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तुर्की में LGBTQ+ कार्यकर्ताओं पर बड़ी कार्रवाई, दर्जनों हिरासत में, 162 लोगों पर जांच

Harish Qureshi • 2026-09-16 13:05:38
तुर्की में LGBTQ+ कार्यकर्ताओं पर बड़ी कार्रवाई, दर्जनों हिरासत में, 162 लोगों पर जांच

तुर्की में LGBTQ+ संगठनों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में दर्जनों लोग हिरासत में लिए गए हैं। सरकार का कहना है कि अभियान परिवार, बच्चों और सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए है, जबकि अधिकार समूह इसे नागरिक स्वतंत्रताओं पर दबाव बता रहे हैं।


इस्तांबुल, तुर्की | 16 सितंबर 2026

By Mohd Haris


तुर्की में LGBTQ+ संगठनों और उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। पिछले कुछ दिनों में कई शहरों में कार्यालयों, घरों और मनोरंजन स्थलों पर छापेमारी की गई और दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकार ने इस अभियान को परिवार और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई बताया है।


मामले ने तुर्की में नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति के अधिकार और LGBTQ+ समुदाय के साथ राज्य के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यूरोपीय मानवाधिकार अधिकारियों और अधिकार संगठनों ने कार्रवाई पर चिंता जताई है।


तुर्की में व्यापक पुलिस कार्रवाई


13 सितंबर से तुर्की के कई प्रांतों में LGBTQ+ संगठनों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ पुलिस अभियान शुरू हुआ। इस्तांबुल, अंकारा, इज़मिर, आयदीन और मेर्सिन समेत कई इलाकों में छापेमारी की गई। अधिकारियों के मुताबिक जांच में 15 प्रांत शामिल हैं।


तुर्की के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने बताया कि जांच 162 संदिग्धों, 9 संगठनों और 13 कारोबारों से जुड़ी है। यह संख्या जांच के दायरे में आए लोगों को दर्शाती है, इसे गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।


कितने लोग हिरासत में लिए गए


अलग-अलग चरणों में हिरासत की संख्या बढ़ी है। रॉयटर्स के अनुसार 15 सितंबर तक कम से कम 31 लोगों को मुकदमे से पहले न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसी दौरान अंकारा और इस्तांबुल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 126 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया।


इससे पहले अधिकारियों ने सप्ताहांत की छापेमारी में कम से कम 47 लोगों को हिरासत में लेने की जानकारी दी थी। अधिकार संगठन काओस जीएल ने हिरासत और कानूनी कार्रवाई से प्रभावित LGBTQ+ कार्यकर्ताओं की संख्या इससे अधिक बताई थी।


सरकार ने क्या कहा


तुर्की सरकार ने अभियान को “माई फैमिली इज़ सेफ” नाम दिया है। न्याय मंत्री के मुताबिक इसका मकसद बच्चों, परिवार की संस्था और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करना है। अधिकारियों ने कुछ मामलों में अश्लील सामग्री, नाबालिगों पर कथित प्रभाव और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोपों की जांच की बात कही है।


सरकार ने यह भी कहा है कि जांच केवल LGBTQ+ पहचान या गतिविधि तक सीमित नहीं है। अभियोजन पक्ष ने कुछ संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक आरोपों की जांच शुरू की है। इसलिए सभी हिरासतों को एक ही कानूनी आरोप के तहत रखना सही नहीं होगा।


कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन


15 सितंबर को इस्तांबुल के चागलयान न्यायालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने LGBTQ+ कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अदालत के बाहर बयान देने से रोका और कई लोगों को हिरासत में लिया। अंकारा में भी LGBTQ+ समर्थक प्रदर्शनकारियों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।


रॉयटर्स के अनुसार इस्तांबुल में पुलिस कार्रवाई के दौरान कम से कम 150 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। यह संख्या LGBTQ+ संगठनों के खिलाफ मूल छापेमारी में हिरासत में लिए गए लोगों से अलग है और प्रदर्शन से जुड़ी कार्रवाई को दर्शाती है।


मानवाधिकार संगठनों की आपत्ति


तुर्की के मानवाधिकार संगठन और LGBTQ+ अधिकार समूहों ने सरकार के अभियान की आलोचना की है। उनका कहना है कि “परिवार मूल्यों” और “बच्चों की सुरक्षा” का हवाला देकर नागरिक समाज और LGBTQ+ समुदाय पर व्यापक कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जाना चाहिए।


एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 15 सितंबर को कहा कि 60 से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 23 लोगों को मुकदमे से पहले हिरासत में रखा गया है। संगठन ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई और कार्रवाई रोकने की मांग की।


यूरोप की ओर से भी चिंता


यूरोप की परिषद के मानवाधिकार आयुक्त माइकल ओ'फ्लाहर्टी ने गिरफ्तारियों, छापेमारी और ऑनलाइन प्रतिबंधों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल “परिवार मूल्यों” या “बच्चों की सुरक्षा” का संदर्भ मानवाधिकारों पर प्रतिबंध लगाने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं हो सकता।


यूरोपीय आयोग ने भी LGBTQ+ कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार संगठनों और कारोबारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने लोगों की लैंगिक पहचान और यौन अभिविन्यास से अलग उनके अधिकारों और गरिमा के सम्मान पर जोर दिया।


ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी निशाने पर


कार्रवाई केवल पुलिस छापेमारी तक सीमित नहीं रही। LGBTQ+ संगठनों, कार्यकर्ताओं और कुछ स्वतंत्र मीडिया से जुड़े वेबसाइटों और सोशल मीडिया खातों तक पहुंच भी प्रतिबंधित की गई है। एमनेस्टी के मुताबिक 180 से अधिक सोशल मीडिया खातों और कई वेबसाइटों पर रोक या प्रतिबंध की जानकारी सामने आई है।


इनमें एमनेस्टी इंटरनेशनल तुर्किये की एक्स प्रोफाइल भी शामिल है। ऑनलाइन प्रतिबंधों को लेकर अधिकार संगठनों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल नागरिक अधिकारों पर सवाल उठाए हैं।


तुर्की में LGBTQ+ अधिकारों की पृष्ठभूमि


तुर्की में समान-लिंगी संबंध अपने आप में अपराध नहीं हैं। हालांकि LGBTQ+ समुदाय लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक दबाव का सामना करता रहा है। इस्तांबुल प्राइड पर 2015 से प्रतिबंध है और इसके बाद आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों को पुलिस ने रोक दिया।


राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन की सरकार ने हाल के वर्षों में परिवार और जनसंख्या नीति को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया है। मौजूदा अभियान को भी इसी व्यापक नीति के संदर्भ में सरकार ने पेश किया है।


मामले का कानूनी पहलू


मौजूदा कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 162 लोग जांच के दायरे में हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सभी गिरफ्तार या जेल भेजे गए हैं। अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग संदिग्धों के खिलाफ अलग कानूनी प्रक्रिया चल रही है।


इसी तरह प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों और मूल LGBTQ+ छापेमारी में पकड़े गए लोगों के आंकड़े भी अलग हैं। आगे अदालतों के फैसले और अभियोजन की कार्रवाई से प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।


आगे क्या


अब निगाह अदालतों में चल रही प्रक्रियाओं और सरकार की जांच पर है। कई लोगों को मुकदमे से पहले हिरासत में रखा गया है, जबकि अन्य मामलों में पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया जारी है।


इस घटनाक्रम ने तुर्की में LGBTQ+ अधिकारों, नागरिक समाज की स्वतंत्रता और राज्य की परिवार नीति के बीच टकराव को फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल स्थापित तथ्य यह है कि कई प्रांतों में व्यापक छापेमारी हुई, दर्जनों लोग हिरासत में लिए गए और सरकार की जांच 162 संदिग्धों तक पहुंची है। इस कार्रवाई की कानूनी वैधता और प्रत्येक मामले का अंतिम नतीजा अदालतों की प्रक्रिया से तय होगा।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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