूरी पेशरफ़्त ने यह साबित कर दिया है कि महज़ चंद मिनटों में सामान डिलीवर करने का दावा करने वाली क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) कंपनियां और बड़े रिटेल स्टोर्स बुनियादी फ़ूड सेफ्टी नियमों का पालन करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। इस मुआमले का सीधा असर आम जनता की सेहत पर पड़ रहा है। यह घटनाक्रम केवल एक लापरवाही नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है, जिसने नियामक संस्थाओं को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
ब्लिंकिट वेयरहाउस में कॉकरोच और सड़ा हुआ खाना
इस कार्रवाई के तहत सबसे चौंकाने वाले हालात मुंबई के मलाड (पश्चिम) स्थित ब्लिंकिट के फैसिलिटी सेंटर में देखने को मिले। एफडीए की तहक़ीक़ात में यहां बड़े पैमाने पर कॉकरोच और कीड़े पनपते हुए पाए गए। हालात इतने खराब थे कि खाद्य सामग्री को जंग लगे रैक पर बेतरतीब तरीके से रखा गया था। कोल्ड स्टोरेज एरिया में भी साफ-सफाई का बुनियादी ढांचा नदारद था और वहां एक्सपायर्ड या खराब हो चुके पैकेट बंद खाने का स्टॉक बड़ी मात्रा में मिला।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस वेयरहाउस में 'फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट' (FIFO) और 'फर्स्ट-एक्सपायर्ड, फर्स्ट-आउट' (FEFO) जैसे बुनियादी और अनिवार्य नियमों की सरेआम अनदेखी की जा रही थी। इन गंभीर उल्लंघनों को देखते हुए एफडीए ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSS Act) की धारा 32(3) के तहत ब्लिंकिट का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस निलंबन के दौरान कंपनी को किसी भी तरह का खाद्य व्यापार करने से रोक दिया गया है।
रिलायंस रिटेल की काजू कतली में कीड़े
दूसरी बड़ी कार्रवाई बुलढाणा जिले के एआरडी सिनेमॉल स्थित रिलायंस रिटेल लिमिटेड के आउटलेट पर की गई। नियामक संस्था को एक शिकायत मिली थी कि इस स्टोर में रखे 'लक्ष्मी नारायण' ब्रांड के डिब्बाबंद 'काजू कतली' में जिंदा कीड़े (लार्वा) मिले हैं। शिकायत के आधार पर एफडीए की टीम ने जब जांच की, तो पता चला कि जिस बैच (29 मई को निर्मित) की शिकायत की गई थी, वह स्टॉक आउटलेट से हटा दिया गया था।
हालांकि, अधिकारियों ने 20 जुलाई को निर्मित दूसरे बैच के नमूनों को सीज़ कर लिया है। एफडीए ने मौके से 11.340 किलोग्राम वज़न के 54 बॉक्स ज़ब्त किए हैं, जिनकी कीमत लगभग 10,238 रुपये आंकी गई है। इन नमूनों को परीक्षण के लिए अधिकृत खाद्य प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद कंपनी और ब्रांड के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
एक्सपायर्ड सामान पर अमेज़न को बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्देश
इस बीच, ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न (Amazon Retail India) को भी बॉम्बे हाई कोर्ट से एक सख्त निर्देश मिला है। अमेज़न ने ठाणे के भिवंडी स्थित अपने वेयरहाउस के लाइसेंस निलंबन को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था। एफडीए का आरोप था कि अमेज़न एक्सपायर हो चुके खाने को नष्ट करने के बजाय उसे रिटेल बाज़ार में भेज रहा था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने अमेज़न को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अपने भिवंडी स्थित वेयरहाउस से सभी एक्सपायर और खराब हो चुके सामान को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए एफडीए को सौंप दे। अदालत ने एफडीए को भी इस मुआमले में अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए 27 अगस्त तक का समय दिया है। यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम नज़रिया पेश करता है।
दावों और हकीकत के बीच का फासला
इन तीनों मामलों का विश्लेषण करने से एक गंभीर पैटर्न उभर कर सामने आता है। क्विक कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफार्म्स लगातार अपनी स्पीड, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वालिटी कंट्रोल का दावा करते हैं। लेकिन हकीकत में, मुनाफे और तेज़ डिलीवरी की होड़ में फ़ूड सेफ्टी नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
अक्सर यह देखा गया है कि बड़ी कंपनियां सप्लाई चेन और वेयरहाउसिंग को आउटसोर्स कर देती हैं, जिससे क्वालिटी कंट्रोल का सीधा ज़िम्मा खत्म हो जाता है। जब तक कोई ग्राहक शिकायत नहीं करता या कोई नियामक संस्था अचानक छापा नहीं मारती, तब तक अंदरूनी हालात छिपे रहते हैं। यह मुआमला इस नैरेटिव को सीधे तौर पर चुनौती देता है कि बड़ी और नामी कंपनियों के उत्पाद हमेशा सुरक्षित होते हैं।
कूटनीतिक और आर्थिक परिणाम
इस पूरी पेशरफ़्त का सीधा असर इन कंपनियों की क्रेडिबिलिटी (Credibility) और ब्रांड वैल्यू पर पड़ेगा। डिजिटल इकॉनमी के दौर में, जहां ग्राहक पूरी तरह से ऐप्स और ऑनलाइन तस्वीरों पर भरोसा करके खाने का सामान मंगवाते हैं, ऐसी घटनाएं उनके भरोसे को चकनाचूर कर देती हैं। ग्राहकों के बीच यह डर पैदा होना लाज़मी है कि जो सामान उनके घर पहुंच रहा है, वह किस तरह के सड़े-गले माहौल से होकर आ रहा है।
बाज़ार और अर्थव्यवस्था के नज़रिए से भी यह एक चेतावनी है। निवेशकों और शेयरधारकों को यह समझना होगा कि लंबी अवधि में मुनाफे के लिए बुनियादी नियमों का पालन ज़रूरी है। अगर नियामक संस्थाएं इसी तरह सख्त कदम उठाती रहीं, तो इन कंपनियों के ऑपरेशंस बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं, जिससे पूरी सप्लाई चेन में एक बड़ा व्यवधान आ सकता है।
कुल मिलाकर, ब्लिंकिट, रिलायंस और अमेज़न के ठिकानों पर हुई यह कार्रवाई एक बेहद ज़रूरी और स्वागत योग्य कदम है। इससे यह साफ हो गया है कि फ़ूड सेफ्टी नियमों से समझौता करने वाली किसी भी कंपनी को बख्शा नहीं जाना चाहिए, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो। यह स्थापित हो चुका है कि वेयरहाउसिंग और स्टोरेज के स्तर पर गंभीर खामियां मौजूद हैं, जिनका तुरंत समाधान होना चाहिए।
हालांकि, अभी यह देखना बाकी है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद इन कंपनियों पर क्या स्थायी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई होती है। मुस्तक़बिल में यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि एफडीए और अन्य नियामक संस्थाएं केवल शिकायतों के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित तौर पर ऐसी जांच करें। आम जनता की सेहत को किसी भी कॉर्पोरेट एजेंडे या तेज़ डिलीवरी की होड़ की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।