India
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 बना पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती, पूर्व एयर मार्शल का अहम दावा
Mohammad Naved
•
2026-09-14 13:17:41
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की वायु रक्षा व्यवस्था में S-400 की भूमिका पर पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने अहम जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक पाकिस्तान ने इसकी तैनाती का पता लगाने के लिए खुफिया कोशिशें की थीं और भारतीय सीमा के करीब आने से अपने लड़ाकू विमानों को रोका।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 14 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका चर्चा में
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के दौरान भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी थी। अब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाल चुके सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने S-400 प्रणाली की भूमिका को लेकर कई अहम दावे किए हैं।
एयर मार्शल मिश्रा ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक हालिया साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान के लिए भारत की S-400 प्रणाली बड़ी चुनौती बन गई थी। उनके अनुसार, इसकी तैनाती और लोकेशन का पता लगाने के लिए पाकिस्तान ने अलग-अलग खुफिया तरीकों का सहारा लेने की कोशिश की।
पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को लेकर क्या दावा है
मिश्रा के मुताबिक, S-400 की मौजूदगी के कारण पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा से करीब 200 किलोमीटर के दायरे में आने से बच रहे थे। उनका कहना था कि पाकिस्तान के हवाई अभियानों के लिए यह प्रणाली एक गंभीर चुनौती बन गई थी।
यह बयान एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी का आकलन है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए सभी परिचालन रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इस दावे को आधिकारिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
S-400 की लोकेशन तलाशने का दावा
एयर मार्शल मिश्रा ने दावा किया कि पाकिस्तान S-400 की वास्तविक तैनाती का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा था। उनके अनुसार, भारत के भीतर मौजूद संभावित जासूसी नेटवर्क और स्लीपर सेल को भी सक्रिय करने की कोशिश की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों से उपग्रह आधारित खुफिया सहायता मिलने की जानकारी थी। हालांकि, उन्होंने किसी देश का नाम सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया।
इस दावे की भी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे मिश्रा के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत की वायु रक्षा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों के प्रयासों की जानकारी भारत के रक्षा मंत्रालय ने सार्वजनिक की थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 7 और 8 मई 2025 की रात पाकिस्तान ने उत्तर और पश्चिम भारत में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का प्रयास किया था।
भारत सरकार ने कहा था कि इन हवाई खतरों को एकीकृत काउंटर ड्रोन ग्रिड और वायु रक्षा प्रणालियों के जरिये निष्क्रिय किया गया। सरकारी विवरण में कई स्थानों का उल्लेख किया गया था, जिनमें श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़ और भुज शामिल थे।
सरकार ने S-400 को भी बताया अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2025 में आदमपुर वायुसेना स्टेशन पर सैनिकों और वायु योद्धाओं से बातचीत के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में विभिन्न वायु रक्षा प्रणालियों के तालमेल का उल्लेख किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों के साथ स्वदेशी आकाश और आधुनिक S-400 जैसी प्रणालियों ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से कई प्रयासों के बावजूद भारतीय वायुसेना के ठिकाने और महत्वपूर्ण रक्षा ढांचा सुरक्षित रहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायु रक्षा व्यवस्था में S-400 की भूमिका का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि पारंपरिक प्रणालियों के साथ आकाश और S-400 जैसे आधुनिक सिस्टम ने भारतीय सुरक्षा कवच को मजबूती दी।
ऑपरेशन सिंदूर का व्यापक संदर्भ
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। भारत सरकार के मुताबिक, यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी।
भारत के रक्षा मंत्रालय ने 7 मई को कहा था कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे से जुड़े 9 ठिकानों को निशाना बनाया। सरकार ने इसे केंद्रित और सीमित सैन्य कार्रवाई बताया था।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिशों की जानकारी सामने आई। भारत ने 8 मई को कहा था कि उसने पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को निष्क्रिय किया और बाद में पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियों के खिलाफ कार्रवाई की।
S-400 क्यों महत्वपूर्ण है
S-400 एक लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा प्रणाली है। इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों का पता लगाना, उन्हें ट्रैक करना और उपयुक्त इंटरसेप्टर के जरिए उन्हें रोकना है।
युद्ध के दौरान ऐसी प्रणाली का महत्व केवल मिसाइल दागने तक सीमित नहीं रहता। इसकी मौजूदगी विरोधी पक्ष की हवाई रणनीति, उड़ान मार्ग और जोखिम आकलन को प्रभावित कर सकती है।
इसी संदर्भ में एयर मार्शल मिश्रा का 200 किलोमीटर वाला आकलन सामने आया है। हालांकि, इस दूरी को S-400 की सार्वभौमिक परिचालन सीमा या हर परिस्थिति में लागू होने वाला नियम समझना सही नहीं होगा। वास्तविक प्रभाव सेंसर, मिसाइल, लक्ष्य, ऊंचाई, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और परिचालन परिस्थिति सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
दावे और पुष्ट तथ्य अलग रखना जरूरी
ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कई तरह के दावे सामने आए हैं। ऐसे में आधिकारिक रिकॉर्ड और सैन्य अधिकारियों के व्यक्तिगत आकलन के बीच फर्क रखना जरूरी है।
भारत सरकार ने S-400 की भूमिका को आधिकारिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। वहीं पाकिस्तान द्वारा भारत के भीतर जासूसों या स्लीपर सेल को S-400 की लोकेशन पता करने के लिए सक्रिय किए जाने का विशिष्ट दावा एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने किया है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी दस्तावेज इस विशेष दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।
इसी तरह किसी विशेष पाकिस्तानी विमान को S-400 द्वारा किस दूरी से निशाना बनाया गया, इसका विवरण भी अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आया है। ऐसे दावों को आधिकारिक परिचालन रिकॉर्ड के बिना अंतिम तथ्य के रूप में पेश करने से बचना जरूरी है।
भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा
ऑपरेशन सिंदूर ने एक और अहम पहलू सामने रखा। आधुनिक संघर्ष में किसी एक हथियार प्रणाली पर निर्भरता पर्याप्त नहीं होती।
भारत ने ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग वायु रक्षा प्रणालियों, रडार, काउंटर ड्रोन क्षमताओं और कमांड नेटवर्क के इस्तेमाल की जानकारी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने आकाश सहित कई प्रणालियों के प्रदर्शन का उल्लेख किया।
इससे स्पष्ट होता है कि भारत की वायु सुरक्षा रणनीति एक बहुस्तरीय ढांचे पर आधारित है। S-400 इस ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पूरी व्यवस्था का अकेला आधार नहीं है।
आगे क्या मायने रखता है
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आ रही सैन्य जानकारियां भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य की हवाई रणनीति को समझने में महत्वपूर्ण हैं। लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियां अब किसी भी संभावित सैन्य अभियान की योजना में बड़ा कारक बन चुकी हैं।
S-400 की तैनाती ने भारत को लंबी दूरी की हवाई निगरानी और अवरोधन क्षमता दी है। दूसरी ओर, ऐसे सिस्टम की मौजूदगी विरोधी पक्ष को रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन और स्टैंड-ऑफ हथियारों के जरिए नई रणनीति विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका को भारत सरकार ने महत्वपूर्ण बताया है और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने इसे पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बताया है। उनकी ओर से पाकिस्तान द्वारा इसकी लोकेशन तलाशने के लिए खुफिया प्रयासों का दावा भी सामने आया है।
हालांकि, इन दावों के कुछ हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस पूरे मामले को समझने के लिए आधिकारिक बयानों, सैन्य रिकॉर्ड और स्वतंत्र सत्यापन को प्राथमिकता देना जरूरी है। ऑपरेशन सिंदूर का सबसे महत्वपूर्ण सबक यही है कि आधुनिक वायु सुरक्षा केवल एक मिसाइल प्रणाली पर नहीं, बल्कि सेंसर, कमांड नेटवर्क, इंटरसेप्टर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और प्रशिक्षित सैन्य बलों के संयुक्त इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।