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कर्नाटक SIR में नंदन नीलेकणि और निखिल कामथ के नाम ‘अनमैप्ड’ रिकॉर्ड में, चुनावी डेटा की जांच तेज

Mohammad Naved • 2026-09-10 11:41:08
कर्नाटक SIR में नंदन नीलेकणि और निखिल कामथ के नाम ‘अनमैप्ड’ रिकॉर्ड में, चुनावी डेटा की जांच तेज

कर्नाटक SIR में नंदन नीलेकणि, निखिल कामथ और शिवराजकुमार समेत कई प्रमुख नाम पुराने चुनावी रिकॉर्ड से मैप नहीं हो पाए। मामला रिकॉर्ड सत्यापन से जुड़ा है।


📍 बेंगलुरु 🗓️ 10 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved

कर्नाटक SIR में बड़े नामों के रिकॉर्ड की जांच

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कई चर्चित नाम चुनावी रिकॉर्ड में सामने आई विसंगतियों के कारण जांच के दायरे में आए हैं। इनमें इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि, जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ और कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार का नाम शामिल है।

यह मामला मतदाता की पात्रता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पुराने चुनावी डेटाबेस और मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड के बीच जरूरी मिलान नहीं होने या नाम संबंधी अंतर के कारण सिस्टम में विसंगति दर्ज हुई है।

नंदन नीलेकणि का रिकॉर्ड ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में

रिपोर्टों के अनुसार नंदन नीलेकणि और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में दर्ज हुए हैं। इसका संबंध इस बात से है कि मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को 2002 के पुराने चुनावी रिकॉर्ड से अपेक्षित तरीके से जोड़ा नहीं जा सका।

बेंगलुरु के संबंधित चुनावी अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे मामलों में रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। उपलब्ध जानकारी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सिस्टम से नोटिस जनरेट होना अपने आप में किसी मतदाता को अयोग्य घोषित करने या उसका नाम मतदाता सूची से हटाने का फैसला नहीं है।

निखिल और नितिन कामथ के रिकॉर्ड में भी अंतर

जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ और नितिन कामथ के नाम भी कर्नाटक की SIR प्रक्रिया में सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनके मामले में माता-पिता के नाम से जुड़े रिकॉर्ड में अंतर दर्ज किया गया है।

यह अंतर पुराने और मौजूदा चुनावी डेटा के मिलान की प्रक्रिया में सामने आया। चुनाव अधिकारियों की प्रक्रिया का मकसद ऐसे रिकॉर्ड की जांच करके अंतिम मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।

अभिनेता शिवराजकुमार का रिकॉर्ड भी जांच में

कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार का नाम भी SIR के दौरान सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार उनका रिकॉर्ड पुराने 2002 के चुनावी डेटाबेस से अपेक्षित तरीके से मैप नहीं हुआ था और सिस्टम ने सुनवाई से संबंधित प्रक्रिया शुरू की।

हालांकि, उनके मामले में अधिकारियों ने घर पर जाकर सत्यापन किया। उन्हें जरूरी दस्तावेजों के साथ कार्यालय में आने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

CNR राव को नोटिस दिए जाने की खबर पर स्पष्टीकरण

भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक प्रोफेसर CNR राव का नाम भी रिकॉर्ड में अंतर के कारण चर्चा में आया। हालांकि, बेंगलुरु के चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें SIR के तहत नोटिस जारी नहीं किया गया था।

अधिकारियों के अनुसार पुराने 2002 के रिकॉर्ड में उनके नाम की प्रविष्टि मौजूदा रिकॉर्ड से अलग थी। बूथ लेवल अधिकारी ने रिकॉर्ड की जांच के बाद उनके नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने की सिफारिश की।

43.81 लाख से ज्यादा मतदाताओं के रिकॉर्ड की प्रक्रिया

कर्नाटक में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां चिह्नित की गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लगभग 43.81 लाख नोटिस जनरेट किए गए हैं। इनमें पुराने चुनावी डेटा से मैपिंग न होना, नाम या अन्य विवरण में अंतर जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

4 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 7.32 लाख नोटिस वितरित किए जा चुके थे, जबकि बड़ी संख्या में नोटिस वितरण की प्रक्रिया बाकी थी। सुनवाई की प्रक्रिया 3 सितंबर से शुरू हुई थी।

SIR में ‘अनमैप्ड’ का मतलब क्या है

‘अनमैप्ड’ शब्द को मतदाता का नाम गलत या अवैध होने के अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका मुख्य संदर्भ मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पुराने SIR डेटाबेस से जोड़ने में सामने आई समस्या से है।

पुराने रिकॉर्ड में नाम, माता-पिता के नाम, पते या वर्तनी की अलग प्रविष्टि होने से डिजिटल मिलान प्रभावित हो सकता है। चुनावी डेटा के पुराने और नए प्रारूप में अंतर भी ऐसी विसंगतियों का कारण बन सकता है।

रिकॉर्ड में अंतर और मतदाता की पात्रता अलग मुद्दे

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि चुनावी रिकॉर्ड में विसंगति और मतदाता की कानूनी पात्रता दो अलग मुद्दे हैं।

किसी नाम का SIR की विसंगति सूची में आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति फर्जी मतदाता है या उसका नाम हटाया जाएगा। अंतिम निर्णय दस्तावेजों, सत्यापन और चुनावी नियमों के तहत तय प्रक्रिया के बाद होता है।

चुनावी सूची की शुद्धता पर SIR का असर

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज सूचनाओं का पुनरीक्षण करना है। इसके दौरान पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा डेटा का मिलान किया जा रहा है।

कर्नाटक में सामने आए चर्चित मामलों ने इस प्रक्रिया की तकनीकी और प्रशासनिक जटिलताओं को भी सामने रखा है। खासकर पुराने कागजी रिकॉर्ड, डिजिटाइजेशन, नामों की वर्तनी और पारिवारिक विवरण के बीच अंतर से कई मतदाताओं को सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

मतदाताओं के लिए आगे क्या

भारत निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर SIR से जुड़े कई विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें अंतिम SIR में नाम खोजने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और मतदाता सूची से संबंधित सेवाओं का इस्तेमाल करने की सुविधा शामिल है।

कर्नाटक में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी जारी है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।

इसलिए फिलहाल इन चर्चित नामों को लेकर सबसे अहम बात यह है कि रिकॉर्ड में दर्ज विसंगति को अंतिम फैसला न माना जाए। चुनावी प्रक्रिया में दस्तावेजी सत्यापन और अंतिम सूची का प्रकाशन ही स्थिति को स्पष्ट करेगा।


कर्नाटक SIR में नंदन नीलेकणि, निखिल कामथ और शिवराजकुमार जैसे चर्चित नामों का सामने आना इस प्रक्रिया की व्यापकता को दिखाता है। लेकिन इसे मतदाता अयोग्यता या नाम हटाने के अंतिम फैसले के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

मामला फिलहाल चुनावी रिकॉर्ड के मिलान और सत्यापन से जुड़ा है। अंतिम तस्वीर दावे, आपत्तियों, दस्तावेजी जांच और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही स्पष्ट होगी।

वीडियो देखें

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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