चीन से जुड़े व्यापारिक नेटवर्क के जरिए यमन के हूती विद्रोहियों तक मिसाइल निर्माण के विशेष पुर्जे पहुंचने की रिपोर्ट ने मिडिल ईस्ट की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हथियारों की निगरानी करने वाली संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की पड़ताल के मुताबिक, हूती संगठन ईरान की खैबर शिकन मिसाइल से मिलती-जुलती बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने की कोशिश कर रहा है। चीन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए जांच में सहयोग की पेशकश की है।
📍 यमन और सऊदी अरब
🗓️ 8 नवंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
यमन में हथियारों की तस्करी और मिसाइल निर्माण को लेकर सामने आई नई पड़ताल ने चीन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। CAR की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के लिए भेजी जा रही 2 खेपों को यमनी अधिकारियों ने रोका था। इन खेपों का शुरुआती स्रोत चीन बताया गया है और इनका गंतव्य हूती नियंत्रण वाला बंदरगाह होदेदा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब्त किए गए सामान में ऐसे विशेष पुर्जे शामिल थे, जिनका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के निर्माण में होता है। इनमें मिसाइल को उड़ान के दौरान स्थिर रखने वाले फिन कोर, रॉकेट मोटर के पिछले हिस्से के उपकरण, नोजल से जुड़े हिस्से और इग्नाइटर शामिल थे।
इसके अलावा खेप में फेनोलिक रेजिन भी मिला। इस सामग्री का इस्तेमाल मिसाइल के हीट शील्ड बनाने में होता है। ये शील्ड वायुमंडल में तेज रफ्तार से प्रवेश के दौरान पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी से मिसाइल की सुरक्षा करती है।
CAR के विश्लेषण के मुताबिक, इन सभी सामग्रियों का एक साथ मिलना सामान्य औद्योगिक खरीद का मामला नहीं लगता। इनकी प्रकृति हूतियों की एक खास किस्म की मिसाइल तैयार करने की कोशिश की ओर इशारा करती है।
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू ईरान की खैबर शिकन मिसाइल से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हूती संगठन इस ईरानी डिजाइन की प्रिसिजन-गाइडेड बैलिस्टिक मिसाइल का अपना संस्करण तैयार करने के लिए जरूरी पुर्जे जुटा रहा है।
खैबर शिकन की अनुमानित मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर बताई जाती है। इतनी दूरी तक पहुंचने वाली मिसाइल सऊदी अरब और इजरायल समेत मिडिल ईस्ट के कई इलाकों के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
CAR के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, इन पुर्जों की खास बनावट और तकनीकी प्रकृति बताती है कि इनके निर्माण के लिए संबंधित मिसाइल के डिजाइन से जुड़ी जानकारी की जरूरत रही होगी।
इसका मतलब यह है कि हूती संगठन की महत्वाकांक्षा केवल दूसरे देशों से तैयार हथियार हासिल करने तक सीमित नहीं रह गई है। संगठन अपनी जमीन पर हथियारों के कुछ हिस्सों का निर्माण और असेंबली करने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश में है।
इस सवाल पर सबसे जरूरी बात यह है कि चीन में बने पुर्जों की पहचान और चीनी सरकार की प्रत्यक्ष भागीदारी, दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं।
CAR की रिपोर्ट में चीन से जुड़े सप्लायर और सप्लाई नेटवर्क के जरिए मिसाइल निर्माण के पुर्जे पहुंचने के संकेत दिए गए हैं। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि चीन की सरकार ने आधिकारिक तौर पर हूतियों को मिसाइल या सैन्य सहायता देने का फैसला किया है।
अंतरराष्ट्रीय जांच में सामने आए कारोबारी नेटवर्क, तीसरे देशों के जरिए होने वाले ट्रांसफर और तस्करी के रास्ते इस मामले को ज्यादा जटिल बनाते हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 2 अक्टूबर 2024 को हूतियों के हथियार खरीद नेटवर्क से जुड़े चीन आधारित कुछ व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, इन नेटवर्कों ने मिसाइल और ड्रोन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली दोहरे इस्तेमाल की तकनीक और सामग्री उपलब्ध कराने में मदद की थी।
यह कार्रवाई चीन से जुड़े कुछ कारोबारी नेटवर्क की पुरानी भूमिका पर भी सवाल उठाती है। हालांकि, प्रतिबंध लगाने वाली अमेरिकी एजेंसी के आरोपों को चीनी सरकार की आधिकारिक नीति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
चीन ने हूतियों के मिसाइल कार्यक्रम में अपनी कंपनियों की कथित भूमिका से जुड़े आरोपों को खारिज किया है।
19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक इंटरव्यू में यमन स्थित चीनी दूतावास के प्रभारी शाओ झेंग ने इन रिपोर्टों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि चीन दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं के निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पालन करता है।
शाओ झेंग ने यह भी कहा कि बीजिंग यमनी सरकार से इस मामले से जुड़े दस्तावेज और सबूत मिलने पर व्यापक जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है।
इस बयान के बाद मामले में एक अहम कूटनीतिक पहलू सामने आया है। एक तरफ जांचकर्ताओं के पास चीन से जुड़े सप्लाई नेटवर्क की जानकारी है, दूसरी तरफ बीजिंग किसी सरकारी सैन्य सहायता से इनकार कर रहा है।
इसलिए पूरे मामले में कारोबारी सप्लायर, बिचौलियों और सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी की अलग-अलग जांच जरूरी है।
हूती संगठन लंबे समय से ईरान से जुड़े हथियार नेटवर्क और तकनीकी मदद के कारण चर्चा में रहा है। लेकिन नई रिपोर्ट एक ऐसे बदलाव की तरफ इशारा करती है, जिसमें संगठन अलग-अलग देशों के सप्लाई नेटवर्क से पुर्जे हासिल करके अपनी हथियार निर्माण क्षमता बढ़ाना चाहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, तैयार मिसाइलों की तस्करी करना मुश्किल होता है। इसके मुकाबले अलग-अलग पुर्जों को कारोबारी सामान के रूप में भेजना और बाद में उन्हें जोड़ना तस्करी नेटवर्क के लिए अपेक्षाकृत आसान रास्ता बन सकता है।
इस रणनीति से हूतियों को एक ही सप्लायर या देश पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम जैसे अत्याधुनिक हिस्सों के लिए ईरान से जुड़ी तकनीकी निर्भरता अभी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यही वजह है कि केवल ईरान से आने वाली खेपों पर रोक लगाने से हूती हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना आसान नहीं होगा।
इस रिपोर्ट का महत्व 8 नवंबर को सामने आए ताजा घटनाक्रम से और बढ़ जाता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रविवार को दावा किया कि यमन के हूतियों की ओर से रियाद की तरफ दागी गई 2 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। राजधानी में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देने के बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने क्षेत्र में अलर्ट जारी किया था।
गठबंधन ने बाद में रियाद और दक्षिणी सऊदी क्षेत्र में 2 क्रूज मिसाइलों को भी नष्ट करने की जानकारी दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब और हूती संगठन के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से बनी युद्धविराम व्यवस्था टूट चुकी है। जुलाई 2026 से दोबारा तेज हुई लड़ाई में हूती संगठन सऊदी हवाई अड्डों, बंदरगाहों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है।
रॉयटर्स के मुताबिक, 7 नवंबर को यमन के हूती नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया था कि सना के पास सऊदी हवाई हमलों में कम से कम 33 लोगों की मौत हुई। सऊदी अधिकारियों ने इस मामले की जांच की बात कही थी। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल सैन्य सुरक्षा तक सीमित नहीं रह सकता। चीन सऊदी अरब का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश और बुनियादी ढांचे से जुड़े रिश्ते भी अहम हैं।
2023 में चीन ने सऊदी अरब और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों की बहाली में मध्यस्थता की थी। ऐसे में चीन से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के जरिए हूती संगठन तक मिसाइल पुर्जे पहुंचने की रिपोर्ट रियाद और बीजिंग के बीच भरोसे की परीक्षा बन सकती है।
सऊदी अरब के सामने दोहरी चुनौती है। उसे अपनी सैन्य और आर्थिक संरचना को मिसाइल तथा ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखना है। साथ ही उसे चीन के साथ व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों को भी संतुलित रखना होगा।
अगर सप्लाई नेटवर्क में शामिल कंपनियों और बिचौलियों की पहचान स्पष्ट होती है, तो चीन पर निर्यात नियंत्रण और कारोबारी निगरानी सख्त करने का कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि आधुनिक हथियारों का निर्माण अब केवल सरकारी सैन्य कारखानों तक सीमित नहीं रह गया है। विशेष औद्योगिक पुर्जे, रॉकेट तकनीक से जुड़ी सामग्री और दोहरे इस्तेमाल वाले उत्पाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते कई देशों तक पहुंचते हैं।
इन उत्पादों की खरीद, पुनः निर्यात और तस्करी के बीच अंतर करना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।
हूती संगठन अगर आयातित पुर्जों की मदद से अपने नियंत्रण वाले इलाकों में मिसाइलों की असेंबली बढ़ाता है, तो उसके हथियार नेटवर्क को रोकने के लिए केवल समुद्री नाकेबंदी पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए निर्यात नियंत्रण, वित्तीय निगरानी, शिपिंग दस्तावेजों की जांच और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग की जरूरत होगी।
अब निगाहें 3 अहम पहलुओं पर रहेंगी। पहला, यमनी अधिकारियों की ओर से जब्त की गई खेपों की पूरी जांच और सप्लायर की पहचान। दूसरा, चीन की ओर से प्रस्तावित जांच में सहयोग और संबंधित कंपनियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई। तीसरा, सऊदी अरब की वायु रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर हूती मिसाइलों के बढ़ते खतरे का असर।
यह भी देखना होगा कि हूती संगठन अपनी मिसाइल निर्माण क्षमता को कितनी दूर तक विकसित करता है और उसे अत्याधुनिक गाइडेंस तकनीक कहां से मिलती है।
फिलहाल उपलब्ध सबूत चीन से जुड़े सप्लाई नेटवर्क और हूती मिसाइल कार्यक्रम के बीच संबंध की तरफ इशारा करते हैं। लेकिन चीन की सरकार को सीधे इस हथियार कार्यक्रम का संचालक बताना अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
शाह टाइम्स विश्लेषण: मिडिल ईस्ट में बदलते सैन्य समीकरण के बीच यह मामला एक गंभीर चेतावनी है। हथियारों की आपूर्ति पर नियंत्रण कमजोर रहा, तो क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा और व्यापक हो सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।