भारत और इंडोनेशिया के बीच 12वें आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स लखनऊ में आयोजित हो रहे हैं। वार्ता में रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान और विशेषज्ञता साझा करने पर जोर रहा। दोनों देश पहले से संयुक्त अभ्यास, स्टाफ टॉक्स और समुद्री सुरक्षा में सहयोग करते हैं। यह प्रक्रिया द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाती है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 13 अगस्त 2026 | Shah Times
भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने तथा सैन्य विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ाने पर चर्चा की है। 12वें इंडिया-इंडोनेशिया आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स 11 से 13 अगस्त 2026 तक लखनऊ में आयोजित हो रहे हैं।
स्टाफ टॉक्स दोनों देशों की सेनाओं के बीच संस्थागत संवाद का अहम माध्यम हैं। इन बैठकों में सैन्य प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त गतिविधियों और भविष्य के सहयोग की प्राथमिकताओं पर चर्चा होती है।
भारत और इंडोनेशिया के रक्षा संबंध पहले से व्यापक हैं। दोनों देशों ने 2025 में तीसरी डिफेंस मिनिस्टर्स डायलॉग के दौरान सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और रक्षा शिक्षा संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
नवंबर 2025 की बैठक में दोनों पक्षों ने अधिकारी आदान-प्रदान, संयुक्त ट्रेनिंग और रक्षा शिक्षा संस्थानों के दौरे को बढ़ाने पर जोर दिया था। इसका मकसद सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी, पेशेवर समझ और आपसी अनुभव साझा करना है।
भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग को जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भी नई दिशा मिली। 6 से 8 जुलाई तक हुई यात्रा के दौरान मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग समेत व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा की।
दोनों नेताओं ने रक्षा और समुद्री साझेदारी को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त अभ्यास, स्टाफ टॉक्स, संयुक्त रिसर्च, नई रक्षा तकनीकों का सह-उत्पादन, पोर्ट कॉल, पीसकीपिंग, सूचना साझा करने, हाइड्रोग्राफी, कैपेसिटी बिल्डिंग और कैडेट ट्रेनिंग जैसे क्षेत्रों को सहयोग की प्राथमिकताओं में रखा गया।
भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा उद्योग और तकनीक को सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों में शामिल किया है। दोनों पक्षों ने उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, तकनीकी सहायता, कैपेसिटी बिल्डिंग और रक्षा उपकरणों की सोर्सिंग में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
शिपबिल्डिंग, एमआरओ सुविधाओं, रक्षा आरएंडडी और सप्लाई-चेन इकोसिस्टम को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी दोनों देशों ने जोर दिया।
दोनों देशों के नेताओं ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम और एयर-टू-एयर मिसाइल कोऑपरेशन एग्रीमेंट से जुड़े रक्षा सहयोग में प्रगति का भी स्वागत किया था।
भारत और इंडोनेशिया दोनों हिंद महासागर क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री देश हैं। इसलिए दोनों के रक्षा रिश्तों में समुद्री सुरक्षा का विशेष स्थान है।
जुलाई के संयुक्त बयान में मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, कोस्टल सर्विलांस, समुद्री कनेक्टिविटी, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ, सर्च एंड रेस्क्यू और प्रदूषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की बात कही गई।
भारत और इंडोनेशिया ने मैरीटाइम सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कोऑपरेशन से जुड़े एमओयू के नवीनीकरण और इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा एजेंसी बकम्मला तथा भारतीय कोस्ट गार्ड के बीच इम्प्लीमेंटिंग अरेंजमेंट का भी स्वागत किया।
आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स का एक अहम पहलू सैन्य पेशेवर अनुभव और विशेषज्ञता साझा करना है। भारत के पास प्रशिक्षण, हाई-ऑल्टिट्यूड ऑपरेशंस, आतंकवाद-रोधी अभियानों और रक्षा तकनीक से जुड़ा व्यापक अनुभव है। इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया और समुद्री क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण अलग तरह का ऑपरेशनल अनुभव रखता है।
दोनों पक्षों के बीच ऐसे संवाद से प्रशिक्षण पद्धतियों, सैन्य प्रक्रियाओं और ऑपरेशनल अनुभवों की आपसी समझ बढ़ती है। यह किसी नए सैन्य गठबंधन का संकेत नहीं है, बल्कि मौजूदा रणनीतिक साझेदारी के भीतर संस्थागत रक्षा सहयोग को मजबूत करने की प्रक्रिया है।
भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से संयुक्त सैन्य गतिविधियां करते रहे हैं। इनमें गरुड़ शक्ति जैसे आर्मी अभ्यास, समुद्र शक्ति जैसे नौसैनिक अभ्यास और इंड-इंडो कॉरपैट जैसी समुद्री गतिविधियां शामिल हैं। भारत के बाली स्थित महावाणिज्य दूतावास के अनुसार दोनों देश ट्रेनिंग, कोर्स, स्टाफ टॉक्स, सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज और रक्षा उद्योग में भी सहयोग करते हैं।
ऐसे अभ्यासों का असर केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहता। इनसे दोनों सेनाओं के बीच कम्युनिकेशन, प्रक्रियागत समझ और संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता बेहतर होती है।
भारत और इंडोनेशिया दोनों हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और नियम-आधारित व्यवस्था के समर्थक हैं। जुलाई 2026 के संयुक्त बयान में दोनों देशों ने मुक्त, खुले, पारदर्शी, शांतिपूर्ण और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को भी अहम बताया। भारत-इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय तंत्र में मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, समुद्री प्रदूषण और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंध केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण, सैन्य चिकित्सा, तकनीक और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
2025 की डिफेंस मिनिस्टर्स डायलॉग में दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा और मिलिट्री-टू-मिलिट्री एंगेजमेंट को मजबूत करने पर सहमति जताई थी।
जुलाई 2026 का संयुक्त बयान इस सहयोग को और व्यापक करता है। इसमें रक्षा उद्योग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, शिपबिल्डिंग, एमआरओ और रक्षा आरएंडडी को स्पष्ट प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
लखनऊ में हो रही मौजूदा वार्ता का महत्व इसी व्यापक रणनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। स्टाफ टॉक्स के जरिए दोनों सेनाएं अपने व्यावहारिक सहयोग की समीक्षा और आगे की प्राथमिकताओं पर विचार कर रही हैं।
आने वाले दौर में प्रशिक्षण, विशेषज्ञ आदान-प्रदान, संयुक्त अभ्यास और रक्षा तकनीक सहयोग भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के अहम स्तंभ बने रह सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज किसी नए रक्षा समझौते या तत्काल सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं करते।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग का मौजूदा रुख एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर इशारा करता है। इसका केंद्र सैन्य संवाद, विशेषज्ञता साझा करना, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग में व्यावहारिक सहयोग है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।