देश के कई राज्यों में एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई तेज है। एफएसएसएआई के मानकों और त्वरित जांच से उपभोक्ता पनीर में स्टार्च जैसी मिलावट के संकेत पहचान सकते हैं।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 14 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
देश के कई राज्यों में एनालॉग और संदिग्ध पनीर की बिक्री तथा आपूर्ति को लेकर खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई है। अलग-अलग राज्यों से लिए गए नमूनों, जब्ती और निरीक्षण की रिपोर्ट ने पनीर की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाई है।
ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि बाजार से खरीदा गया पनीर वास्तव में दूध से तैयार किया गया है या उसमें गैर-डेयरी सामग्री अथवा अन्य मिलावट मौजूद है। उपभोक्ताओं के लिए लेबल की जानकारी और एफएसएसएआई के आधिकारिक त्वरित परीक्षण उपयोगी शुरुआती साधन हैं।
एनालॉग पनीर क्या है
एफएसएसएआई के मौजूदा मानकों के अनुसार पनीर दूध से तैयार उत्पाद है। इसमें दूध या दूध के ठोस पदार्थों का इस्तेमाल और अनुमत अम्लकारकों के जरिए जमाव की प्रक्रिया शामिल है। सामान्य पनीर के लिए नमी और दूध वसा से जुड़े निर्धारित मानक भी लागू हैं।
इसके विपरीत, बाजार में ऐसे उत्पाद भी सामने आए हैं जिन्हें गैर-डेयरी सामग्री के इस्तेमाल के साथ पनीर जैसे उत्पाद के तौर पर बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। ऐसे उत्पादों की पहचान के लिए पैकेट पर दर्ज सामग्री और उत्पाद की श्रेणी को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
एफएसएसएआई के मानक उपभोक्ताओं को पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता समझने के लिए नियामकीय आधार देते हैं। इसलिए केवल रंग, आकार या कीमत के आधार पर किसी उत्पाद को असली या नकली घोषित करना उचित नहीं है।
कई राज्यों में सामने आया मामला
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड सहित कई राज्यों में एनालॉग या संदिग्ध पनीर से जुड़ी कार्रवाई सामने आई है। रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों में जब्ती, नमूना जांच और नियामकीय कार्रवाई का उल्लेख है।
रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच पनीर के 285 नमूने लिए गए। इनमें 200 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 171 नमूने निम्नस्तरीय और 29 असुरक्षित बताए गए हैं। इन आंकड़ों को संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग के हवाले से रिपोर्ट किया गया है।
उत्तर प्रदेश में भी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार एक वर्ष के दौरान 5,643 छापे मारे गए और 1,517 नमूने लिए गए। इनमें 346 नमूने असुरक्षित पाए गए। रिपोर्ट में 18 एफआईआर और 446 अदालती मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक के बाद कार्रवाई के दौरान 10,835 किलो पनीर जब्त किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। छत्तीसगढ़ में भी गैर-डेयरी सामग्री से तैयार उत्पादों के इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई का उल्लेख है।
दिल्ली की आपूर्ति पर भी सवाल
रिपोर्ट में दिल्ली में दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर पहुंचने का अनुमान दिया गया है। इसमें विभिन्न थोक मंडियों तक होने वाली आपूर्ति का भी उल्लेख है। हालांकि ऐसे आंकड़ों को अनुमान के तौर पर ही देखना चाहिए, जब तक संबंधित सरकारी एजेंसी की ओर से आधिकारिक और अद्यतन आंकड़े सार्वजनिक न किए जाएं।
यही वजह है कि उपभोक्ताओं के लिए केवल स्थानीय बाजार या विक्रेता के दावे पर निर्भर रहने के बजाय पैकेजिंग, लेबल और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी की जांच करना ज्यादा अहम हो जाता है।
पैकेट वाला पनीर खरीदते समय क्या देखें
पैकेट में बिकने वाले पनीर पर सामग्री की जानकारी पढ़ें। अगर उत्पाद में सोया प्रोटीन, मटर प्रोटीन या अन्य गैर-डेयरी घटक दर्ज हैं, तो उसे सामान्य दूध से बने पनीर के समान समझना सही नहीं होगा।
उत्पाद का नाम, सामग्री, पैकिंग विवरण और संबंधित खाद्य सुरक्षा जानकारी देखें। किसी उत्पाद को केवल पनीर जैसी शक्ल देखकर दूध से बना पनीर मान लेना सही तरीका नहीं है।
खुले पनीर में ज्यादा सावधानी
खुले में बिकने वाले पनीर में उपभोक्ता के पास पैकेट की तरह विस्तृत सामग्री सूची देखने का विकल्प नहीं होता। ऐसे मामलों में विक्रेता से उत्पाद की जानकारी मांगना और भरोसेमंद स्रोत से खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।
गंध और बनावट कुछ शुरुआती संकेत दे सकते हैं, लेकिन इन्हें निर्णायक वैज्ञानिक परीक्षण नहीं माना जाना चाहिए। केवल रबर जैसी बनावट, असामान्य गंध या रंग के आधार पर किसी उत्पाद को नकली घोषित नहीं किया जा सकता।
एफएसएसएआई का आयोडीन टेस्ट क्या बताता है
पनीर में स्टार्च की मौजूदगी जांचने के लिए एफएसएसएआई ने एक त्वरित परीक्षण बताया है। इसके लिए पनीर के छोटे नमूने को पानी के साथ उबालकर ठंडा किया जाता है और फिर आयोडीन घोल की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। नीला रंग बनने पर स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिलता है।
यहां एक जरूरी सावधानी है। यह परीक्षण स्टार्च की मौजूदगी का संकेत देता है। इसे अकेले किसी पनीर को पूरी तरह नकली या असुरक्षित घोषित करने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
किसी खाद्य पदार्थ की अंतिम गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए अधिकृत प्रयोगशाला जांच ज्यादा विश्वसनीय है। एफएसएसएआई के अनुसार उपभोक्ता अधिसूचित प्रयोगशाला में खाद्य नमूने की जांच भी करा सकते हैं।
सिर्फ सस्ता होना नकली होने का प्रमाण नहीं
बाजार में कीमत को लेकर भी भ्रम रहता है। सस्ता पनीर संदिग्ध हो सकता है, लेकिन कम कीमत अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, महंगा उत्पाद भी गुणवत्ता की गारंटी नहीं देता।
इसलिए कीमत को केवल एक संकेत की तरह देखें। अंतिम निर्णय के लिए लेबल, सामग्री, निर्माता की जानकारी और जरूरत पड़ने पर प्रयोगशाला जांच को प्राथमिकता दें।
असली पनीर के लिए क्या कहता है मानक
एफएसएसएआई के मौजूदा मानकों के अनुसार सामान्य पनीर में अधिकतम नमी की सीमा 60 प्रतिशत और शुष्क पदार्थ के आधार पर दूध वसा की न्यूनतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित है। कम वसा वाले पनीर के लिए अलग संरचनात्मक मानक लागू होते हैं।
इसका मतलब यह है कि केवल देखने या छूने से किसी उत्पाद की पूरी संरचना का आकलन संभव नहीं है। वसा, नमी और दूसरे गुणवत्ता मानकों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण की जरूरत पड़ सकती है।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिलावटी, असुरक्षित या भ्रामक लेबलिंग वाले खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई का प्रावधान है। राज्यों की खाद्य सुरक्षा एजेंसियां निरीक्षण, नमूना संग्रह और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करती हैं।
एफएसएसएआई उपभोक्ताओं को खाद्य मिलावट की पहचान के लिए डार्ट यानी त्वरित घरेलू परीक्षण संबंधी सामग्री भी उपलब्ध कराता है। इसमें दूध और दुग्ध उत्पादों सहित कई खाद्य पदार्थों में सामान्य मिलावट की जांच के तरीके दिए गए हैं।
उपभोक्ता शिकायत कहां करें
अगर किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह है, तो उसे केवल सोशल मीडिया पर साझा करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करना ज्यादा प्रभावी रास्ता है। एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा तंत्र के जरिए शिकायत और परीक्षण से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
संदिग्ध उत्पाद का पैकेट, बिल, बैच विवरण और खरीद से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखना भी शिकायत की प्रक्रिया में उपयोगी हो सकता है।
क्या है सबसे सुरक्षित तरीका
पनीर खरीदते समय पहले पैकेट और सामग्री की जानकारी देखें। खुले उत्पाद में स्रोत और विक्रेता की विश्वसनीयता पर ध्यान दें। असामान्य गंध, बनावट या स्वाद मिलने पर सेवन रोकना बेहतर है।
अगर स्टार्च जैसी मिलावट की आशंका है, तो एफएसएसएआई के बताए त्वरित परीक्षण को शुरुआती जांच के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन किसी उत्पाद की सुरक्षा पर अंतिम फैसला घरेलू परीक्षण से नहीं, बल्कि अधिकृत प्रयोगशाला जांच और संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण की कार्रवाई से होना चाहिए।
एनालॉग पनीर और मिलावटी दुग्ध उत्पादों पर अलग-अलग राज्यों में हो रही कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा की निगरानी को फिर चर्चा में ला दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों में कई राज्यों से जब्ती और नमूना विफल होने के मामले सामने आए हैं, लेकिन किसी पूरे बाजार या राज्य के सभी पनीर को नकली मानना तथ्यों के अनुरूप नहीं होगा।
उपभोक्ता के लिए सबसे अहम संदेश यही है कि पनीर खरीदते समय कीमत और दिखावट से आगे बढ़कर लेबल, सामग्री और विश्वसनीयता की जांच करें। संदेह होने पर आधिकारिक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और प्रयोगशाला जांच का सहारा लें। यही तरीका अफवाह से बचाते हुए वास्तविक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में ज्यादा कारगर है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।