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प्राचीन दुनिया के सात अजूबे कौन-कौन से थे? कितने आज भी मौजूद हैं?

Neelam Saini 2026-09-18 14:20:54
प्राचीन दुनिया के सात अजूबे कौन-कौन से थे? कितने आज भी मौजूद हैं?

प्राचीन दुनिया के सात अजूबे प्राचीन सभ्यताओं की वास्तुकला और कला के अद्भुत उदाहरण थे। इनमें केवल मिस्र का गीजा स्थित महान पिरामिड आज भी मूल रूप में मौजूद है।

प्राचीन दुनिया के सात अजूबे कौन-कौन से थे?

आज दुनिया में मौजूद ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों की लंबी सूची है, लेकिन करीब दो हजार साल से भी पहले भूमध्यसागरीय दुनिया में कुछ ऐसी विशाल संरचनाएं थीं, जिन्हें अपनी भव्यता और वास्तुकला के कारण ‘दुनिया के सात अजूबों’ के रूप में जाना गया। यह सूची आधुनिक दौर की किसी संस्था द्वारा बनाई गई सूची नहीं थी, बल्कि प्राचीन यूनानी लेखकों और यात्रियों के वर्णनों से विकसित हुई परंपरा थी। इन सात अजूबों में मिस्र का महान पिरामिड, बाबुल के हैंगिंग गार्डन्स, ओलंपिया में ज़्यूस की प्रतिमा, इफिसस का आर्टेमिस मंदिर, हैलिकार्नासस का मकबरा, रोड्स की विशाल प्रतिमा और अलेक्जेंड्रिया का प्रकाश स्तंभ शामिल थे। इनमें आज केवल गीजा का महान पिरामिड ही जीवित बचा है। यूनेस्को भी इसे प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में से एकमात्र जीवित अजूबा बताता है। 

१. गीजा का महान पिरामिड — मिस्र

प्राचीन सात अजूबों में सबसे पुराना और आज तक सुरक्षित बचा स्मारक गीजा का महान पिरामिड है। यह प्राचीन मिस्र के गीजा क्षेत्र में स्थित है और इसे फिरौन खुफू से जोड़ा जाता है। यूनेस्को के अनुसार गीजा के पिरामिड उस व्यापक पुरातात्विक क्षेत्र का हिस्सा हैं, जिसमें मेम्फिस और उसके आसपास के प्राचीन मकबरे, मंदिर और अन्य स्मारक शामिल हैं। इसी परिसर में खुफू का महान पिरामिड भी है। यह पिरामिड प्राचीन मिस्र की स्थापत्य क्षमता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। यूनेस्को इसे प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में से एकमात्र जीवित अजूबा मानता है। यानी सात अजूबों की पूरी सूची में आज मूल रूप में मौजूद स्मारक के तौर पर गीजा का महान पिरामिड सबसे खास है।

२. बाबुल के हैंगिंग गार्डन्स — मेसोपोटामिया

प्राचीन सात अजूबों में बाबुल के हैंगिंग गार्डन्स का नाम भी मिलता है। इन्हें प्राचीन बाबुल से जोड़ा जाता है और परंपरागत विवरणों में इन्हें ऊंचे स्तरों पर बने शानदार बगीचों के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि इन उद्यानों के बारे में ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी अन्य कुछ अजूबों की तुलना में अधिक विवादित है। यूनेस्को के अनुसार प्राचीन बाबुल के साथ हैंगिंग गार्डन्स का संबंध शास्त्रीय ग्रंथों में मिलता है, लेकिन पुरातात्विक स्थल पर इन उद्यानों की निश्चित पहचान को लेकर सावधानी बरतनी पड़ती है। आज बाबुल में प्राचीन शहर के अवशेष मौजूद हैं, लेकिन मूल हैंगिंग गार्डन्स को सात अजूबों में वर्णित रूप में मौजूद नहीं माना जाता।

३. ओलंपिया की ज़्यूस की प्रतिमा — यूनान

प्राचीन यूनान के ओलंपिया में भगवान ज़्यूस को समर्पित विशाल प्रतिमा बनाई गई थी। इसे प्रसिद्ध मूर्तिकार फीडियस की कृति माना जाता है। यूनेस्को के अनुसार ओलंपिया प्राचीन यूनान में ज़्यूस की उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र था और यहां कई महत्वपूर्ण कलाकृतियां बनाई गईं। इनमें ज़्यूस की सोने और हाथीदांत से बनी प्रतिमा भी शामिल थी, जिसे प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में गिना जाता था। यह प्रतिमा आज मौजूद नहीं है। यूनेस्को के अनुसार इसके नष्ट होने की संभावना प्राचीन काल के बाद के दौर से जुड़ी है। 

४. इफिसस का आर्टेमिस मंदिर — वर्तमान तुर्किये

आर्टेमिस का मंदिर प्राचीन शहर इफिसस में स्थित था। यह देवी आर्टेमिस को समर्पित विशाल मंदिर था और अपनी भव्यता के कारण सात अजूबों की सूची में शामिल हुआ। आज मंदिर का मूल विशाल ढांचा मौजूद नहीं है। यूनेस्को के अनुसार प्रसिद्ध आर्टेमिस मंदिर के बहुत कम अवशेष बचे हैं। हालांकि इफिसस का पुरातात्विक स्थल आज भी प्राचीन यूनानी और रोमन सभ्यताओं के महत्वपूर्ण प्रमाणों को संरक्षित किए हुए है। इसलिए यह कहना अधिक सही है कि इफिसस आज भी एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, लेकिन सात अजूबों में शामिल मूल आर्टेमिस मंदिर मौजूद नहीं है।

५. हैलिकार्नासस का मकबरा — वर्तमान तुर्किये

प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में हैलिकार्नासस का मकबरा भी शामिल था। यह आज के तुर्किये के क्षेत्र में स्थित प्राचीन हैलिकार्नासस नगर में बनाया गया था। यह स्मारक इतना प्रसिद्ध हुआ कि बाद के दौर में बड़े और भव्य मकबरों के लिए ‘मौसोलियम’ शब्द के इस्तेमाल की परंपरा इसी नाम से जुड़ी मानी जाती है। भूकंपों और समय के प्रभाव से इस विशाल संरचना को नुकसान पहुंचा और आज इसका मूल स्वरूप मौजूद नहीं है। इसके कुछ वास्तु अवशेष और मूर्तिकला संबंधी सामग्री संग्रहालयों में संरक्षित हैं।

६. रोड्स की विशाल प्रतिमा — यूनान

यूनान के रोड्स द्वीप पर बनी कोलोसस ऑफ रोड्स यानी रोड्स की विशाल प्रतिमा प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में शामिल थी। यह सूर्य देवता हेलिओस को समर्पित विशाल कांस्य प्रतिमा थी। अपनी ऊंचाई और निर्माण तकनीक के कारण यह प्राचीन दुनिया की असाधारण कलाकृतियों में गिनी गई। लेकिन यह प्रतिमा लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। भूकंप के कारण इसके नष्ट होने का उल्लेख प्राचीन स्रोतों में मिलता है। आज इसका मूल ढांचा मौजूद नहीं है।

७. अलेक्जेंड्रिया का प्रकाश स्तंभ — मिस्र

सातवां अजूबा था अलेक्जेंड्रिया का प्रकाश स्तंभ। इसे मिस्र के अलेक्जेंड्रिया के पास फारोस द्वीप पर बनाया गया था। प्राचीन समय में समुद्र के रास्ते अलेक्जेंड्रिया पहुंचने वाले जहाजों के लिए यह महत्वपूर्ण मार्गदर्शक संरचना थी। अपनी विशाल ऊंचाई और समुद्री उपयोगिता के कारण यह प्राचीन इंजीनियरिंग की उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती थी। समय के साथ आए भूकंपों ने इस संरचना को भारी नुकसान पहुंचाया और अंततः इसका मूल स्वरूप समाप्त हो गया।

सात अजूबों में से आज कितने मौजूद हैं?

यह सवाल सबसे अधिक दिलचस्प है। प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में केवल एक—गीजा का महान पिरामिड—आज भी मौजूद है। यूनेस्को स्पष्ट रूप से इसे प्राचीन दुनिया के सात अजूबों का एकमात्र जीवित उदाहरण बताता है। हालांकि बाकी अजूबों से जुड़े कुछ पुरातात्विक अवशेष, खंडहर, मूर्तियां या संबंधित स्थल आज भी मौजूद हैं। उदाहरण के लिए बाबुल के प्राचीन शहर के अवशेष आज भी पुरातात्विक महत्व रखते हैं, जबकि इफिसस में आर्टेमिस मंदिर के बहुत कम अवशेष दिखाई देते हैं। इसलिए ‘एक अजूबा बचा है’ कहने का मतलब यह नहीं है कि बाकी छह स्थानों पर इतिहास का कोई निशान नहीं बचा। कई जगहों पर उनके खंडहर या पुरातात्विक अवशेष आज भी शोध और संरक्षण का विषय हैं।

क्यों खास थे ये सात अजूबे?

इन स्मारकों की खासियत सिर्फ उनका आकार नहीं था। इनमें धार्मिक आस्था, राजसत्ता, कला, इंजीनियरिंग और प्राचीन सभ्यताओं की तकनीकी क्षमता का मेल दिखाई देता था। मिस्र के पिरामिड प्राचीन मिस्र की स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं को समझने में मदद करते हैं। ओलंपिया प्राचीन यूनानी धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण केंद्र था। बाबुल प्राचीन मेसोपोटामिया की शक्ति और नगरीय सभ्यता का प्रतीक था। इसी तरह इफिसस और अन्य स्थलों के स्मारक प्राचीन भूमध्यसागरीय दुनिया की कला और वास्तुकला को सामने रखते हैं। 

इतिहास में क्यों याद किए जाते हैं सात अजूबे?

प्राचीन सात अजूबों की सूची को केवल पर्यटन या आश्चर्य की सूची के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। यह उस दौर की मानव कल्पनाशक्ति और निर्माण क्षमता का दस्तावेज भी है। आज आधुनिक मशीनें और तकनीक उपलब्ध हैं, लेकिन प्राचीन सभ्यताओं ने सीमित साधनों के बावजूद विशाल धार्मिक, राजकीय और सार्वजनिक संरचनाएं खड़ी कीं। इन स्मारकों के निर्माण, उपयोग और विनाश की कहानी से प्राचीन समाजों की अर्थव्यवस्था, धर्म, राजनीति और कला के बारे में भी जानकारी मिलती है।

निष्कर्ष

प्राचीन दुनिया के सात अजूबे मानव सभ्यता के इतिहास में वास्तुकला और कला की असाधारण उपलब्धियों के रूप में याद किए जाते हैं। इनमें से छह समय, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण नष्ट हो गए, जबकि गीजा का महान पिरामिड आज भी खड़ा है। बाकी छह अजूबों के मूल ढांचे भले ही समाप्त हो गए हों, लेकिन उनके नाम और उनसे जुड़े पुरातात्विक अवशेष आज भी प्राचीन सभ्यताओं की उपलब्धियों की कहानी बताते हैं। यही वजह है कि हजारों साल बाद भी सात अजूबों की यह सूची इतिहास, पुरातत्व और वास्तुकला में लोगों की दिलचस्पी बनाए हुए है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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