महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कांग्रेस ने छात्र आंदोलन के समर्थन में कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गई। यह घटनाक्रम शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है।
📍 स्थान: कोल्हापुर, महाराष्ट्र
📰 तिथि: 25 जुलाई 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
कोल्हापुर में छात्रों के समर्थन में कांग्रेस का कैंडल मार्च, जवाबदेही की मांग हुई तेज
छात्र आंदोलन के समर्थन में सड़क पर उतरी कांग्रेस
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शनिवार शाम जिला कांग्रेस समिति ने छात्र आंदोलन के समर्थन में कैंडल मार्च आयोजित किया। यह मार्च दिल्ली में चल रहे छात्र प्रदर्शनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर बढ़ती राजनीतिक बहस के बीच निकाला गया। बड़ी संख्या में छात्र, कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
सतेज पाटिल के नेतृत्व में निकला मार्च
राज्य विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता और कोल्हापुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतेज पाटिल के नेतृत्व में कार्यकर्ता राजारामपुरी क्षेत्र में एकत्र हुए। वहां से सभी प्रतिभागी हाथों में मोमबत्तियां लेकर साइबर कॉलेज परिसर तक शांतिपूर्ण मार्च करते हुए पहुंचे।
पेपर लीक मामलों पर चिंता
मार्च के दौरान वक्ताओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आए पेपर लीक मामलों पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ऐसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करती हैं।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर उठे सवाल
साइबर कॉलेज परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की समीक्षा करने और उन्हें वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
सरकार पर लगाए आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक और पुलिस तंत्र का उपयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया इस समाचार के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं हो सकी।
शिक्षा व्यवस्था पर बहस जारी
पेपर लीक से जुड़े मामलों ने हाल के समय में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार, सख्त कानूनी कार्रवाई और संस्थागत जवाबदेही से ही छात्रों का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
आगे की राह
छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की गतिविधियां आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है। यदि विभिन्न पक्षों के बीच संवाद बढ़ता है, तो शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय सामने आ सकते हैं। वहीं सरकार की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर भी सभी की नजर बनी रहेगी।
कोल्हापुर का यह कैंडल मार्च केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की चिंताओं और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर चल रही राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनकर सामने आया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष इन मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।