जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा पर उमड़ी भीड़, 3500 किलो मेहंदी का प्रसाद
Wasi Siddiqui
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2026-09-14 13:42:00
📍 जयपुर, राजस्थान 🗓️ 14 सितंबर 2026 ✍️ Wasi Siddiqui
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा पर खास आयोजन
जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में रविवार को सिंजारा और मेहंदी पूजन का आयोजन हुआ। गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले हुए इस धार्मिक कार्यक्रम में भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार किया गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
मंदिर में सिंजारा पर्व के दौरान करीब 3500 किलो मेहंदी भगवान गणेश को अर्पित की गई। आयोजन की तैयारियों के तहत यह मेहंदी राजस्थान के पाली जिले के सोजत से लाई गई थी।
मेहंदी प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं की भीड़
मेहंदी पूजन के बाद इसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। उपलब्ध आयोजन विवरण के मुताबिक रात 7:30 बजे से मंदिर परिसर में पांच स्थानों से मेहंदी प्रसाद बांटने की व्यवस्था की गई थी।
महिलाओं और कन्याओं के लिए मेहंदी वितरण की अलग व्यवस्था रखी गई। आयोजन की लोकप्रियता के कारण प्रसाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की सूचना सामने आई है।
क्या है सिंजारा की परंपरा
गणेश चतुर्थी से पहले सिंजारा पर्व मनाने की परंपरा कई गणेश मंदिरों में दिखाई देती है। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस अवसर पर भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित करने और फिर उसे श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
इस मेहंदी को लेकर श्रद्धालुओं में अलग धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है। कई अविवाहित युवक-युवतियां इसे शुभ मानकर ग्रहण करते हैं। विवाह में बाधाएं दूर होने जैसी मान्यताएं लोक आस्था का हिस्सा हैं। इन्हें धार्मिक विश्वास के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, प्रमाणित वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर नहीं।
विशेष श्रृंगार ने बढ़ाया आयोजन का आकर्षण
सिंजारा के अवसर पर भगवान गणेश को विशेष श्रृंगार कराया गया। आयोजन संबंधी जानकारी के मुताबिक गणेशजी को चांदी के सिंहासन पर विराजमान कराया गया और स्वर्ण मुकुट के साथ विशेष पोशाक पहनाई गई।
भगवान को नौलखा हार भी धारण कराया गया। मंदिर से जुड़े कार्यक्रम विवरण में बताया गया है कि विशेष आभूषणों और पोशाक के साथ गणेशजी का श्रृंगार सिंजारा पर्व का प्रमुख आकर्षण रहा।
गणेशोत्सव का नौ दिवसीय कार्यक्रम
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस वर्ष गणेश चतुर्थी उत्सव 7 सितंबर से शुरू हुआ। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला 15 सितंबर तक निर्धारित है।
उत्सव के दौरान अलग-अलग दिनों में पंचामृत अभिषेक, मोदक झांकी, फल, सब्जी और फूलों की झांकियां तथा संगीत और कथक के कार्यक्रम आयोजित किए गए। 13 सितंबर को मेहंदी पूजन और सिंजारा रखा गया था।
आज गणेश जन्मोत्सव
14 सितंबर को भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। मंदिर में दिनभर अलग-अलग आरती और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निर्धारित है।
उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के मुताबिक जन्मोत्सव के दिन श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक दर्शन की व्यवस्था की गई है। मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक दर्शन का क्रम जारी रहने की जानकारी दी गई है।
भीड़ प्रबंधन पर विशेष फोकस
गणेश जन्मोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन पर जोर दिया है।
व्यवस्था के तहत अलग-अलग प्रवेश और निकास बिंदु, होल्डिंग एरिया और महिलाओं के लिए अलग दर्शन लाइन जैसी व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए भी विशेष परिवहन व्यवस्था की जानकारी सामने आई है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी अहम
बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण के साथ प्रवेश और निकास व्यवस्था अहम होती है। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस बार व्यवस्थाओं को इसी दृष्टिकोण से मजबूत करने की तैयारी की गई है।
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को भीड़ में संयम बनाए रखने और निर्धारित मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का मकसद दर्शन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखना और किसी अप्रिय स्थिति की आशंका को कम करना है।
15 सितंबर को शोभायात्रा
नौ दिवसीय गणेशोत्सव का समापन 15 सितंबर को प्रस्तावित शोभायात्रा के साथ होगा। मंदिर से गणेशजी की शोभायात्रा निकाली जाएगी और शहर के कई प्रमुख मार्गों से संबंधित यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जाना है।
इस दौरान एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड जैसे इलाकों में यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान रहेगा।
आस्था के साथ व्यवस्था की चुनौती
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का सिंजारा आयोजन धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा से जुड़ा है। 3500 किलो मेहंदी का आयोजन और उसके प्रसाद वितरण ने इस पर्व को व्यापक आकर्षण दिया है।
हालांकि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ का सुरक्षित प्रबंधन उतना ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने प्रवेश, निकास, यातायात, पेयजल और आपातकालीन सहायता जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।
आगे क्या
14 सितंबर को गणेश जन्मोत्सव के बाद 15 सितंबर को शोभायात्रा के साथ इस वर्ष के प्रमुख आयोजनों का समापन होगा। सिंजारा पर्व में उमड़ी भीड़ के बाद जन्मोत्सव के दिन भी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का यह आयोजन जयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। सिंजारा की मेहंदी, विशेष श्रृंगार और प्रसाद वितरण के जरिए यहां की परंपरा हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को जोड़ती है।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।