जीएसएलवी-एफ१७ की सफल लॉन्चिंग पर पीएम मोदी ने दी बधाई, इसरो की उपलब्धि को बताया गर्व का पल
Mohammad Naved
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2026-09-04 11:05:41
Location
श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश
Date 4/9/2026
By Mohd Naved
जीएसएलवी-एफ१७ मिशन की सफल उड़ान
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए शुक्रवार, ४ सितंबर २०२६ का दिन अहम उपलब्धि लेकर आया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने जीएसएलवी-एफ१७ रॉकेट के जरिए उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-०५ का सफल प्रक्षेपण किया। रॉकेट ने उपग्रह को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की कामयाबी पर इसरो को बधाई दी और इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी संस्थानों के साथ निजी उद्योग की बढ़ती भागीदारी को भी अहम बताया।
तड़के २ बजकर ५५ मिनट पर हुआ प्रक्षेपण
जीएसएलवी-एफ१७ ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। प्रक्षेपण भारतीय समयानुसार सुबह २ बजकर ५५ मिनट पर हुआ। इस मिशन के लिए लगभग २७ घंटे ३० मिनट की उलटी गिनती पूरी की गई थी।
इसरो के मुताबिक जीएसएलवी-एफ१७, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की १९वीं उड़ान है। इस मिशन में चार मीटर व्यास वाले ओगिव कॉम्पोजिट पेलोड फेयरिंग का इस्तेमाल किया गया।
प्रक्षेपण के बाद करीब १८ से १९ मिनट की उड़ान के दौरान रॉकेट ने अपने पेलोड को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाया। ईओएस-०५ को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया। इसके बाद उपग्रह को अपनी अंतिम जियोसिंक्रोनस कक्षा तक पहुंचाने के लिए आगे की कक्षीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ईओएस-०५ क्यों है अहम
ईओएस-०५ को भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट बताया गया है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग के लिए तैयार किया गया है। इसरो के आधिकारिक मिशन विवरण के अनुसार यह अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन अंतरिक्ष यान है।
जियोसिंक्रोनस कक्षा में काम करने वाली ऐसी प्रणाली का प्रमुख महत्व व्यापक और निरंतर पृथ्वी अवलोकन से जुड़ा है। निचली कक्षाओं में मौजूद कई अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट किसी क्षेत्र की तस्वीर अलग-अलग समय पर लेते हैं, जबकि जियोसिंक्रोनस कक्षा से किसी निर्धारित क्षेत्र पर लगातार निगरानी की क्षमता हासिल होती है।
इस क्षमता का इस्तेमाल मौसम और पर्यावरण संबंधी निगरानी, कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी आंकड़े उपलब्ध कराने में हो सकता है। इसरो पहले से ही अपने अर्थ ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम के जरिए कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, वन क्षेत्र, समुद्री संसाधन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए उपग्रह आंकड़े उपलब्ध कराता रहा है।
रॉकेट और मिशन की तकनीकी अहमियत
जीएसएलवी भारत के महत्वपूर्ण प्रक्षेपण यानों में शामिल है। इसरो के अनुसार यह तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है, जिसमें ठोस, द्रव और क्रायोजेनिक तकनीक आधारित चरण शामिल हैं। इसे मुख्य रूप से भारी श्रेणी के उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट तक पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है।
जीएसएलवी-एफ१७ मिशन में रॉकेट ने ईओएस-०५ को सीधे अंतिम जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित करने के बजाय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाया। इसके बाद उपग्रह की अपनी प्रणोदन प्रणाली के जरिए कक्षा को ऊंचा किया जाना मिशन की अगली प्रक्रिया का हिस्सा है।
यह अंतर समझना जरूरी है। प्रक्षेपण के तुरंत बाद उपग्रह का अंतिम परिचालन स्थान हासिल होना और ट्रांसफर ऑर्बिट में सफल इंजेक्शन दो अलग-अलग चरण हैं। जीएसएलवी-एफ१७ ने अपने प्रक्षेपण संबंधी निर्धारित उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
२०२१ की नाकामी के बाद महत्वपूर्ण कामयाबी
जीएसएलवी कार्यक्रम के संदर्भ में ईओएस-०५ मिशन की सफलता का एक और पहलू महत्वपूर्ण है। अगस्त २०२१ में जीएसएलवी-एफ१० के जरिए ईओएस-०३ मिशन को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका था। इसरो के आधिकारिक रिकॉर्ड में उस मिशन को असफल दर्ज किया गया है।
इसके बाद जीएसएलवी की कई उड़ानों में सफलता मिली। जीएसएलवी-एफ१२ और जीएसएलवी-एफ१४ मिशनों ने क्रमशः एनवीएस-०१ और इनसैट-३डीएस जैसे पेलोड को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाया। जुलाई २०२५ में जीएसएलवी-एफ१६ ने निसार मिशन को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था।
इस पृष्ठभूमि में जीएसएलवी-एफ१७ की सफलता रॉकेट प्रणाली की परिचालन विश्वसनीयता के लिए भी अहम मानी जा रही है। हालांकि हर मिशन के तकनीकी परिणाम का आकलन उसके निर्धारित उद्देश्यों और विस्तृत मिशन आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में इसरो की उपलब्धि को शानदार कामयाबी और देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने ईओएस-०५ को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग करने वाला भारत का पहला उपग्रह बताते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री के संदेश में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योग की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख हुआ। यह पहलू भारत की मौजूदा अंतरिक्ष नीति के व्यापक परिदृश्य से जुड़ा है, जहां सरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों और स्टार्टअप की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत के अर्थ ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम के लिए नया चरण
भारत लंबे समय से रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का इस्तेमाल कर रहा है। इसरो के अनुसार भारत के पास दुनिया की बड़ी परिचालन रिमोट सेंसिंग उपग्रह व्यवस्थाओं में से एक है। इनसे मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन तक अनेक क्षेत्रों में किया जाता है।
ईओएस-०५ इसी व्यापक कार्यक्रम में एक अलग तकनीकी क्षमता जोड़ता है। जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग का उद्देश्य बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी से जुड़ा है। इससे ऐसी परिस्थितियों में उपयोगी जानकारी मिलने की उम्मीद है जहां समय पर और बार-बार पृथ्वी अवलोकन जरूरी होता है।
आपदा प्रबंधन इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से बदलते हालात पर निगरानी के लिए उपग्रह आधारित आंकड़े प्रशासनिक एजेंसियों के लिए उपयोगी होते हैं। कृषि क्षेत्र में फसल और भूमि की स्थिति का आकलन तथा पर्यावरणीय निगरानी में भी अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा की भूमिका अहम है।
मिशन के बाद क्या होगा
जीएसएलवी-एफ१७ द्वारा ईओएस-०५ को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किए जाने के बाद अगला चरण उपग्रह की कक्षा बढ़ाने और उसे उसके निर्धारित परिचालन क्षेत्र तक ले जाने से जुड़ा है। इस प्रक्रिया में उपग्रह की प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके बाद उपग्रह के उपकरणों की जांच और परिचालन गतिविधियां आगे बढ़ेंगी। वास्तविक उपयोगिता का आकलन इसके बाद मिलने वाले डेटा और मिशन के परिचालन प्रदर्शन से होगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए व्यापक संदेश
जीएसएलवी-एफ१७ की सफलता केवल एक रॉकेट के सफल प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है। इस मिशन ने भारत की भारी उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता, क्रायोजेनिक तकनीक और जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी अवलोकन की दिशा में एक अहम कदम दर्ज किया है।
इसरो के लिए यह उपलब्धि तकनीकी निरंतरता और मिशन निष्पादन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। वहीं भारत के लिए अर्थ ऑब्जर्वेशन क्षमता का विस्तार कृषि, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में दीर्घकालिक उपयोगिता रखता है।
प्रधानमंत्री की बधाई ने इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया है, लेकिन मिशन की असली अहमियत आने वाले चरण में ईओएस-०५ के सफल कक्षीय संचालन और उससे मिलने वाले आंकड़ों में सामने आएगी।
जीएसएलवी-एफ१७ की सफल उड़ान इसलिए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब निगाहें ईओएस-०५ के कक्षीय संचालन, उपकरणों की सक्रियता और उससे मिलने वाले पृथ्वी अवलोकन डेटा पर रहेंगी
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।