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भारत क्वांटम टेक्नोलॉजी में आगे, National Quantum Mission से बढ़ी रणनीतिक ताकत

Apurva Choudhary 2026-08-10 20:11:15
भारत क्वांटम टेक्नोलॉजी में आगे, National Quantum Mission से बढ़ी रणनीतिक ताकत

भारत की Quantum Technology रणनीति को लेकर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश को दुनिया के अग्रणी देशों में बताया है। National Quantum Mission के तहत भारत ने 1,000 किलोमीटर Secure Quantum Communication का milestone हासिल किया है। अब चुनौती Research को scalable technology, commercial applications और strategic capabilities में बदलने की है।


📍 Location: नई दिल्ली, भारत

📰 Date: 10 अगस्त 2026

✍️ Byline: Apurva Choudhary


भारत क्वांटम टेक्नोलॉजी में क्यों चर्चा में है?

भारत की Quantum Technology क्षमता को लेकर सरकार की ओर से एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत Quantum Technology समेत कई frontier technologies में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ आगे बढ़ रहा है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपने National Quantum Mission को Research से आगे ले जाकर Communication, Computing, Sensing और Industry Applications से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। सरकार की रणनीति का फोकस केवल वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल करने पर नहीं, बल्कि एक ऐसा Quantum Ecosystem तैयार करने पर है जिसमें Research Institutions, Startups और Private Industry की भागीदारी बढ़े।


National Quantum Mission बना भारत की रणनीति का आधार

भारत ने National Quantum Mission को अप्रैल 2023 में मंजूरी दी थी। इस मिशन के लिए 2023-24 से 2030-31 तक ₹6,003.65 करोड़ का प्रावधान किया गया है और इसका उद्देश्य Quantum Technology में Scientific और Industrial Research को बढ़ावा देकर भारत को प्रमुख देशों की कतार में पहुंचाना है।

Mission के तहत Quantum Computing, Quantum Communication, Quantum Sensing और Quantum Materials जैसे क्षेत्रों में क्षमता विकसित करने की योजना है। इसके दीर्घकालिक लक्ष्यों में 50 से 1,000 Physical Qubits वाले Intermediate-Scale Quantum Computers और भारत में 2,000 किलोमीटर तक Secure Quantum Communication Network विकसित करना शामिल है।

यानी भारत की Quantum Strategy सिर्फ एक Laboratory Project नहीं है। इसका मकसद एक व्यापक Research-to-Industry Pipeline तैयार करना है।


1,000 किलोमीटर Secure Quantum Communication का milestone

भारत के Quantum Mission से जुड़ी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में Secure Quantum Communication Network का विस्तार शामिल है। अप्रैल 2026 में सरकार ने बताया था कि मिशन के तहत 1,000 किलोमीटर की Quantum Communication क्षमता का प्रदर्शन किया गया है। यह उपलब्धि मिशन के 2,000 किलोमीटर के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण मानी गई।

इस परियोजना में Quantum Key Distribution यानी QKD जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसका महत्व Cybersecurity के लिहाज से बढ़ जाता है क्योंकि Quantum Communication भविष्य में ऐसे Secure Communication Systems विकसित करने में मदद कर सकती है जिन्हें पारंपरिक तरीकों की तुलना में अलग तरह की सुरक्षा क्षमता हासिल हो।


हालांकि किसी एक milestone को Quantum Technology में पूर्ण तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रमाण मानना सही नहीं होगा। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इन Technologies को कितनी विश्वसनीयता, Scale और लागत-प्रभावशीलता के साथ व्यापक उपयोग में लाया जा सकता है।


Quantum Computing से आगे कई क्षेत्र

Quantum Technology का दायरा केवल Quantum Computers तक सीमित नहीं है। इसके चार प्रमुख क्षेत्रों में Computing, Communication, Sensing और Materials शामिल हैं।

Quantum Computing का संभावित असर ऐसे जटिल Computational Problems पर पड़ सकता है जिन्हें Classical Computers के लिए हल करना बेहद कठिन है। वहीं Quantum Sensing से अत्यधिक संवेदनशील Measurement Systems विकसित किए जा सकते हैं, जिनका उपयोग Defence, Navigation, Healthcare और Scientific Research जैसे क्षेत्रों में संभव है।

Quantum Communication का संबंध Secure Networks और Cybersecurity से है। दूसरी ओर Quantum Materials और Devices भविष्य के Hardware Ecosystem के लिए जरूरी आधार तैयार कर सकते हैं।

यही वजह है कि दुनिया की बड़ी Technology Powers Quantum Technology को Strategic Technology के तौर पर देख रही हैं।


भारत के लिए Security Angle भी अहम

Quantum Technology का महत्व केवल Commercial Innovation तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध National Security से भी जुड़ रहा है।

भविष्य में Quantum Computing मौजूदा Encryption Systems के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती है। इसी वजह से Quantum-Safe Cryptography और Post-Quantum Security पर भी दुनिया भर में Research तेज हो रही है।

भारत ने भी इस दिशा में अपनी नीति को आगे बढ़ाना शुरू किया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2026 में Quantum-Safe Infrastructure और Post-Quantum Cryptography को Long-Term National Security के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

इसका अर्थ यह है कि भारत के लिए Quantum Mission सिर्फ वैज्ञानिक प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। इसके पीछे Cybersecurity, Defence और Strategic Autonomy का भी बड़ा एजेंडा है।


Research से Commercial Technology तक असली चुनौती

भारत ने Quantum Research और Infrastructure में कई कदम उठाए हैं, लेकिन अगली चुनौती कहीं ज्यादा कठिन है। किसी Technology को Laboratory Demonstration से Commercial Product तक पहुंचाने के लिए लगातार Funding, Skilled Talent, Advanced Manufacturing और Industry Partnerships की जरूरत होती है।

मार्च 2026 में सरकार ने National Quantum Mission के तहत 23 Academic Institutions में Quantum Teaching Facilities और Laboratories स्थापित करने की मंजूरी दी थी। 100 अन्य संस्थानों पर भी विचार किया जा रहा था। इसका उद्देश्य Advanced Quantum Technologies में Research और Training को मजबूत करना है।

यह पहल Talent Pipeline के लिहाज से महत्वपूर्ण है। Quantum क्षेत्र में Physicists, Engineers, Computer Scientists और Material Scientists जैसे अलग-अलग विशेषज्ञों की जरूरत होगी।


दुनिया की दौड़ में भारत की वास्तविक स्थिति

डॉ. जितेंद्र सिंह का यह कहना कि भारत Quantum Technology में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है, एक महत्वपूर्ण Policy Statement है। लेकिन Global Competition का आकलन केवल सरकारी घोषणाओं या कुछ उपलब्धियों से नहीं किया जा सकता।

अमेरिका, चीन और यूरोप में Quantum Computing Hardware, Algorithms, Cryogenic Systems, Quantum Networking और Venture Funding पर बड़े स्तर पर काम चल रहा है। ऐसे माहौल में भारत की स्थिति का वास्तविक आकलन Patents, High-Impact Research, Quantum Hardware Performance, Startups, Private Investment और Commercial Deployments जैसे Indicators से होगा।

इसलिए भारत की मौजूदा उपलब्धियों को सकारात्मक प्रगति के तौर पर देखना उचित है, लेकिन उन्हें Global Leadership की अंतिम पुष्टि मानना जल्दबाजी होगी।


Amaravati Quantum Valley से बढ़ेगा Industry Ecosystem

भारत की Quantum Strategy में Regional Innovation Hubs भी उभर रहे हैं। फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के अमरावती में Quantum Valley से जुड़े Infrastructure की आधारशिला रखी गई थी। सरकार ने इसे देश के Quantum Ecosystem को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया था।

ऐसे Centres का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि Quantum Technology में केवल Academic Research पर्याप्त नहीं है। Hardware Development, Testing Facilities, Startups और Industry Collaboration के लिए साझा Infrastructure की जरूरत होती है।

यदि ये Ecosystems सफलतापूर्वक विकसित होते हैं तो भारत में Quantum Research और Commercialisation के बीच की दूरी कम हो सकती है।


क्या Quantum Technology तुरंत बड़ा बदलाव लाएगी?

यहां एक सावधानी जरूरी है। Quantum Technology को लेकर दुनिया भर में बहुत उम्मीदें हैं, लेकिन इसके कई Applications अभी Development Stage में हैं।

Quantum Computers आज के Classical Computers को हर काम में replace करने वाली मशीनें नहीं हैं। उनकी उपयोगिता कुछ विशिष्ट और अत्यधिक जटिल समस्याओं में विकसित होने की उम्मीद है।

इसी तरह Quantum Communication के बड़े Network को व्यापक स्तर पर Deploy करने में Infrastructure, Cost, Interoperability और Security से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए वर्तमान उपलब्धियों को Future Potential के संदर्भ में देखना ज्यादा संतुलित दृष्टिकोण होगा।


भारत के सामने Talent और Investment की चुनौती

Quantum Ecosystem की सफलता के लिए सबसे जरूरी संसाधनों में Skilled Human Capital शामिल है। इस क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करने के लिए Universities, Research Institutions और Industry के बीच मजबूत Collaboration जरूरी होगा।

इसके साथ Private Sector Investment भी महत्वपूर्ण है। सरकारी Funding शुरुआती Research को गति दे सकती है, लेकिन Commercial Quantum Technology के लिए लंबे समय तक Private Capital और Industry Demand की जरूरत होगी।

यही वह मोर्चा है जहां भारत को आने वाले वर्षों में अपनी गति बनाए रखनी होगी।


आगे की दिशा क्या होगी?

भारत की Quantum Strategy अब शुरुआती Policy Phase से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। 1,000 किलोमीटर Secure Quantum Communication का milestone, Academic Quantum Laboratories और नए Innovation Ecosystems इस दिशा में वास्तविक Infrastructure बनने का संकेत देते हैं।

लेकिन अगला चरण ज्यादा कठिन होगा। भारत को Research Achievements को Reliable Hardware, Scalable Networks, Startups और Commercial Applications में बदलना होगा।

अगर यह Transition सफल होता है तो Quantum Technology भारत के Science और Technology Ecosystem के लिए केवल एक Research Domain नहीं रहेगी। यह Cybersecurity, Defence, Healthcare, Communication और Advanced Manufacturing में नई क्षमताओं का आधार बन सकती है।


Quantum Race में भारत की असली परीक्षा अब शुरू

भारत ने Quantum Technology के क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षा स्पष्ट कर दी है। National Quantum Mission ने Funding, Research Infrastructure और Long-Term Targets के जरिए एक Institutional Framework तैयार किया है।

अब असली सवाल यह नहीं है कि भारत ने Quantum Technology में शुरुआत की है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या भारत अपनी Research Capacity को विश्वस्तरीय Hardware, सुरक्षित Networks और Commercial Technology में बदल पाएगा।

यही Transformation आने वाले वर्षों में भारत की Quantum Position तय करेगा। सरकारी दावे और शुरुआती milestones महत्वपूर्ण हैं, लेकिन Global Leadership की असली कसौटी Technology की गुणवत्ता, Scale, Reliability और उसके वास्तविक उपयोग में होगी।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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