Synopsis
नवी मुंबई के तुर्भे इलाके में खाद्य उत्पादों की कथित री-लेबलिंग का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) और Navi Mumbai Police Crime Branch की संयुक्त कार्रवाई में एक गोदाम से हजारों कार्टन खाद्य सामग्री बरामद की गई। अधिकारियों के अनुसार, कुछ उत्पादों पर मूल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट हटाकर नई तारीखें लगाने तथा सामग्री और न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी वाले लेबल बदलने का आरोप है।
Location: नवी मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
Date: 1 सितंबर 2026
Byline: Apurva Choudhary
तुर्भे के गोदाम में क्या मिला?
FDA और पुलिस की कार्रवाई 24 से 29 अगस्त के बीच तुर्भे के TTC Industrial Area स्थित Sadhana Enterprises के परिसर में हुई। अधिकारियों के मुताबिक यहां अलग-अलग निर्यात कंपनियों से जुड़े खाद्य उत्पाद रखे गए थे और कथित तौर पर उनकी पैकेजिंग तथा लेबल में बदलाव किया जा रहा था।
जांच के दौरान अधिकारियों को ऐसे उपकरण और सामग्री भी मिली, जिनका इस्तेमाल मूल तारीख हटाने और नई जानकारी प्रिंट करने में किए जाने का आरोप है। रिपोर्टों के अनुसार रसायनों की मदद से पुराने डेट मार्क मिटाए जाते थे और मशीन के जरिए नई तारीखें प्रिंट की जाती थीं। कुछ उत्पादों पर Ingredients और Nutritional Information से जुड़े नए स्टिकर लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
कितने सामान की हुई जब्ती?
कार्रवाई में 4,942 कार्टन खाद्य उत्पाद जब्त किए गए, जिनकी कीमत करीब ₹75.21 लाख बताई गई है। इसके अलावा कुछ एक्सपायर्ड और बिना उचित लेबल वाले उत्पाद भी मिले। अलग-अलग रिपोर्टों में कुल जब्त सामग्री का मूल्य लगभग ₹75.5 लाख बताया गया है।
यहां एक जरूरी तथ्य यह है कि शुरुआती रिपोर्टों में 5,000 कार्टन का आंकड़ा सामने आया था, जबकि FDA से संबंधित बाद की रिपोर्टों में 4,942 कार्टन का अधिक विशिष्ट आंकड़ा दिया गया है। इसलिए खबर में 4,942 कार्टन का आंकड़ा इस्तेमाल करना ज्यादा उचित है।
किन ब्रांडों के उत्पाद मिले?
जब्त स्टॉक में कई चर्चित खाद्य और पेय उत्पादों के नाम सामने आए हैं। इनमें Lay’s, Kurkure, Maggi, Knorr, Hellmann’s, Thums Up और Limca के अलावा कुछ अन्य उत्पाद भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, किसी ब्रांड के उत्पाद का इस परिसर में मिलना अपने आप में उस कंपनी की इस कथित हेराफेरी में संलिप्तता साबित नहीं करता। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्रवाई का केंद्र उन लोगों और संस्थाओं पर है, जिन पर उत्पादों की पैकेजिंग या लेबल में कथित तौर पर बदलाव करने का आरोप है।
मामला निर्यात से कैसे जुड़ा?
अधिकारियों के अनुसार परिसर में रखे गए कुछ खाद्य उत्पाद विदेशी बाजारों में भेजे जाने के लिए तैयार किए जा रहे थे। कुछ पैकेजिंग पर अलग-अलग भाषाओं में जानकारी भी मिली, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पाद तैयार किए जाने की आशंका सामने आई है। हालांकि संबंधित उत्पाद आखिर किन देशों में भेजे जाने थे, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
Sadhana Enterprises की क्या भूमिका बताई गई?
FDA की कार्रवाई Sadhana Enterprises के परिसर में हुई। अधिकारियों के अनुसार वहां विभिन्न exporter कंपनियों से जुड़े उत्पाद रखे गए थे और कथित तौर पर री-पैकिंग तथा लेबलिंग का काम किया जा रहा था। इस मामले में कई व्यक्तियों और कारोबारी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में संबंधित exporter entities की संख्या को लेकर अंतर है। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित संख्या को अंतिम मानने के बजाय जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई का इंतजार करना उचित होगा।
फूड सेफ्टी को लेकर क्यों गंभीर है मामला?
किसी पैकेज्ड खाद्य उत्पाद की मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपायरी डेट बदलना उपभोक्ता के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा जानकारी को प्रभावित कर सकता है। अगर किसी एक्सपायर्ड उत्पाद को नई तारीख के साथ बाजार में भेजा जाए तो ग्राहक उसकी वास्तविक shelf life के बारे में गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी कर सकता है।
इसी तरह Ingredients और Nutritional Information में कथित बदलाव से उन उपभोक्ताओं को भी गलत जानकारी मिल सकती है जो किसी खास सामग्री, एलर्जी या पोषण संबंधी जरूरत के आधार पर उत्पाद चुनते हैं।
क्या बड़े ब्रांडों पर भी कार्रवाई हुई?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। जिन उत्पादों के नाम सामने आए हैं, उनके ब्रांड मालिकों पर इस कथित री-लेबलिंग ऑपरेशन में शामिल होने का आरोप उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं लगाया गया है। जांच का मुख्य फोकस उस परिसर और उन लोगों पर है, जिन पर उत्पादों की तारीख और लेबल में कथित हेरफेर का आरोप है।
इसलिए केवल किसी ब्रांड का नाम जब्त सामान की सूची में होने के आधार पर कंपनी की भूमिका के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अब जांच किस दिशा में जाएगी?
महाराष्ट्र FDA ने कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कदम उठाए हैं और पुलिस स्तर पर भी मामला दर्ज किया गया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उत्पाद कहां से आए, किन कंपनियों के लिए पैकेजिंग की जा रही थी, कितने उत्पादों पर कथित बदलाव किया गया और क्या कोई सामान बाजार या विदेश तक पहुंचा।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि कथित री-लेबलिंग नेटवर्क में शामिल अन्य संस्थाओं की भूमिका क्या थी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश?
इस मामले के बाद पैकेज्ड फूड खरीदते समय उपभोक्ताओं के लिए पैकेट की manufacturing date, expiry या use-by date, seal और label की स्थिति देखना महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि किसी पैकेट पर तारीख के ऊपर अलग स्टिकर, मिटाए गए निशान या असामान्य प्रिंटिंग दिखाई दे तो ऐसे उत्पाद से सावधानी बरतना बेहतर है।
नवी मुंबई के तुर्भे में सामने आया यह मामला सिर्फ एक्सपायरी डेट बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य उत्पादों की labeling और supply chain की निगरानी से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। FDA और पुलिस की कार्रवाई में ₹75 लाख से अधिक मूल्य के उत्पाद जब्त किए गए और अधिकारियों ने मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी तथा पोषण संबंधी जानकारी में कथित बदलाव की जांच शुरू की है।
फिलहाल इस पूरे मामले को कथित री-लेबलिंग और फूड-सेफ्टी उल्लंघन के रूप में देखना उचित है। किसी बड़े ब्रांड या exporter की अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।