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नेपाल में ढाई घंटे के भीतर दो भूकंप, 4.5 और 4.2 की तीव्रता से कांपी धरती

Harish Qureshi 2026-09-16 14:46:03
नेपाल में ढाई घंटे के भीतर दो भूकंप, 4.5 और 4.2 की तीव्रता से कांपी धरती

नेपाल के मुगु जिले में बुधवार तड़के 4.5 और 4.2 तीव्रता के दो भूकंप आए। दोनों झटकों के केंद्र कलाई क्षेत्र के आसपास बताए गए। तत्काल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं है।


मुगु, नेपाल | 16 सितंबर 2026

Mohd Haris


नेपाल में दोहरे भूकंप से हिली धरती


नेपाल के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बुधवार तड़के लगातार दो भूकंप के झटकों ने लोगों को चिंता में डाल दिया। मुगु जिले के कलाई इलाके के आसपास केंद्रित दोनों भूकंप कुछ ही घंटों के अंतराल में दर्ज किए गए। पहला झटका 4.5 तीव्रता का था, जबकि दूसरे भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई।


राष्ट्रीय भूकंपीय अनुसंधान केंद्र के मुताबिक पहला भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 1:51 बजे आया। इसके बाद सुबह 4:28 बजे दूसरा झटका दर्ज किया गया। दोनों घटनाओं के बीच करीब ढाई घंटे का अंतर रहा।


पहला झटका 4.5 तीव्रता का


पहले भूकंप का केंद्र मुगु जिले के कलाई इलाके के पास बताया गया है। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 दर्ज की गई।


इसके बाद उसी क्षेत्र के आसपास दूसरा भूकंप आया। दूसरे झटके की तीव्रता 4.2 बताई गई है। भूकंप की लगातार दो घटनाओं से स्थानीय स्तर पर लोगों में बेचैनी और एहतियात का माहौल देखा गया।


यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र के उपलब्ध आंकड़ों में भी इसी क्षेत्र के आसपास दोनों घटनाओं की पुष्टि होती है, हालांकि अलग-अलग भूकंपीय नेटवर्क में तीव्रता के आंकड़ों में मामूली अंतर हो सकता है।


डोल्पा और जुम्ला तक महसूस हुए झटके


रिपोर्टों के मुताबिक दोनों भूकंपों के झटके पड़ोसी डोल्पा और जुम्ला जिलों में भी महसूस किए गए। अचानक आए झटकों के कारण लोगों के बीच कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना।


हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी व्यक्ति के घायल होने, किसी की मौत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों की तरफ से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है।


नुकसान की स्थिति पर निगरानी


भूकंप के तुरंत बाद किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं मिलना राहत की बात है, लेकिन शुरुआती आकलन के बाद भी स्थिति में बदलाव संभव होता है। खास तौर पर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में नुकसान की सूचना प्रशासन तक पहुंचने में समय लग सकता है।


इसी वजह से स्थानीय एजेंसियां संभावित आफ्टरशॉक्स और देर से सामने आने वाली क्षति की रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं।


बाढ़ के बाद भूकंप ने बढ़ाई चिंता


नेपाल हाल के दिनों में बाढ़ और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रभावित रहा है। ऐसे समय में भूकंप के नए झटकों ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।


हालांकि मौजूदा भूकंपों को सीधे बाढ़ की वजह बताने का कोई वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है। भूकंप और बाढ़ अलग-अलग प्राकृतिक प्रक्रियाओं से जुड़े खतरे हैं। इसलिए दोनों घटनाओं के एक ही समय में होने को कारण और परिणाम के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।


भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है नेपाल


नेपाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और यहां भारतीय तथा यूरेशियाई प्लेटों की भूगर्भीय गतिविधियों के कारण भूकंप का खतरा बना रहता है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार काठमांडू घाटी और आसपास का हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है।


नेपाल में पहले भी कई बड़े भूकंप गंभीर तबाही का कारण बन चुके हैं। 2015 का गोरखा भूकंप इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है, जिसने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया था।


लेकिन हर भूकंप को बड़े भूकंप की पूर्व सूचना मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। 4 से 5 के आसपास की तीव्रता वाले भूकंप कई बार महसूस तो होते हैं, लेकिन उनसे अनिवार्य रूप से बड़ी तबाही नहीं होती।


क्या आगे आफ्टरशॉक आ सकते हैं?


भूकंप के बाद छोटे झटके आना सामान्य भूकंपीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। हालांकि किसी खास क्षेत्र में कितने और कितनी तीव्रता के झटके आएंगे, इसकी सटीक भविष्यवाणी करना संभव नहीं है।


इसीलिए विशेषज्ञ ऐसे घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं।


फिलहाल राहत की खबर


मुगु में आए दोनों झटकों को लेकर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि तत्काल किसी बड़ी जनहानि या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है।

पहला झटका 4.5 और दूसरा 4.2 तीव्रता का था। दोनों का केंद्र मुगु जिले के कलाई क्षेत्र के आसपास बताया गया है। डोल्पा और जुम्ला में भी झटके महसूस किए गए।


नेपाल में प्रशासन और संबंधित भूकंपीय एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। आने वाले घंटों में अगर कोई आफ्टरशॉक या नुकसान की नई जानकारी सामने आती है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।


निष्कर्ष


बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे नेपाल में लगातार दो भूकंपीय झटकों ने एक बार फिर देश की आपदा तैयारी और पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।


फिर भी नेपाल जैसे भूकंपीय रूप से सक्रिय देश में छोटे झटकों को भी आपदा प्रबंधन की दृष्टि से गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा किया जाए और किसी भी संभावित आफ्टरशॉक की स्थिति में सुरक्षा निर्देशों का पालन किया जाए।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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