मुजफ्फरनगर के जिला सैनिक कार्यालय में आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 187 पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने नेत्र परीक्षण, रक्त वाहिका रोगों की स्क्रीनिंग तथा अंगदान संबंधी परामर्श प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्व सैनिक समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और समय पर जांच के महत्व को रेखांकित करना रहा।
📍 मुजफ्फरनगर
📰 20 जुलाई 2026
✍️ Wasi Siddiqui
पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
नेत्र चिकित्सा शिविर के माध्यम से जिला सैनिक कार्यालय, मुजफ्फरनगर में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य अभियान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में नेत्र रोगों की जांच, रक्त वाहिका रोगों की स्क्रीनिंग तथा अंगदान जागरूकता को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समग्र स्वरूप देने का प्रयास किया गया। शिविर में कुल 187 लाभार्थियों ने चिकित्सकीय परीक्षण कराया।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी ने बढ़ाया महत्व
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जीओसी हेडक्वार्टर पुपसा मेजर जनरल सुमित राणा रहे। उनके साथ एमएच मेरठ के कमांडेंट ब्रिगेडियर सी.पी. सिंह और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
नेत्र रोगों की समय पर पहचान पर रहा विशेष फोकस
शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, दृष्टिदोष और अन्य नेत्र रोगों की जांच की। जिन मरीजों में शुरुआती लक्षण मिले, उन्हें दवाइयां उपलब्ध कराई गईं और आवश्यकता के अनुसार आगे के उपचार के लिए परामर्श भी दिया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ नेत्र रोगों का जोखिम बढ़ता है। ऐसे में नियमित जांच से कई गंभीर समस्याओं की समय रहते पहचान संभव हो जाती है, जिससे इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है।
वैस्कुलर स्क्रीनिंग ने बढ़ाई स्वास्थ्य जागरूकता
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रक्त वाहिका रोगों की स्क्रीनिंग रहा। चिकित्सकों ने प्रतिभागियों को बताया कि शरीर की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होती रहती हैं। समय-समय पर जांच कराने से इन रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने संतुलित जीवनशैली, नियमित व्यायाम, नियंत्रित खानपान और समय पर चिकित्सकीय परामर्श को ऐसी बीमारियों से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
अंगदान पर दिया गया सामाजिक संदेश
शिविर में आयोजित जागरूकता सत्र के दौरान चिकित्सकों ने अंगदान के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के अंगदान से कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। आंख, किडनी, लीवर और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों के दान को मानव सेवा का सर्वोच्च उदाहरण बताया गया।
इसी दौरान इच्छुक प्रतिभागियों से अंगदान संबंधी संकल्प पत्र भी भरवाए गए। हालांकि चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि अंगदान पूरी तरह स्वैच्छिक प्रक्रिया है और इसके लिए निर्धारित कानूनी एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है।
मेजर जनरल सुमित राणा ने स्वास्थ्य सुरक्षा पर दिया जोर
मुख्य अतिथि मेजर जनरल सुमित राणा ने कहा कि सैनिक देश की सीमाओं की सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित करते हैं और उनके परिवारों का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर पूर्व सैनिक समुदाय को समय पर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में उपयोगी भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने अंगदान को मानवता की सेवा बताते हुए समाज के अधिक से अधिक लोगों से इस विषय में जागरूक होने की अपील की।
पूर्व सैनिकों के लिए ऐसे शिविर क्यों हैं महत्वपूर्ण
देशभर में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में निवास करते हैं। अनेक मामलों में नियमित विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उनके लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे शिविर प्राथमिक जांच, शुरुआती पहचान और स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आंखों और रक्त वाहिकाओं से संबंधित कई बीमारियां शुरुआती चरण में बिना स्पष्ट लक्षणों के रहती हैं। इसलिए समय पर जांच भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
स्वास्थ्य जागरूकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
कार्यक्रम केवल चिकित्सकीय परीक्षण तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। अंगदान जागरूकता अभियान के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया गया कि वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के अंतर्गत किया गया अंगदान अनेक लोगों के जीवन को बचा सकता है।
इस प्रकार के अभियान स्वास्थ्य सेवाओं के साथ समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बन रहे हैं।
समापन में जताया आभार
शिविर के अंत में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल चौहान (सेवानिवृत्त) ने सेना के अधिकारियों, चिकित्सकों, चिकित्सा स्टाफ तथा सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन जलपान के साथ हुआ।
संपादकीय दृश्टिकोण
वसी सिद्दीकी
यह आयोजन इस बात का उदाहरण भी रहा कि पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य, समय पर जांच और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़कर व्यापक जनहित का कार्य किया जा सकता है। यदि ऐसे शिविर नियमित अंतराल पर आयोजित होते रहें तो पूर्व सैनिक समुदाय के स्वास्थ्य संरक्षण को और अधिक मजबूती मिल सकती है।