Uttar Pradesh
मुजफ्फरनगर में भाकियू की रात्रि महापंचायत, गन्ने के ₹500 भाव से एमएसपी तक 16 मांगें उठीं
Asif Khan
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2026-09-18 10:59:20
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 18 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में भाकियू की रात्रि किसान मजदूर महापंचायत हुई। गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल, बकाया भुगतान, कानूनी एमएसपी, बिजली, खाद और कर्जमाफी समेत कई मुद्दे उठाए गए। संगठन ने आगे प्रदेश में पंचायतों का ऐलान किया।
मुजफ्फरनगर में रातभर चली किसान मजदूर महापंचायत
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में भारतीय किसान यूनियन की किसान मजदूर महापंचायत ने गन्ना, एमएसपी, बिजली, खाद और कृषि ऋण जैसे मुद्दों को फिर केंद्र में ला दिया। 17 सितंबर की रात आयोजित इस पंचायत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत मौजूद रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचे। इसे संगठन की पहली रात्रि महापंचायत बताया गया है।
महापंचायत में किसानों और कृषि मजदूरों से जुड़े आर्थिक और कृषि नीति के मुद्दों पर चर्चा हुई। भाकियू की ओर से सरकार के सामने कई मांगें रखी गईं और आगे उत्तर प्रदेश में सिलसिलेवार किसान पंचायतें आयोजित करने की बात कही गई।
नए पेराई सत्र में गन्ने के ₹500 भाव की मांग
महापंचायत में गन्ने का भाव सबसे प्रमुख मुद्दों में रहा। राकेश टिकैत ने नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी। संगठन ने चीनी मिलों पर लंबित गन्ना भुगतान ब्याज सहित कराने की भी मांग की।
गन्ने के दाम को लेकर किसान संगठनों की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब नए पेराई सत्र की तैयारियां चल रही हैं। इससे पहले भी भाकियू की ओर से पेराई शुरू होने से पहले गन्ने का मूल्य घोषित करने की मांग उठाई गई थी।
नरेश टिकैत ने भी गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाया और संगठन की ओर से किसानों के हित में आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
महापंचायत में प्रमुख मांग फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी रही। राकेश टिकैत ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार एमएसपी सुनिश्चित करने और सरकारी खरीद को मजबूत करने की मांग रखी।
भाकियू ने खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता और प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी रखी। यह मुद्दा किसानों की आय, बाजार मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था से सीधे जुड़ा है।
कर्जमाफी और ब्याजमुक्त कृषि ऋण
महापंचायत में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए संपूर्ण कर्जमाफी की मांग उठाई गई। इसके साथ ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
भाकियू का तर्क है कि खेती की लागत बढ़ने और कृषि आय पर दबाव के बीच ऋण का बोझ किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। महापंचायत में इस मुद्दे को कृषि नीति के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने रखा गया।
मुफ्त बिजली और स्मार्ट मीटर का विरोध
कृषि कार्य के लिए निशुल्क बिजली देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। संगठन ने घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए ₹300 यूनिट तक निशुल्क बिजली देने की मांग रखी।
इसके साथ बिजली बिल-2025, स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की गई। कृषि नलकूपों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण इलाकों में वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या दूर करने की बात भी सामने आई।
डीएपी और यूरिया की उपलब्धता पर जोर
किसानों की मांगों में डीएपी, यूरिया और दूसरे उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का मुद्दा भी शामिल रहा। भाकियू ने खाद सब्सिडी बहाल करने की मांग की।
कृषि उत्पादन में उर्वरकों की उपलब्धता और लागत सीधे किसान की उत्पादन लागत को प्रभावित करती है। इसी वजह से महापंचायत में खाद की आपूर्ति को लेकर भी सरकार से स्पष्ट व्यवस्था की मांग रखी गई।
श्रम संहिताओं और कृषि नीतियों पर सवाल
भाकियू ने किसानों और मजदूरों के हितों के विरुद्ध होने का आरोप लगाते हुए चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग रखी। संगठन ने बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति को लेकर भी आपत्ति दर्ज की।
इन मांगों के जरिए संगठन ने कृषि क्षेत्र को केवल फसल मूल्य तक सीमित रखने के बजाय श्रम, बाजार, सहकारिता और बीज नीति से जोड़कर देखने की बात रखी।
फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा पर मुआवजा
महापंचायत में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा की मांग भी उठाई गई। संगठन ने सार्वजनिक क्षेत्र पर आधारित पारदर्शी फसल और पशुधन बीमा व्यवस्था की मांग की।
बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, भूस्खलन और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों, बंटाईदारों और कृषि मजदूरों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास का मुद्दा
भूमि अधिग्रहण को लेकर भी भाकियू ने अपनी मांग रखी। संगठन ने कहा कि किसानों और ग्रामीण परिवारों को पुनर्वास दिए बिना भूमि अधिग्रहण, बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
महापंचायत में भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के प्रावधानों के पालन की मांग की गई। इस मुद्दे को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की जमीन और आजीविका से जुड़े व्यापक सवाल के तौर पर उठाया गया।
रोजगार और कृषि मजदूरों से जुड़े मुद्दे
महापंचायत में ग्रामीण रोजगार से जुड़ी मांग भी रखी गई। संगठन ने वीबी-जी राम जी के तहत 200 दिन के रोजगार और न्यूनतम ₹700 प्रतिदिन मजदूरी की मांग की।
इससे किसान मजदूरों के साथ कृषि मजदूरों की आय और रोजगार सुरक्षा का मुद्दा भी पंचायत के एजेंडे में शामिल हुआ।
सरकार की नीतियों पर राकेश टिकैत के सवाल
राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में किसानों से जुड़े मुद्दों के अलावा सहारनपुर मस्जिद प्रकरण, रामपुर की यूनिवर्सिटी, अस्पतालों, सरकारी स्कूलों और पशुधन से संबंधित नीतियों पर भी सवाल उठाए।
इन मुद्दों पर उनके वक्तव्य संगठन की ओर से सरकार की नीतियों पर की गई राजनीतिक आलोचना के रूप में सामने आए। इन आरोपों या आपत्तियों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती, इसलिए इन्हें भाकियू के पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आगे लखनऊ में पंचायत का ऐलान
राकेश टिकैत ने किसानों के मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश में सिलसिलेवार पंचायतें करने की घोषणा की। इसी क्रम में 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन में पंचायत करने का ऐलान किया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि भाकियू गन्ने के मूल्य, भुगतान और कृषि नीति से जुड़े मुद्दों को जिला स्तर से आगे राज्य स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।
ज्ञापन को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य
महापंचायत के मांगपत्र को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 16 सूत्रीय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र भेजा गया। इसलिए इसे केवल प्रधानमंत्री के नाम 16 सूत्रीय ज्ञापन के रूप में प्रस्तुत करना उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टिंग से पूरी तरह मेल नहीं खाता।
शाह टाइम्स की रिपोर्टिंग में इसी वजह से मांगों की संख्या और ज्ञापन के संबोधन को सावधानी से रखा जाना उचित है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि राजनीति में मुद्दों का महत्व
मुजफ्फरनगर लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में गन्ने के मूल्य, भुगतान और एमएसपी जैसे आर्थिक मुद्दों पर बड़ी पंचायत का आयोजन क्षेत्रीय कृषि राजनीति में अहम घटनाक्रम है।
हालांकि महापंचायत में रखी गई मांगें संगठन की मांगें हैं। इनके आधार पर सरकार के निर्णय या नीतिगत बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
अब आगे क्या
फिलहाल भाकियू ने आंदोलनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। 23 अक्टूबर की प्रस्तावित लखनऊ पंचायत इस सिलसिले में अगला प्रमुख कार्यक्रम होगी।
किसानों के लिए सबसे अहम मुद्दे गन्ने का घोषित मूल्य, लंबित भुगतान, एमएसपी, बिजली, खाद और कृषि ऋण बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और किसान संगठनों की अगली रणनीति पर इस आंदोलन की दिशा निर्भर करेगी।
Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।