मुजफ्फरनगर के बेगराजपुर में प्रदूषण पर कार्रवाई, फिरोज मेटल फैक्ट्री सील
Mohammad Naved
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2026-09-12 11:47:04
मुजफ्फरनगर के बेगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जांच के बाद फिरोज मेटल फैक्ट्री को सील किया। विभाग के अनुसार इकाई में प्रदूषण और जरूरी लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं मिलीं।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश 🗓️ 12 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved
बेगराजपुर में फैक्ट्री पर कार्रवाई
मुजफ्फरनगर के बेगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर विभागीय कार्रवाई का मामला सामने आया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जांच के बाद फिरोज मेटल फैक्ट्री को सील किया। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जांच में वायु प्रदूषण से जुड़ी स्थिति सामने आई और फैक्ट्री के संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस से संबंधित कमी भी पाई गई।
फैक्ट्री के खिलाफ यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों की निगरानी के बीच हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बेगराजपुर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग पहले भी निरीक्षण और कार्रवाई करता रहा है।
जांच के बाद सील करने का फैसला
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बेगराजपुर में संचालित फिरोज मेटल फैक्ट्री का निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान वायु प्रदूषण से संबंधित स्थिति सामने आने के साथ संचालन से जुड़े जरूरी लाइसेंस की उपलब्धता पर भी सवाल पाया गया।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. गीतेश चंद्रा ने कार्रवाई की पुष्टि की है। उनके अनुसार प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी है।
फैक्ट्री को सील करने की कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश के तहत की गई। उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि संबंधित इकाई में लेड इंगट निर्माण से जुड़ी गतिविधियां संचालित थीं। हालांकि इस संबंध में किसी अतिरिक्त तकनीकी जांच रिपोर्ट या विस्तृत प्रयोगशाला निष्कर्ष को सार्वजनिक स्रोतों में इस खबर के साथ विस्तार से नहीं बताया गया है। इसलिए इन पहलुओं को विभागीय जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
बेगराजपुर क्यों महत्वपूर्ण है
मुजफ्फरनगर का बेगराजपुर औद्योगिक क्षेत्र लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार की औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय अनुपालन का सवाल स्थानीय आबादी तथा आसपास के जल और वायु संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक ऑनलाइन तंत्र में औद्योगिक इकाइयों की सहमति, अनुमति और पर्यावरणीय अनुपालन से संबंधित रिकॉर्ड की निगरानी की व्यवस्था है। बोर्ड खुद को प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को लागू करने वाली नियामक संस्था के रूप में दर्ज करता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों को संचालन से पहले और संचालन के दौरान निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के दायरे में रखना है। किसी इकाई के पास जरूरी अनुमति नहीं होने या पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की स्थिति में नियामकीय कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मुजफ्फरनगर में प्रदूषण पर पहले भी कार्रवाई
बेगराजपुर में यह कार्रवाई किसी एक अलग घटनाक्रम के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। मुजफ्फरनगर में पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कई बार कार्रवाई हुई है।
जनवरी 2026 में बेगराजपुर क्षेत्र में फिरोज मेटल फैक्ट्री के साथ-साथ जानसठ रोड स्थित शक्ति क्राफ्ट एंड टिश्यू फैक्ट्री पर भी कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने शक्ति क्राफ्ट एंड टिश्यू का निरीक्षण किया था और वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपकरणों में कमी पाए जाने के बाद उसे बंद करने का आदेश दिया गया था। उसी दौरान बेगराजपुर स्थित फिरोज मेटल फैक्ट्री को सील किए जाने की जानकारी दी गई थी।
इससे स्पष्ट है कि बेगराजपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की निगरानी पहले से जारी रही है।
जल प्रदूषण का भी पुराना मुद्दा
मुजफ्फरनगर में पर्यावरणीय चिंता केवल वायु प्रदूषण तक सीमित नहीं है। बेगराजपुर नाले और आसपास के जल स्रोतों को लेकर भी पहले विभागीय कार्रवाई और निगरानी की खबरें सामने आती रही हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पूर्व कार्रवाई से संबंधित रिपोर्टों में बेगराजपुर नाले के माध्यम से प्रदूषित औद्योगिक उत्प्रवाह के काली नदी पश्चिमी क्षेत्र तक पहुंचने की समस्या का उल्लेख किया गया है। कुछ औद्योगिक इकाइयों पर अशुद्धिकृत उत्प्रवाह छोड़ने के आरोपों के बाद बंदी और सीलिंग जैसी कार्रवाई भी की गई थी।
इस पृष्ठभूमि में बेगराजपुर में किसी औद्योगिक इकाई के खिलाफ होने वाली हर कार्रवाई का असर केवल संबंधित फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहता। इसका संबंध स्थानीय पर्यावरण, आसपास रहने वाले लोगों और जल स्रोतों की सुरक्षा से भी जुड़ता है।
कार्रवाई का सार्वजनिक महत्व
औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन प्रशासन के सामने लगातार बड़ी चुनौती है। उद्योगों से रोजगार और आर्थिक गतिविधियां जुड़ी होती हैं, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन भी जरूरी है।
किसी फैक्ट्री को सील करना अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि विभागीय जांच के निष्कर्ष स्पष्ट रहें, उद्योग संचालक को नियमानुसार अपना पक्ष रखने का अवसर मिले और आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हो।
यदि किसी इकाई में पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियामकीय कार्रवाई के साथ सुधारात्मक कदम भी जरूरी होते हैं। इससे भविष्य में समान उल्लंघन रोकने में मदद मिलती है।
प्रशासन के सामने आगे की चुनौती
बेगराजपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में प्रभावी निगरानी के लिए केवल छापेमारी पर्याप्त नहीं है। नियमित निरीक्षण, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की जांच, अनुमति और सहमति की स्थिति की समीक्षा तथा अनुपालन की निगरानी लगातार जरूरी रहती है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ऑनलाइन तंत्र उद्योगों की सहमति और अन्य पर्यावरणीय अनुमति संबंधी जानकारी के लिए आधिकारिक व्यवस्था उपलब्ध कराता है। इससे नियामकीय प्रक्रिया को रिकॉर्ड आधारित बनाने में मदद मिलती है।
मुजफ्फरनगर में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर पहले भी सरकारी और विधायी स्तर पर चिंता दर्ज की गई है। संसद से संबंधित दस्तावेजों में भी मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक अपशिष्ट प्रदूषण और जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
आगे क्या होगा
फैक्ट्री को सील किए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया संबंधित विभागीय आदेशों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। यदि इकाई दोबारा संचालन चाहती है, तो उसे लागू पर्यावरणीय और औद्योगिक नियमों के अनुरूप आवश्यक अनुमति तथा अनुपालन पूरा करना होगा।
इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण रहेगा कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग आगे की जांच में क्या निष्कर्ष दर्ज करते हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में फिलहाल सीलिंग की कार्रवाई और उसके आधार के रूप में प्रदूषण तथा जरूरी लाइसेंस से संबंधित कमियों की जानकारी सामने आई है।
मुजफ्फरनगर के बेगराजपुर में फिरोज मेटल फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी से जुड़ा अहम घटनाक्रम है। कार्रवाई का आधार विभागीय जांच और नियामकीय निर्देश बताए गए हैं।
मामले की असल अहमियत इस बात में है कि औद्योगिक गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय जवाबदेही भी सुनिश्चित हो। प्रशासन की कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब जांच पारदर्शी रहे, नियमों का समान रूप से पालन हो और भविष्य में प्रदूषण रोकने के लिए निरंतर निगरानी जारी रहे।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।