कृति सेनन का राखी विज्ञापन विवाद के बाद GIVA ने हटाया
कृति सेनन के विज्ञापन पर बवाल, GIVA ने वापस लिया ऐड
राखी ऐड विवाद में कृति सेनन का जवाब, फिर GIVA का बड़ा फैसला
कृति सेनन वाले GIVA के रक्षाबंधन विज्ञापन को सोशल मीडिया आलोचना के बाद सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। विवाद उनके आउटफिट और कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य को लेकर हुआ। कृति ने कहा कि संस्कृति और परंपराओं का सम्मान कपड़ों से नहीं मापा जाना चाहिए।
नई दिल्ली, भारत | 26 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन का रक्षाबंधन स्पेशल विज्ञापन विवाद के बाद ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने वापस ले लिया है। ब्रांड ने 26 अगस्त को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयान जारी कर कहा कि उसे भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों के प्रति पूरा सम्मान है और अगर विज्ञापन से समाज के किसी वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं, तो ऐसा करना उसकी मंशा नहीं थी। यह विज्ञापन कृति सेनन को केंद्र में रखकर तैयार किया गया था। इसमें वह रक्षाबंधन मनाती दिखाई देती हैं और एक दृश्य में अपने पालतू कुत्ते को भी राखी बांधती हैं। विज्ञापन के इसी प्रस्तुतीकरण और कृति के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हुई।
रिपोर्टों के मुताबिक GIVA का करीब 35 सेकंड का यह विज्ञापन 17 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर आया था। इसमें कृति सफेद लहंगे के साथ ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट में नजर आईं। सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर विज्ञापन में इस तरह के आउटफिट का इस्तेमाल क्यों किया गया। कुछ लोगों ने विज्ञापन में पारंपरिक रस्मों की प्रस्तुति और कुत्ते को राखी बांधने वाले दृश्य पर भी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के साथ कृति सेनन और GIVA दोनों सोशल मीडिया चर्चा के केंद्र में आ गए।
विवाद में अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत की टिप्पणी ने भी ध्यान खींचा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कृति के आउटफिट पर सवाल उठाया और पूछा कि महिलाओं के पास कई तरह के कपड़ों के विकल्प होने के बावजूद भाई को राखी बांधते समय इस तरह की पोशाक क्यों चुनी गई। कंगना ने विज्ञापन को लेकर इसे जानबूझकर असहज बनाए जाने जैसा बताया। हालांकि उनकी टिप्पणी के बाद बहस केवल एक विज्ञापन तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाओं की पसंद, त्योहारों की प्रस्तुति और विज्ञापन की जिम्मेदारी जैसे सवाल भी चर्चा में आ गए।
कृति सेनन ने 25 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। उनके मुताबिक पारंपरिक फैशन समय के साथ बदलता रहा है, लेकिन महिलाओं के संस्कृति के प्रति सम्मान को आज भी केवल कपड़ों से आंकना उचित नहीं है। कृति ने रक्षाबंधन को सुरक्षा और प्यार के रिश्ते से जोड़ा। उन्होंने बताया कि वह और उनकी बहन नूपुर सेनन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं। उन्होंने कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य का भी बचाव किया। कृति के मुताबिक उनके लिए पालतू कुत्ते परिवार का हिस्सा हैं, इसलिए उनके साथ भी प्यार और सुरक्षा की भावना जुड़ी हुई है।
कंपनी ने अपने बयान में विज्ञापन वापस लेने का फैसला स्पष्ट किया। GIVA ने कहा कि वह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का सम्मान करती है और उसका उद्देश्य परिवार के साथ त्योहार की खुशी मनाना था। इस अभियान में पालतू जानवरों को भी परिवार का हिस्सा दिखाने की कोशिश की गई थी। ब्रांड ने यह भी कहा कि अगर विज्ञापन से समाज के किसी हिस्से की भावनाएं अनजाने में आहत हुई हैं, तो उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था। इसके बाद विज्ञापन को सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से वापस ले लिया गया। यानी GIVA ने विवाद के बीच कैंपेन को जारी रखने के बजाय उसे वापस लेने का फैसला किया। यह फैसला कृति की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट किए जाने के अगले दिन आया।
नहीं। विवाद के कम से कम दो प्रमुख पहलू सामने आए। पहला, कृति सेनन का आउटफिट। दूसरा, विज्ञापन में कुत्ते को राखी बांधने का दृश्य।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि विज्ञापन में पारंपरिक रक्षाबंधन की कुछ रस्में, जैसे आरती और तिलक, नजर नहीं आईं। हालांकि यह एक विज्ञापन की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा था और इस पर अलग-अलग दर्शकों की राय रही। दूसरी तरफ कृति ने विज्ञापन की मूल भावना को रिश्ते, प्यार और सुरक्षा से जोड़कर देखा। इसलिए विवाद में दो अलग दृष्टिकोण सामने आए, एक पारंपरिक त्योहार की प्रस्तुति पर केंद्रित और दूसरा व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा रिश्तों की व्यापक व्याख्या पर।
विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कृति सेनन का समर्थन किया। उन्होंने कृति की पोस्ट शेयर करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता का पक्ष रखा। इससे मामला बॉलीवुड और विज्ञापन की बहस से निकलकर सियासी चर्चा में भी पहुंच गया। एक तरफ कंगना रनौत की आलोचना थी, दूसरी तरफ राहुल गांधी का समर्थन। सोशल मीडिया पर इस टकराव ने विज्ञापन की चर्चा को और व्यापक बना दिया।
हालांकि मूल विवाद एक ब्रांड कैंपेन की प्रस्तुति को लेकर था, लेकिन राजनीतिक हस्तियों की प्रतिक्रिया के बाद इसके मायने ज्यादा बड़े हो गए।
यह मामला ब्रांड्स के लिए भी एक अहम सवाल उठाता है। त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में कंपनियां अक्सर पारंपरिक प्रतीकों के साथ आधुनिक फैशन और नई सामाजिक व्याख्याओं को जोड़ने की कोशिश करती हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर किसी कैंपेन की प्रतिक्रिया तुरंत और व्यापक होती है। एक छोटे विज्ञापन के किसी एक दृश्य या ड्रेसिंग चॉइस पर विवाद शुरू होने के बाद पूरा कैंपेन चर्चा में आ सकता है। GIVA का विज्ञापन हटाने का फैसला इसी बदले हुए डिजिटल माहौल की ओर इशारा करता है। ब्रांड के लिए क्रिएटिव स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना अहम हो गया है।
विज्ञापन हटाने से तत्काल विवाद कम हो सकता है, लेकिन मूल बहस खत्म नहीं होती। यहां सवाल यह भी है कि किसी त्योहार की आधुनिक प्रस्तुति की सीमा कौन तय करेगा। एक पक्ष मानता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में परंपरागत संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए। दूसरा पक्ष मानता है कि संस्कृति स्थिर नहीं होती और फैशन तथा पारिवारिक रिश्तों की अभिव्यक्ति समय के साथ बदलती है। इस मामले में GIVA ने विवाद के बीच अपना विज्ञापन वापस ले लिया, लेकिन कृति सेनन का जवाब इस बहस को दूसरी दिशा में ले गया। उन्होंने कपड़ों की जगह त्योहार की भावनात्मक और पारिवारिक भावना पर जोर दिया।
GIVA ने कहा कि अगर विज्ञापन से समाज के किसी वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था। कंपनी ने सम्मान के तौर पर विज्ञापन वापस लेने की बात कही। इसे कंपनी की सफाई और खेद के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उपलब्ध बयान में मुख्य जोर विज्ञापन वापस लेने और सांस्कृतिक सम्मान की बात पर है। इसलिए इसे सीधे किसी गलती की स्वीकारोक्ति के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
विज्ञापन हटने के बावजूद कृति सेनन की प्रतिक्रिया ने उन्हें सोशल मीडिया बहस के केंद्र में रखा है। उनकी पोस्ट को महिलाओं के कपड़ों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ी बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दूसरी तरफ ब्रांड कैंपेन का मूल संदेश पीछे छूट गया। विज्ञापन का उद्देश्य परिवार और पालतू जानवरों को त्योहार की खुशी में शामिल करने का बताया गया था, लेकिन विवाद का केंद्र आउटफिट और विज्ञापन की सांस्कृतिक प्रस्तुति बन गया। यही विज्ञापन की दुनिया में क्रिएटिव रिस्क का एक अहम पहलू है। दर्शक किसी कैंपेन का वही अर्थ नहीं लेते, जो ब्रांड अपने क्रिएटिव नैरेटिव में तय करता है।
फिलहाल GIVA ने विज्ञापन वापस ले लिया है और विवादित कैंपेन सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जा चुका है। कृति सेनन की तरफ से इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। अब इस विवाद का असर दूसरे फेस्टिव कैंपेन पर भी पड़ सकता है। ब्रांड्स के लिए यह सवाल अहम रहेगा कि आधुनिक फैशन, महिला प्रतिनिधित्व और पारंपरिक त्योहारों की संवेदनशीलता को एक ही विज्ञापन में किस तरह संतुलित किया जाए।
कृति सेनन का राखी विज्ञापन विवाद अब केवल एक बॉलीवुड अभिनेत्री के आउटफिट तक सीमित नहीं रहा। GIVA ने सोशल मीडिया आलोचना के बाद विज्ञापन वापस ले लिया, जबकि कृति ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि संस्कृति और परंपरा का सम्मान केवल कपड़ों से तय नहीं किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में तथ्य यह है कि विज्ञापन हटाया जा चुका है और ब्रांड ने भावनाएं आहत होने की स्थिति पर खेद जताया है। विवाद की वजहों को लेकर दर्शकों और सार्वजनिक हस्तियों के अलग-अलग नजरिए सामने आए हैं। अब बड़ी बहस यह है कि त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में क्रिएटिव आजादी और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की सीमा कहां तय होनी चाहिए। सोशल मीडिया ने इस फैसले की रफ्तार जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी अब भी ब्रांड और उसकी क्रिएटिव टीम की ही रहती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।