मोरक्को से स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूटा में बड़ी संख्या में प्रवासियों के प्रवेश के बाद यूरोपीय संघ के भीतर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। स्पेन ने कुछ सदस्य देशों की आलोचना करते हुए साझा यूरोपीय प्रतिक्रिया की मांग की है।
📍 स्यूटा, स्पेन
📰 2 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूटा में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में प्रवासियों के प्रवेश ने पूरे यूरोप की राजनीति को झकझोर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने कुछ यूरोपीय संघ सदस्य देशों की प्रतिक्रिया पर तीखी नाराज़गी जताते हुए उसे "स्वार्थी, ध्रुवीकरण करने वाली और गैर-कानूनी" करार दिया।
सांचेज़ का कहना है कि यह केवल स्पेन की सीमा का नहीं बल्कि पूरे यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा का मामला है। उनके अनुसार ऐसे संकट में राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय साझा कार्रवाई और सहयोग की आवश्यकता है।
हाल के दिनों में मोरक्को की ओर से हजारों प्रवासियों ने स्यूटा की सीमा पार करने की कोशिश की। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार लगभग 50,000 से 60,000 लोगों ने कम समय में सीमा की ओर रुख किया, जिससे स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर भारी दबाव पड़ा। इस दौरान कम से कम 67 लोगों की मौत की भी खबर है।
स्पेन का कहना है कि उसने 48 घंटे के भीतर सीमा पर नियंत्रण काफी हद तक बहाल कर लिया और अधिकांश प्रवासियों को मोरक्को वापस भेज दिया।
संकट के बाद इटली सहित कई यूरोपीय देशों ने स्पेन की प्रवासन नीति पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन पर कठोर कदम उठाने की मांग की। जवाब में सांचेज़ ने कहा कि कुछ सरकारें इस मानवीय संकट का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं।
उन्होंने EU गृह मंत्रियों की आपात बैठक बुलाने की मांग भी की ताकि पूरे यूरोप के स्तर पर समन्वित रणनीति बनाई जा सके।
स्यूटा उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन का स्वायत्त क्षेत्र है और यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा का हिस्सा माना जाता है। मोरक्को लंबे समय से इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है, जबकि स्पेन इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। इसी कारण यह इलाका वर्षों से प्रवासन और कूटनीतिक तनाव का केंद्र रहा है।
स्पेन का तर्क है कि प्रवासी संकट से निपटना पूरे यूरोपीय संघ की साझा जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर कुछ यूरोपीय सरकारों का कहना है कि सीमा सुरक्षा को और सख्त बनाने तथा अवैध प्रवासन को रोकने के लिए स्पेन को अपनी नीतियों में बदलाव करना चाहिए।
यह पुष्टि हो चुकी है कि स्यूटा में बड़े पैमाने पर प्रवासी पहुंचे और इसके बाद स्पेन तथा कई EU देशों के बीच राजनीतिक मतभेद बढ़े। हालांकि इस संकट के पीछे सभी कारणों, संभावित राजनीतिक भूमिका या किसी देश की मंशा पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच और कूटनीतिक बातचीत जारी है।
यह संकट यूरोपीय संघ की प्रवासन नीति की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक बनता जा रहा है। इससे सदस्य देशों के बीच एकजुटता, सीमा सुरक्षा और शरणार्थी नीति पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं।
सीमा पर अचानक बढ़ी भीड़ से स्थानीय प्रशासन, राहत व्यवस्था और सुरक्षा संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा। स्थानीय व्यापार और पर्यटन भी प्रभावित हुए हैं, जबकि राहत शिविरों और सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने की आशंका है।
यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की संभावित बैठक, स्पेन और मोरक्को के बीच समन्वय तथा EU की साझा प्रवासन नीति आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगी। यदि सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बनती तो यह विवाद यूरोपीय राजनीति में और गहरा सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।