मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद समय से पहले रिटायरमेंट लिया है। राष्ट्रपति मुर्मू के ADC और 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में सेवा के कारण वह सोशल मीडिया पर चर्चित रहे।
नई दिल्ली | 1 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल इन दिनों फिर चर्चा में हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp यानी ADC रहे सांब्याल ने करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद भारतीय सेना से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली है।
राष्ट्रपति के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों, राष्ट्रीय समारोहों और विदेश यात्राओं में उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहीं। इसी दौरान सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें “नेशनल क्रश” कहना शुरू किया। यह कोई आधिकारिक सैन्य उपाधि नहीं है।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पेशेवर जानकारी के मुताबिक, ऋषभ सांब्याल ने 2013 में NDA परीक्षा पास की और 2014 में 133वें NDA कोर्स में शामिल हुए।
इसके बाद उन्होंने Indian Military Academy में सैन्य अध्ययन और रक्षा प्रबंधन की पढ़ाई की। उनकी सैन्य यात्रा में Jat Regiment और बाद में 4 Para Special Forces की सेवा भी शामिल रही।
सांब्याल को 2021 में तब पेशेवर पहचान मिली जब उन्होंने Captain के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में Jat Regiment की टुकड़ी का नेतृत्व किया।
उस वर्ष उनकी टुकड़ी को Best Marching Contingent Trophy मिली। यह उपलब्धि राष्ट्रपति के ADC बनने से पहले उनके सैन्य करियर का एक प्रमुख पड़ाव रही।
राष्ट्रपति के ADC बनने से पहले ऋषभ सांब्याल ने 4 Para Special Forces में भी सेवा की। इस यूनिट को “Daggers” के नाम से जाना जाता है।
मीडिया रिपोर्टों में उनके Special Forces सेवा के दौरान Balidaan Badge हासिल करने का भी उल्लेख है। यह एक प्रतिष्ठित Special Forces बैज है।
ऋषभ सांब्याल को मार्च 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC के रूप में चुना गया था।
ADC की भूमिका केवल राष्ट्रपति के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देने तक सीमित नहीं होती। इसमें प्रोटोकॉल, आधिकारिक कार्यक्रमों का समन्वय, यात्रा व्यवस्था और वरिष्ठ अधिकारियों तथा विदेशी प्रतिनिधियों से जुड़े कार्यक्रमों में जिम्मेदारियां शामिल होती हैं।
सांब्याल की सार्वजनिक पेशेवर प्रोफाइल में प्रोटोकॉल प्रबंधन, कार्यकारी सुरक्षा, यात्रा समन्वय और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ काम करने का अनुभव दर्ज है।
राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर सामने आते रहे।
गणतंत्र दिवस समारोह, राष्ट्रपति भवन के कार्यक्रम और विदेश यात्राओं से जुड़े दृश्यों में उनका अनुशासित सैन्य व्यक्तित्व लोगों का ध्यान खींचता रहा।
2026 में उनकी तस्वीरों और वीडियो की वायरल लोकप्रियता के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर “नेशनल क्रश” कहा जाने लगा। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि यह इंटरनेट पर प्रचलित अनौपचारिक लेबल है, कोई आधिकारिक सम्मान नहीं।
यही सवाल उनके रिटायरमेंट के बाद सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।
मेजर ऋषभ सांब्याल ने खुद अपने वीडियो में कहा कि सेना की वर्दी पहनना उनका बचपन का सपना था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इसे समय से पहले उतारना पड़ेगा।
उन्होंने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार ने उनके फैसले का समर्थन किया है।
द प्रिंट ने उनके बयान के हवाले से रिपोर्ट किया कि उन्हें कुछ पारिवारिक जिम्मेदारियों का ध्यान रखना है और यह उनके जीवन का सबसे कठिन फैसला था।
इस बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें चलीं।
लेकिन सांब्याल ने खुद स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी शादी करने की योजना नहीं है। इसलिए उनके रिटायरमेंट को शादी से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
उनके सार्वजनिक बयान में व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का उल्लेख है, लेकिन उन्होंने अपनी निजी परिस्थितियों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
सेना से विदाई के बाद सांब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति की सीख ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ने में मदद की।
यह मुलाकात उनके राष्ट्रपति के ADC के रूप में कार्यकाल के बाद हुई।
ऋषभ सांब्याल की सैन्य यात्रा NDA से शुरू होकर Jat Regiment, 4 Para Special Forces और राष्ट्रपति के ADC पद तक पहुंची।
उनकी सार्वजनिक प्रोफाइल करीब 12 साल के सैन्य अनुभव का उल्लेख करती है। अब सेना से प्रीमेच्योर रिटायरमेंट के बाद उनके अगले कदम को लेकर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।
फिलहाल उन्होंने भविष्य की किसी खास नौकरी या पेशे की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।
ऋषभ सांब्याल की सोशल मीडिया लोकप्रियता ने उनकी तस्वीरों को वायरल जरूर बनाया, लेकिन उनकी सैन्य यात्रा उससे कहीं व्यापक है।
NDA से प्रशिक्षण, गणतंत्र दिवस परेड में नेतृत्व, 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में सेवा और फिर राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी उनके करियर के प्रमुख पड़ाव रहे हैं।
अब करीब 12 साल की सेवा के बाद उनका फैसला व्यक्तिगत और पारिवारिक प्राथमिकताओं से जुड़ा है। उनके अपने बयान के मुताबिक, सेना छोड़ना आसान फैसला नहीं था।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।