शहबाज शरीफ के तोशाखाना तोहफों पर चर्चा, पाकिस्तान में क्या बदले नियम?
Wasi Siddiqui
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2026-10-27 15:42:22
पाकिस्तान में तोशाखाना रिकॉर्ड और नए नियम चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के तोहफों की संख्या पर रिपोर्टों में अंतर है, जबकि नीलामी के लिए नई प्रक्रिया तय हुई है।
📍 इस्लामाबाद, पाकिस्तान
🗓️ 27 अक्टूबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
शहबाज के तोहफों पर क्या जानकारी सामने आई?
पाकिस्तान में सार्वजनिक हुए तोशाखाना रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को मिले तोहफों का ब्योरा शामिल है। तोशाखाना सरकारी पद पर रहते हुए मिले तोहफों का रिकॉर्ड रखने वाला सरकारी भंडार है।
उपलब्ध रिपोर्टों में शहबाज को मिले तोहफों की संख्या एक जैसी नहीं है। जुलाई से सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में यह संख्या 34 बताई गई है। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में 28 जुलाई से 9 सितंबर के अलग रिकॉर्ड का जिक्र है। इसलिए 36 तोहफे लौटाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट नहीं है।
तोशाखाना के नए नियम क्या कहते हैं?
पाकिस्तान के कैबिनेट डिवीजन ने सितंबर 2026 में तोशाखाना के प्रबंधन और नियमन से जुड़े नए नियम जारी किए। इनके मुताबिक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को छोड़कर अन्य सार्वजनिक पदाधिकारियों को स्थानीय या विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से तोहफे स्वीकार करने से हतोत्साहित किया गया है।
अगर कूटनीतिक परंपरा या सांस्कृतिक संवेदनशीलता के चलते तोहफा लेने से इनकार संभव न हो, तो उसे घोषित कर तोशाखाना में जमा करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य तौर पर इसके लिए 30 दिन की अवधि तय है। विदेश दौरे में मिले तोहफे के लिए यह अवधि पाकिस्तान वापसी से गिनी जाएगी। अलग से भेजे गए तोहफों के लिए 60 दिन का प्रावधान है।
नीलामी और पारदर्शिता की व्यवस्था
नए नियमों के तहत नीलामी के योग्य तोहफों को खुली नीलामी के जरिए बेचने की व्यवस्था है। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या कूटनीतिक महत्व की वस्तुओं को नीलामी से बाहर रखने का प्रावधान भी है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक तोहफों के मूल्यांकन, आरक्षित मूल्य और नीलामी के अंतिम मूल्य का रिकॉर्ड ऑनलाइन प्रकाशित करने की व्यवस्था है। सार्वजनिक पदाधिकारी और उनके परिवार नीलामी में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
इमरान खान मामले से क्या है ताल्लुक?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ तोशाखाना से जुड़े मामले सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि शहबाज शरीफ ने किसी खास मामले से बचने के इरादे से तोहफे जमा किए। उनके इरादे के बारे में ऐसी बात को तथ्य के तौर पर पेश करना मुनासिब नहीं होगा।
आगे किस जानकारी का इंतजार?
शहबाज शरीफ से जुड़े संबंधित तोहफों की कुल संख्या और अवधि की पुष्टि के लिए मूल सरकारी रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। नए नियमों के तहत कौन से तोहफे नीलामी के लिए चुने जाएंगे और किन्हें अपवाद मिलेगा, इस पर भी नजर रहेगी।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।