Politics
पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब, राजनीतिक बदले का आरोप
Mohammad Naved
•
2026-09-03 11:13:53
पंजाब की एसआईआर ड्राफ्ट मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम नहीं है। चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि आप ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
📍 पंजाब
🗓️ 03 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब, आप पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप
पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम एसआईआर के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है। रिकॉर्ड में उनकी प्रविष्टि को ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ श्रेणी में रखा गया है।
चड्ढा ने इस कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका मतदाता पंजीकरण मोहाली में है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और इसमें राज्य सरकार की भूमिका नहीं है।
ड्राफ्ट सूची में क्या हुआ
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के तहत पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार की गई है। राघव चड्ढा का नाम सामान्य मतदाता सूची में नहीं मिला। उनका नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट यानी एएसडीडी श्रेणी वाली सूची में दर्ज किया गया है। उनके नाम के सामने ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ स्थिति दर्ज है।
यह स्थिति अभी अंतिम फैसला नहीं है। ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया रहती है। चुनाव आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार और आपत्ति से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं।
इसलिए राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट सूची से हटना अपने आप में उनकी स्थायी मतदाता स्थिति समाप्त होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
चड्ढा ने क्या आरोप लगाया
राघव चड्ढा ने इस मामले को राजनीतिक बदले से जोड़ते हुए आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि वह पंजाब से राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं और उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है। ऐसे में उनके नाम के सामने स्थानांतरित दर्ज किया जाना सवाल खड़े करता है।
चड्ढा ने दावा किया कि यह केवल किसी कर्मचारी की सामान्य गलती नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि अधिकारियों पर सरकार के तबादले और पोस्टिंग से जुड़े प्रभाव का दबाव रहता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
चड्ढा ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई की जा रही है। अप्रैल 2026 में चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हुए थे।
आप का जवाब क्या है
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और पंजाब सरकार इस प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करती।
आप की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि यदि चड्ढा अब दिल्ली में रहते हैं, तो पंजाब की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण बनाए रखने या उसे दूसरी जगह स्थानांतरित कराने की जिम्मेदारी उनकी है।
इस तरह विवाद का मूल सवाल केवल चड्ढा का नाम हटना नहीं है। असली सवाल यह है कि उनकी प्रविष्टि को ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ किस आधार पर दर्ज किया गया और इस वर्गीकरण की प्रशासनिक प्रक्रिया क्या रही।
एसआईआर क्या है
एसआईआर यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की व्यापक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को दोबारा सत्यापित करना और पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को दुरुस्त करना है।
इस प्रक्रिया में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच होती है। स्थान बदल चुके मतदाता, मृत मतदाता, डुप्लिकेट प्रविष्टियां और अन्य कारणों से अनुपलब्ध मतदाताओं के नामों की पहचान की जाती है।
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर एसआईआर 2026 के लिए मतदाता सूची खोजने, ड्राफ्ट सूची डाउनलोड करने, आवेदन की स्थिति देखने और शिकायत दर्ज कराने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पंजाब में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए
राघव चड्ढा का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पंजाब में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता प्रविष्टियों को ड्राफ्ट सूची से हटाया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब में लगभग 20.66 लाख नाम एएसडीडी सूची में शामिल किए गए हैं। यह संख्या राज्य की पिछली मतदाता सूची के करीब 9.7 प्रतिशत के बराबर बताई गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी एसआईआर के विभिन्न चरणों में बड़ी संख्या में मतदाता प्रविष्टियों की समीक्षा की गई है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में एसआईआर का कार्यक्रम और समयसीमा अलग है।
इस व्यापक प्रक्रिया के बीच किसी प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
ड्राफ्ट और अंतिम सूची में फर्क
इस विवाद को समझने के लिए ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची के बीच अंतर समझना जरूरी है।
ड्राफ्ट सूची प्रारंभिक रिकॉर्ड होता है। इसके प्रकाशन के बाद पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलता है। चुनाव अधिकारी संबंधित दावों की जांच के बाद आवश्यक सुधार करते हैं।
चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और विवरण सुधारने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं।
इसलिए चड्ढा के मामले में भी अंतिम स्थिति दावे, आपत्ति और प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
राज्य सरकार और चुनाव आयोग की भूमिका
यहां एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहलू भी है। मतदाता सूची तैयार करने और उसके पुनरीक्षण की संवैधानिक जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। चुनाव आयोग स्वयं एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण है, जो लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया का संचालन करता है।
हालांकि मतदाता सूची से जुड़े जमीनी काम में बूथ स्तर के अधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं। इसी प्रशासनिक ढांचे को लेकर चड्ढा ने सवाल उठाए हैं।
दूसरी तरफ आप का तर्क है कि अधिकारियों की भागीदारी को सीधे राज्य सरकार के राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह अंतर इस पूरे विवाद का अहम हिस्सा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम
राघव चड्ढा लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे। 2022 में वह आप के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। अप्रैल 2026 में वह उन 7 सांसदों में शामिल रहे, जिन्होंने भाजपा का दामन थामा।
दल बदल के बाद पंजाब में उनके राजनीतिक संबंध बदल गए। ऐसे माहौल में मतदाता सूची से उनका नाम हटना राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर रहा है।
फिर भी किसी प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक साजिश घोषित करने के लिए ठोस दस्तावेजी या जांच संबंधी प्रमाण जरूरी होंगे। फिलहाल चड्ढा ने आरोप लगाए हैं और आप ने उन्हें खारिज किया है।
आगे क्या होगा
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया है। यदि चड्ढा की ओर से नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन किया जाता है, तो संबंधित चुनाव अधिकारी रिकॉर्ड की जांच करेंगे।
चुनाव आयोग के पोर्टल पर मतदाता अपने नाम की स्थिति खोज सकते हैं और आवश्यक आवेदन या शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की प्रकाशित समयसारिणी के अनुसार पंजाब उन राज्यों में शामिल है जहां 2026 में एसआईआर के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। आयोग की समयसारिणी में ड्राफ्ट सूची, दावे और आपत्तियों तथा अंतिम सूची के लिए अलग-अलग चरण निर्धारित हैं।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
राघव चड्ढा का नाम पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटना फिलहाल एक चुनावी रिकॉर्ड का विवाद है, अंतिम राजनीतिक या प्रशासनिक निष्कर्ष नहीं। चड्ढा इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि एसआईआर चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अब इस मामले में सबसे अहम दस्तावेज और प्रक्रिया होगी। किस आधार पर चड्ढा की प्रविष्टि को ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ दर्ज किया गया, उनकी आपत्ति पर क्या फैसला होता है और अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम वापस आता है या नहीं, इससे विवाद की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। इसलिए किसी भी नाम को हटाने या दोबारा शामिल करने की कार्रवाई पारदर्शी रिकॉर्ड, निर्धारित नियम और निष्पक्ष सत्यापन के आधार पर होनी चाहिए।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।