FSSAI की नेस्ले इंडिया पर कानूनी कार्रवाई, शिशु न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स के दावों और बायोटिन मानक पर सवाल
Harish Qureshi
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2026-09-18 14:37:31
FSSAI ने नेस्ले इंडिया के शिशु पोषण उत्पादों पर कथित नियामकीय गैर-अनुपालन को लेकर 3 अलग एडजुडिकेशन केस शुरू किए हैं। जांच में प्रमोशनल दावे और बायोटिन स्तर शामिल हैं।
नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026
FSSAI ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ शुरू की कानूनी कार्रवाई
भारत के खाद्य नियामक FSSAI ने नेस्ले इंडिया के कुछ शिशु पोषण उत्पादों को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। नियामक के मुताबिक मामला उत्पादों के प्रमोशनल दावों और निर्धारित पोषण मानकों के कथित गैर-अनुपालन से जुड़ा है।
FSSAI ने NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 के साथ एक फॉलो-अप इन्फेंट फॉर्मूला की जांच की। नियामक ने इन उत्पादों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उनके प्रमोशनल मटेरियल की समीक्षा की थी।
किन उत्पादों पर सवाल उठे
FSSAI की कार्रवाई मुख्य रूप से 3 उत्पादों से जुड़ी है।
पहले मामले में NAN Excella Pro Stage 1 के प्रमोशनल दावों की जांच हुई। नियामक ने उत्पाद से जुड़े “5 HMOs” और “Whey Protein” संबंधी दावों पर सवाल उठाया।
दूसरे मामले में Lactogen Pro 1 के लिए व्हे प्रोटीन को आसानी से पचने वाला बताने वाले दावे की जांच की गई। FSSAI के अनुसार इन दावों को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
तीसरा मामला एक फॉलो-अप फॉर्मूला के बायोटिन स्तर से जुड़ा है। FSSAI के मुताबिक शुरुआती प्रयोगशाला जांच में नमूना निर्धारित स्तर के अनुरूप नहीं पाया गया। बाद में रेफरल लैब में दोबारा जांच के दौरान भी बायोटिन संबंधी गैर-अनुपालन की पुष्टि हुई।
3 अलग एडजुडिकेशन केस
FSSAI के मुताबिक इन निष्कर्षों के आधार पर नेस्ले इंडिया के खिलाफ 3 अलग एडजुडिकेशन केस दायर किए गए हैं। इसका मतलब यह है कि नियामकीय प्रक्रिया अब औपचारिक कानूनी चरण में पहुंच गई है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि कानूनी कार्रवाई शुरू होना अपने आप में कंपनी को दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं है। अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।
प्रमोशनल दावों पर FSSAI की आपत्ति
FSSAI के अनुसार NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 से संबंधित कुछ प्रमोशनल दावे शिशु खाद्य उत्पादों के प्रचार पर लागू नियमों के अनुरूप नहीं थे।
रिपोर्टों के मुताबिक नियामक ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ शिशु दूध विकल्प, फीडिंग बोतल और शिशु खाद्य पदार्थों से संबंधित कानून के प्रावधानों को भी कार्रवाई के आधार में शामिल किया है।
शिशु पोषण उत्पादों की मार्केटिंग सामान्य खाद्य उत्पादों से अलग नियामकीय संवेदनशीलता रखती है। वजह यह है कि इनके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी सीधे माता-पिता और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य निर्णयों को प्रभावित करती है।
बायोटिन विवाद क्या है
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा बायोटिन की मात्रा से जुड़ा है।
FSSAI के अनुसार फॉलो-अप फॉर्मूला के एक नमूने की प्रयोगशाला जांच में बायोटिन का स्तर निर्धारित पोषण आवश्यकता के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद नमूने को रेफरल लैब में भेजा गया, जहां भी इसे निर्धारित आवश्यकता के अनुरूप नहीं पाया गया।
बायोटिन एक विटामिन है और शिशु फॉर्मूला में पोषण संबंधी निर्धारित मानकों का पालन नियामकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस मामले में FSSAI का आरोप उत्पाद की संरचना और लागू मानक के बीच कथित अंतर से संबंधित है।
नेस्ले का पुराना पक्ष क्या रहा है
नेस्ले इंडिया ने इससे पहले अपने शिशु पोषण उत्पादों को लेकर कहा है कि वह भारतीय सरकार के FSSAI और BIS मानकों का पालन करती है। कंपनी ने विशेष रूप से CERELAC को लेकर अगस्त 2024 के अपने बयान में कहा था कि उसके उत्पाद लागू भारतीय नियमों और मानकों के अनुरूप हैं।
हालांकि मौजूदा कार्रवाई NAN Excella Pro Stage 1, Lactogen Pro 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला से संबंधित है। इसलिए पुराने CERELAC बयान को मौजूदा मामलों का सीधा जवाब नहीं माना जाना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा FSSAI कार्रवाई पर टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर नेस्ले इंडिया ने तत्काल जवाब नहीं दिया था।
CERELAC विवाद से अलग है मौजूदा मामला
नेस्ले के शिशु उत्पादों को लेकर भारत में पहले भी बहस होती रही है। 2024 में CERELAC में अतिरिक्त शुगर की मात्रा को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के बाद विवाद हुआ था।
FSSAI ने बाद में स्पष्ट किया था कि भारत में उस समय लागू नियम शिशु खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त शुगर को पूरी तरह शून्य करने की अनिवार्यता नहीं रखते थे। 2026 में भी FSSAI ने स्पष्ट किया कि शिशु खाद्य पदार्थों के लिए 2020 के नियम लागू हैं और कोई नया शून्य-अतिरिक्त-शुगर नियम उस समय लागू नहीं हुआ था।
इसलिए मौजूदा FSSAI कार्रवाई को केवल CERELAC के पुराने शुगर विवाद से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। मौजूदा कार्रवाई अलग उत्पादों और अलग नियामकीय मुद्दों पर आधारित है।
बच्चों के न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स पर निगरानी क्यों अहम है
शिशु और छोटे बच्चों के लिए बने खाद्य उत्पादों में लेबलिंग, पोषण संरचना और प्रमोशनल दावों का महत्व सामान्य पैकेज्ड फूड से अलग है।
माता-पिता उत्पाद के लेबल और विज्ञापन में दिए दावों के आधार पर खरीदारी का फैसला लेते हैं। इसलिए नियामक यह देखता है कि किसी उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे दावे निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
मौजूदा मामले में FSSAI की जांच इसी नियामकीय ढांचे के तहत हुई है।
भारत में फूड सेफ्टी पर बढ़ी सख्ती
नेस्ले के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत में खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग और मार्केटिंग दावों पर नियामकीय निगरानी बढ़ी है।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक FSSAI ने पिछले कुछ वर्षों में खाद्य उत्पादों की जांच और प्रवर्तन गतिविधियों को तेज किया है। पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में लेबलिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों की जांच भी बढ़ी है।
अगस्त 2026 में FSSAI ने पैकेज्ड खाद्य और पेय पदार्थों में अधिक शुगर, नमक या संतृप्त वसा को लेकर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का प्रस्ताव भी रखा था।
इस व्यापक संदर्भ में शिशु पोषण उत्पादों पर नियामकीय कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन के बड़े अभियान का हिस्सा भी देखा जा रहा है।
कार्रवाई का असर क्या होगा
मौजूदा कार्रवाई का तत्काल प्रभाव कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया पर पड़ेगा। 3 एडजुडिकेशन मामलों में संबंधित उत्पादों और कथित गैर-अनुपालन से जुड़े तथ्यों की समीक्षा होगी।
अगर नियामकीय प्रक्रिया में उल्लंघन स्थापित होता है, तो लागू कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई तय होगी। लेकिन इस चरण पर किसी अंतिम दंड या दोषसिद्धि का दावा करना उचित नहीं होगा।
कंपनी के लिए भी अपने उत्पादों, लेबलिंग और प्रमोशनल दावों से संबंधित स्पष्टीकरण देने का अवसर रहेगा।
उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब
माता-पिता के लिए इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी भी शिशु पोषण उत्पाद को खरीदते समय पैकेज पर दिए पोषण संबंधी विवरण और आयु-समूह की जानकारी ध्यान से पढ़ी जाए।
किसी उत्पाद पर मौजूद स्वास्थ्य या पोषण संबंधी दावा अपने आप में उसकी चिकित्सकीय उपयुक्तता की गारंटी नहीं होता। शिशु के आहार से जुड़े विशेष मामलों में बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह अधिक उपयुक्त आधार होती है।
आगे क्या होगा
FSSAI की कार्रवाई अब एडजुडिकेशन प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। उत्पादों से जुड़े प्रमोशनल दावों और बायोटिन संबंधी प्रयोगशाला निष्कर्षों की कानूनी स्थिति इसी प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और रिपोर्टेड जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि FSSAI ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ 3 अलग मामलों में कार्रवाई शुरू की है। यह कार्रवाई कथित नियामकीय गैर-अनुपालन पर आधारित है, न कि किसी अंतिम दोषसिद्धि पर।
शिशु पोषण एक संवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए इस मामले में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि उत्पादों के प्रमोशनल दावे और पोषण संबंधी संरचना लागू भारतीय मानकों के अनुरूप थे या नहीं। इसका अंतिम जवाब नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगा।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।