कनाडा और यूरोपीय संघ गहरी साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कार्नी ने युवाओं को दोनों तरफ रहने, काम करने और पढ़ने के अवसर देने का प्रस्ताव रखा है।
कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश तेज हो गई है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूरोपीय संसद में गहरी और ज्यादा एकीकृत साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिसमें युवाओं के लिए दोनों तरफ रहने, काम करने और पढ़ाई करने के अवसर बढ़ाने की बात शामिल है।
इस पहल को पूर्ण यूरोपीय संघ सदस्यता के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन ने कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला “एसोसिएट सदस्य” बनाने की दिशा में दरवाजा खोलने की बात कही है। हालांकि इस दर्जे की कानूनी और संस्थागत रूपरेखा अभी तय नहीं है।
कार्नी ने 17 सितंबर को यूरोपीय संसद में अपने संबोधन में कहा कि कनाडा और यूरोप को रणनीतिक क्षमताओं के कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहिए।
इनमें महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा उद्योग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने गैर-कृषि वस्तुओं और कई सेवाओं के लिए ज्यादा सुगम डिजिटल व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने की भी बात कही।
लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के प्रस्ताव में युवाओं को कनाडा और यूरोप, दोनों तरफ रहने, काम करने और पढ़ने के अवसर देने की बात खास तौर पर सामने आई है।
यही इस पूरी पहल का सबसे चर्चित पहलू है। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच भविष्य में कामगारों की आवाजाही आसान बनाने को लेकर बातचीत चल रही है।
लेकिन अभी ऐसा कोई अंतिम समझौता लागू नहीं हुआ है, जिसके तहत सभी कनाडाई नागरिकों को यूरोपीय संघ के देशों में बिना किसी वीजा या अनुमति के रहने और काम करने का अधिकार मिल जाए।
कनाडाई सरकार ने युवाओं की आवाजाही और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में प्रस्ताव रखा है। कार्नी ने खुद कहा है कि इस नई साझेदारी का ढांचा दोनों पक्ष मिलकर तय करेंगे।
इसलिए मौजूदा स्थिति को यूरोपीय संघ में कनाडाई नागरिकों के लिए मुक्त आवाजाही की शुरुआत कहना अभी जल्दबाजी होगी।
यूरोपीय संघ की ओर से कनाडा को “एसोसिएट सदस्य” बनाने की बात पहली बार इस स्तर पर सामने आई है। इस व्यवस्था की मौजूदा संधियों में कोई स्थापित मिसाल नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष की पहल को लागू करने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की सहमति जरूरी होगी। अगर संधियों में बदलाव की जरूरत पड़ती है, तो प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र में शामिल नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन जैसे देशों के मॉडल को कनाडा पर सीधे लागू करना भी प्रस्तावित व्यवस्था नहीं है। कनाडा और यूरोपीय संघ अपने लिए अलग ढांचा तैयार करने की बात कर रहे हैं।
यूरोप और कनाडा पहले से व्यापार और रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए हैं। दोनों के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता भी लागू है।
अब बातचीत का दायरा व्यापार से आगे बढ़कर रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक जा रहा है।
यूरोपीय पक्ष के लिए कनाडा ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और आर्कटिक क्षेत्र के कारण रणनीतिक महत्व रखता है। कनाडा यूरोपीय बाजार, शोध क्षमता और औद्योगिक आधार को अपने लिए महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।
कनाडा की यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकी ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका के साथ उसके व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ा है।
कार्नी सरकार व्यापारिक निर्भरता को अलग-अलग साझेदारों में बांटने और यूरोप के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करने की नीति पर जोर दे रही है। अमेरिकी बाजार कनाडा के लिए अब भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यूरोप की ओर बढ़ना अमेरिका से आर्थिक संबंध खत्म करने की नीति नहीं है।
कार्नी ने भी अपनी यूरोपीय संसद की बातचीत को किसी नए वैश्विक गुट के निर्माण के बजाय कनाडा की रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने के प्रयास के रूप में पेश किया।
अगर प्रस्तावित व्यवस्था आगे बढ़ती है, तो कनाडाई और यूरोपीय युवाओं के लिए शिक्षा और काम के अवसर बढ़ सकते हैं।
कार्नी ने कनाडा को यूरोपीय संघ के एरास्मस प्लस कार्यक्रम से जोड़ने और भविष्य के शोध सहयोग में भागीदारी बढ़ाने का समर्थन किया है। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं के बीच आदान-प्रदान का दायरा बढ़ सकता है।
कामगारों की आवाजाही के मामले में भी भविष्य में कुछ नए कार्यक्रम सामने आ सकते हैं। लेकिन कनाडाई अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसे कार्यक्रमों की सीमा और शर्तें बातचीत तथा प्रांतीय परामर्श के बाद तय होंगी।
नहीं। मौजूदा प्रस्ताव पूर्ण सदस्यता से अलग है।
कनाडा भौगोलिक रूप से यूरोप के बाहर है और कार्नी ने भी स्पष्ट किया है कि उनका प्रस्ताव यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता का नहीं है। वे एक अलग और विशेष साझेदारी चाहते हैं।
यूरोपीय संघ के भीतर भी इस प्रस्ताव को लेकर कई कानूनी सवाल हैं। “एसोसिएट सदस्य” की अवधारणा अभी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है और इसके अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को तय करना बाकी है।
सबसे बड़ी चुनौती इस बात को लेकर है कि कनाडा को कितनी सुविधा दी जाए और बदले में उसे यूरोपीय संघ के कौन से नियम स्वीकार करने होंगे।
यूरोपीय संघ का एकल बाजार वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों की आवाजाही जैसे आपस में जुड़े सिद्धांतों पर आधारित है। किसी गैर-सदस्य देश को इनमें से कुछ सुविधाएं देना कानूनी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है।
दूसरी चुनौती यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की सहमति है। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की पूर्ण पुष्टि भी अभी सभी सदस्य देशों ने नहीं की है। रिपोर्ट के अनुसार 27 में से 10 देशों ने अब तक इसकी पूर्ण पुष्टि नहीं की है।
कनाडा में भी इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।
सत्तारूढ़ सरकार इसे आर्थिक विविधीकरण, रणनीतिक स्वायत्तता और यूरोप के साथ दीर्घकालिक सहयोग के रूप में पेश कर रही है। विपक्षी सांसदों ने दूसरी तरफ संप्रभुता, आव्रजन और संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाए हैं।
इन राजनीतिक दावों में कई ऐसे हिस्से हैं जो अभी प्रस्तावित व्यवस्था के अंतिम नियमों पर निर्भर हैं। इसलिए मौजूदा स्थिति में यह कहना उचित नहीं होगा कि नई साझेदारी अपने आप खुली सीमा या पूर्ण मुक्त आवाजाही लागू कर देगी।
कार्नी ने कहा है कि नई साझेदारी के ढांचे पर कनाडाई संसद में बहस होगी और अंतिम संरचना पर मतदान भी होगा। उन्होंने अगले कनाडा-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन को भी अहम अगला पड़ाव बताया है।
इस बीच दोनों पक्ष डिजिटल सहयोग, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, शोध और लोगों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों पर काम आगे बढ़ा सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यही है कि राजनीतिक घोषणा को किस तरह ठोस कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था में बदला जाता है।
कनाडाई नागरिकों के लिए यूरोप में पढ़ाई और रोजगार के नए अवसरों की संभावना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन फिलहाल इसे यूरोप में रहने और काम करने का नया अधिकार मानना सही नहीं होगा।
कार्नी की योजना एक व्यापक कनाडा-यूरोप साझेदारी का प्रस्ताव है, जबकि “एसोसिएट सदस्यता” यूरोपीय आयोग की ओर से सामने आया नया विचार है। इसके अधिकार, दायित्व और कानूनी स्वरूप अभी तय होने बाकी हैं।
आने वाले महीनों में कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत यह तय करेगी कि यह पहल केवल रणनीतिक साझेदारी तक रहती है या लोगों, व्यापार और निवेश की आवाजाही में भी ठोस बदलाव लाती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।