संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के भाषण के अगले दिन आतंकवाद पर भारत का रुख दोहराया। जयशंकर ने आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिशों को खारिज किया और कहा कि भारत अपने लोगों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करेगा, जबकि तत्काल सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई।
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📍 New Delhi | 📰 27 September 2026 | ✍️ Apurva Choudhary
भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच UNGA में जयशंकर का जवाब
भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया है। 26 सितंबर को 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के आम विमर्श में बोलते हुए जयशंकर ने बिना पाकिस्तान या प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ का नाम लिए आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिशों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।
जयशंकर की टिप्पणी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के एक दिन पहले दिए गए UNGA भाषण के बाद आई। शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाया, 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का उल्लेख किया और भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के सिंधु जल को रोकने या मोड़ने की कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।
जयशंकर ने आतंकवाद पर क्या कहा
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद शांति के लिए लगातार बना हुआ खतरा है। उन्होंने खास तौर पर ऐसे आतंकवाद का उल्लेख किया, जिसमें सीमा-पार गतिविधियां और कथित राज्य प्रायोजन शामिल हो। उनके मुताबिक ऐसे मामलों में संबंधित सरकारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई जरूरी है।
भारतीय विदेश मंत्री ने अपने भाषण में पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उन्होंने पिछले दिन के वक्ता के संदर्भ में कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से छूट हासिल करने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती। इसके बाद उन्होंने भारत के आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने की बात कही।
जयशंकर ने यह भी कहा कि दोस्ती और सद्भाव आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते। उनके अनुसार आतंकवाद का रास्ता अपनाने वाले पक्ष को अपने तौर-तरीकों में बदलाव करना होगा। इस बयान को भारत की लंबे समय से चली आ रही आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
शहबाज़ शरीफ ने UN में क्या कहा
इससे एक दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने कश्मीर के लिए एक “न्यायसंगत और उचित समाधान” की आवश्यकता बताई और 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का पाकिस्तान के नजरिये से उल्लेख किया।
शरीफ ने सिंधु जल के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को उनका देश “युद्ध की कार्रवाई” मानेगा। यह बयान भारत द्वारा सिंधु जल संधि को अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित रखने के फैसले के संदर्भ में आया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का भी उल्लेख किया और उनके हस्तक्षेप को संघर्ष रोकने में अहम बताया। भारत और पाकिस्तान दोनों ही 2025 के घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग आधिकारिक और राजनीतिक व्याख्याएं रखते हैं।
भारत की तरफ से आतंकवाद को लेकर पुराना रुख
भारत लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद को दोनों देशों के संबंधों में प्रमुख मुद्दा बताता रहा है। नई दिल्ली का आधिकारिक रुख यह रहा है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के मुद्दों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।
जयशंकर के मौजूदा UNGA भाषण में भी आतंकवाद को लेकर यही प्राथमिकता दिखाई दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने, आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वाले तंत्र की जवाबदेही तय करने और आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस बनाए रखने की अपील की।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि जयशंकर का मौजूदा बयान एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया गया कूटनीतिक वक्तव्य था। इसे अपने आप में किसी नई सैन्य कार्रवाई, अभियान या युद्ध की घोषणा के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
भारत-पाकिस्तान संबंधों में कई मुद्दे एक साथ
मौजूदा तनाव सिर्फ आतंकवाद तक सीमित नहीं है। कश्मीर, सीमा सुरक्षा, 2025 का सैन्य टकराव और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के आधिकारिक बयानों में लगातार सामने आते रहे हैं।
शहबाज़ शरीफ के UNGA भाषण में कश्मीर और सिंधु जल का मुद्दा प्रमुख रहा, जबकि जयशंकर ने अपने जवाब में आतंकवाद, सीमा-पार हिंसा और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को प्रमुखता दी। इस तरह दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने-अपने प्रमुख विवादित मुद्दों और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी नजरिये को सामने रखा।
क्या बढ़ सकता है सैन्य तनाव?
जयशंकर के मौजूदा बयान को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें आतंकवाद के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही गई है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में इस बयान के साथ किसी नई भारतीय सैन्य कार्रवाई या युद्ध की घोषणा की पुष्टि नहीं है।
इसलिए फिलहाल घटनाक्रम को मुख्य रूप से कूटनीतिक और राजनीतिक बयानबाजी के स्तर पर देखना जरूरी है। आने वाले दिनों में भारत और पाकिस्तान की सरकारों की आधिकारिक घोषणाएं, कूटनीतिक गतिविधियां और सीमा से जुड़े घटनाक्रम यह तय करेंगे कि तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।
UNGA के मंच से भारत का संदेश
जयशंकर का भाषण ऐसे समय आया है जब दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से संवेदनशील बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के नेताओं के बयानों ने एक बार फिर कश्मीर, आतंकवाद और जल संसाधनों से जुड़े पुराने विवादों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
भारत की ओर से दिया गया मौजूदा संदेश आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, जवाबदेही और आत्मरक्षा के अधिकार पर केंद्रित रहा। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने कश्मीर और सिंधु जल के मुद्दे को प्रमुखता दी। दोनों पक्षों के रुख में अंतर स्पष्ट है और आगे की स्थिति आधिकारिक कूटनीतिक कदमों से ही अधिक स्पष्ट होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे किसी नए भारत-पाकिस्तान युद्ध की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। घटनाक्रम का अगला चरण दोनों देशों की सरकारों के फैसलों और कूटनीतिक संवाद पर निर्भर करेगा।