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कलैंड तेल परियोजना पर अर्जेंटीना की अदालत का रोक आदेश, ब्रिटेन से बढ़ा विवाद
Harish Qureshi
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2026-09-17 13:07:32
अर्जेंटीना की संघीय जज मेरियल बोरुतो ने फ़ॉकलैंड द्वीपों के पास सी लायन तेल परियोजना पर अंतरिम रोक लगाई है। आदेश में ड्रिलिंग, समुद्री ढांचे और तेल उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां पर्यावरणीय आकलन तक रोकने को कहा गया है।
ब्यूनस आयर्स | 17 सितंबर 2026
By Mohd Haris
फ़ॉकलैंड के पास तेल परियोजना पर अदालत का बड़ा आदेश
अर्जेंटीना की एक संघीय अदालत ने फ़ॉकलैंड द्वीपों के पास विकसित की जा रही सी लायन तेल परियोजना पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है। यह परियोजना ब्रिटेन की रॉकहॉपर एक्सप्लोरेशन और इज़राइल की नवितास पेट्रोलियम से जुड़ी है।
रियो ग्रांडे स्थित संघीय अदालत की जज मेरियल बोरुतो ने अंतरिम आदेश में दोनों कंपनियों को परियोजना से संबंधित ड्रिलिंग, समुद्री ढांचे की स्थापना और हाइड्रोकार्बन के व्यावसायिक उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को रोकने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा है कि रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक संबंधित अर्जेंटीनी पर्यावरण प्राधिकरण के सामने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और उस पर निर्णय नहीं हो जाता, या अदालत खुद इस आदेश में बदलाव नहीं करती।
220 किलोमीटर दूर है सी लायन परियोजना
सी लायन तेल क्षेत्र फ़ॉकलैंड द्वीपों से लगभग 220 किलोमीटर उत्तर में दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में स्थित है। अर्जेंटीना इन द्वीपों को माल्विनास कहता है और उन पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है, जबकि ब्रिटेन फ़ॉकलैंड द्वीपों का प्रशासन करता है और अर्जेंटीना के दावे को स्वीकार नहीं करता।
यही वजह है कि तेल परियोजना सिर्फ ऊर्जा और कारोबारी मामला नहीं है। इसके साथ दशकों पुराने क्षेत्रीय और संप्रभुता विवाद का पहलू भी जुड़ा हुआ है।
किन गतिविधियों पर लगाई गई रोक?
अदालत के आदेश का दायरा सिर्फ तेल की ड्रिलिंग तक सीमित नहीं है। इसमें समुद्र तल या उसके नीचे हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन के लिए ड्रिलिंग, स्थायी समुद्री ढांचे, पाइपलाइन और फ्लोलाइन सिस्टम, नियंत्रण और इंजेक्शन सिस्टम तथा उत्पादन से जुड़े स्थायी ढांचों पर रोक शामिल है।
इसके अलावा फ्लोटिंग प्रोडक्शन, स्टोरेज एंड ऑफलोडिंग यूनिट यानी एफपीएसओ की स्थापना और व्यावसायिक तेल उत्पादन शुरू करने पर भी रोक लगाई गई है। परियोजना को सहयोग देने वाले तटीय और बंदरगाह संबंधी निर्माण कार्य भी आदेश के दायरे में हैं।
अदालत ने कंपनियों से परियोजना की मौजूदा स्थिति, ठेकेदारों, वित्तपोषण और अन्य संबंधित जानकारियां भी मांगी हैं। पक्षों को यह जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है।
पर्यावरणीय चिंता बनी फैसले की वजह
यह आदेश एक पर्यावरणीय मुकदमे के दौरान आया है। मामला 1982 के फ़ॉकलैंड युद्ध के पूर्व सैनिकों के संगठन सीईसीआईएम और पर्यावरणीय वकीलों के संगठन की याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ताओं ने समुद्री पारिस्थितिकी पर संभावित असर का हवाला देते हुए परियोजना को रोकने की मांग की थी। उनके तर्क में ड्रिलिंग, रासायनिक प्रदूषण, समुद्री यातायात, पानी के भीतर होने वाला शोर और संभावित तेल रिसाव जैसे जोखिम शामिल हैं।
जज बोरुतो ने अपने अंतरिम आदेश में पर्यावरणीय सावधानी और रोकथाम के सिद्धांतों को महत्व दिया। अदालत ने यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया कि परियोजना निश्चित रूप से पर्यावरणीय नुकसान करेगी। मुख्य सवाल यह था कि संभावित प्रभावों का आकलन किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है या नहीं।
अर्जेंटीना के लिए क्यों अहम है यह मामला?
अर्जेंटीना लंबे समय से फ़ॉकलैंड द्वीपों पर अपनी संप्रभुता का दावा करता रहा है। राष्ट्रपति जेवियर मिलेई की सरकार ने हाल के दिनों में इस दावे को लेकर कूटनीतिक और कानूनी गतिविधियां तेज की हैं।
अर्जेंटीनी सरकार का तर्क है कि द्वीपों के आसपास तेल और गैस संसाधनों का एकतरफा दोहन विवादित क्षेत्र की स्थिति को प्रभावित करता है। सरकार ने तेल परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और संभावित कड़े प्रतिबंधों की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
अर्जेंटीना ने यह भी कहा है कि तेल परियोजनाएं उस संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था की भावना के विपरीत हैं, जिसके तहत दोनों पक्षों से विवाद के समाधान तक एकतरफा कार्रवाई से बचने की अपील की गई है।
ब्रिटेन का रुख क्या है?
ब्रिटेन अर्जेंटीनी अदालतों के इस अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि अर्जेंटीना का घरेलू कानून फ़ॉकलैंड द्वीपों में लागू नहीं होता और द्वीपों में आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार स्थानीय प्रशासन के पास है।
ब्रिटेन ने कारोबारी गतिविधियों से जुड़े पक्षों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश भी की है कि वह फ़ॉकलैंड द्वीपों में वैध आर्थिक गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के विकास का समर्थन करता है।
इस लिहाज से अर्जेंटीनी अदालत का आदेश और ब्रिटिश सरकार का रुख एक-दूसरे से बिल्कुल अलग कानूनी दृष्टिकोण को दिखाता है।
1982 का युद्ध फिर बना पृष्ठभूमि
फ़ॉकलैंड विवाद का इतिहास बेहद संवेदनशील है। 1982 में अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच 10 सप्ताह तक युद्ध हुआ था। अर्जेंटीनी सेना ने द्वीपों पर कब्जा किया था, जिसके बाद ब्रिटेन ने सैन्य कार्रवाई कर नियंत्रण वापस हासिल किया।
युद्ध में 649 अर्जेंटीनी और 255 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई थी। तीन फ़ॉकलैंड द्वीपवासियों की भी जान गई थी।
चार दशक से ज्यादा समय बाद भी संप्रभुता का विवाद खत्म नहीं हुआ है। अब समुद्री तेल और गैस संसाधनों ने इस पुराने विवाद में एक नया आर्थिक आयाम जोड़ दिया है।
द्वीपों के लोगों का रुख भी महत्वपूर्ण
ब्रिटेन अपने रुख के समर्थन में फ़ॉकलैंड द्वीपों के निवासियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का हवाला देता है। 2013 में कराए गए जनमत संग्रह में भारी बहुमत से द्वीपवासियों ने ब्रिटेन के साथ बने रहने का समर्थन किया था।
अर्जेंटीना इस जनमत संग्रह के परिणाम को अपनी संप्रभुता के दावे का निर्णायक आधार नहीं मानता। उसका तर्क है कि मौजूदा आबादी के संदर्भ में आत्मनिर्णय का सिद्धांत इस विवाद पर उसी तरह लागू नहीं होता, जैसा ब्रिटेन मानता है।
इसलिए फ़ॉकलैंड विवाद में तीन अलग-अलग आयाम दिखाई देते हैं, अर्जेंटीना की संप्रभुता का दावा, ब्रिटेन का प्रशासनिक नियंत्रण और द्वीपवासियों के आत्मनिर्णय का सवाल।
क्या अदालत का आदेश वास्तव में तेल परियोजना रोक देगा?
यहीं इस फैसले का सबसे अहम व्यावहारिक पहलू सामने आता है। अर्जेंटीनी अदालत ने अपनी न्यायिक सीमा के भीतर रोक का आदेश दिया है, लेकिन इस आदेश को फ़ॉकलैंड क्षेत्र में लागू कराना अलग चुनौती है।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक जज ने भी माना है कि आदेश का वास्तविक क्रियान्वयन अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संबंधित कंपनियों के आचरण पर निर्भर करेगा। कंपनियों ने पहले संकेत दिया है कि वे परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखना चाहती हैं।
रॉकहॉपर और नवितास का कहना है कि परियोजना के लिए उनके पास फ़ॉकलैंड द्वीप प्रशासन से वैध लाइसेंस हैं। ब्रिटेन भी अर्जेंटीना के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता।
इसलिए अदालत का आदेश कानूनी और राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके कारण परियोजना का वास्तविक भविष्य अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।
2028 में तेल उत्पादन की योजना
सी लायन परियोजना को लेकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य 2028 बताया गया है। परियोजना आगे बढ़ने की स्थिति में फ़ॉकलैंड द्वीपों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है, जो लंबे समय से मत्स्य कारोबार पर काफी निर्भर रही है।
वहीं अर्जेंटीना के लिए यह परियोजना उसके संप्रभुता दावे से जुड़े प्राकृतिक संसाधनों का सवाल है। इसलिए तेल उत्पादन की योजना केवल ऊर्जा बाजार से जुड़ी खबर नहीं है, बल्कि इसका असर अर्जेंटीना-ब्रिटेन संबंधों पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अब मामले में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सबसे महत्वपूर्ण चरण बन गया है। अदालत ने कंपनियों से परियोजना की तकनीकी और वित्तीय स्थिति से जुड़ी जानकारी मांगी है और पर्यावरणीय प्रक्रिया पूरी होने तक अंतरिम रोक जारी रखने का प्रावधान किया है।
इसके साथ ही ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच कानूनी और कूटनीतिक तनातनी बढ़ सकती है। अर्जेंटीना की सरकार पहले ही तेल कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कदम उठाने और प्रतिबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
फ़िलहाल अदालत का आदेश सी लायन परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी बाधा है। लेकिन इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित कंपनियां, फ़ॉकलैंड प्रशासन, ब्रिटेन और अर्जेंटीना आगे किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
निष्कर्ष
फ़ॉकलैंड के पास सी लायन तेल परियोजना पर अर्जेंटीनी अदालत की रोक ने एक पुराने क्षेत्रीय विवाद को फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। अदालत का तत्काल आधार पर्यावरणीय प्रभाव आकलन है, जबकि व्यापक पृष्ठभूमि अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच संप्रभुता विवाद से जुड़ी है।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस आदेश से तेल परियोजना स्थायी रूप से रुक गई है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ड्रिलिंग, समुद्री बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों पर अंतरिम रोक लग गई है और अगला बड़ा चरण पर्यावरणीय समीक्षा तथा दोनों देशों की कानूनी और कूटनीतिक प्रतिक्रिया होगी।
Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।