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रोजगार पर अखिलेश के बयान का राजभर ने दिया जवाब, योगी सरकार की 9.5 लाख भर्तियों का किया जिक्र

Mohammad Naved • 2026-09-16 11:15:53
रोजगार पर अखिलेश के बयान का राजभर ने दिया जवाब, योगी सरकार की 9.5 लाख भर्तियों का किया जिक्र

उत्तर प्रदेश में रोजगार को लेकर सपा और सरकार के बीच सियासी बहस तेज है। अखिलेश यादव ने आउटसोर्सिंग खत्म कर पक्की नौकरी देने की बात कही, जबकि ओम प्रकाश राजभर ने योगी सरकार के कार्यकाल में 9.5 लाख सरकारी नियुक्तियों का दावा सामने रखा।

📍 लखनऊ
🗓️ 16 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved

रोजगार बना यूपी की सियासत का अहम मुद्दा

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार और सरकारी नौकरी का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्ता में आने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने और युवाओं को पक्की नौकरी देने की बात कही है। इसके जवाब में योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सरकार की ओर से की गई सरकारी नियुक्तियों का हवाला देते हुए विपक्ष के रोजगार संबंधी सवालों पर पलटवार किया है।

राजभर की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। हाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने कार्यकाल के दौरान करीब 9.5 लाख सरकारी नियुक्तियां होने की बात कही है।

अखिलेश यादव ने क्या कहा

अखिलेश यादव ने 10 सितंबर 2026 को रोजगार के मुद्दे पर कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म की जाएगी और युवाओं को पक्की नौकरी देने की दिशा में काम होगा। उनका बयान सरकारी और संविदा रोजगार की प्रकृति को लेकर सपा की राजनीतिक स्थिति को सामने रखता है।

आउटसोर्सिंग व्यवस्था लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस का विषय रही है। विपक्षी दल संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के रोजगार की स्थिरता तथा आरक्षण से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं। इसी मुद्दे पर सपा ने स्थायी नियुक्तियों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपना रुख सामने रखा है।

राजभर ने गिनाईं सरकारी नियुक्तियां

अखिलेश यादव के रोजगार संबंधी बयानों के बीच ओम प्रकाश राजभर ने योगी सरकार के रोजगार रिकॉर्ड को सामने रखा। राजभर के मुताबिक योगी सरकार ने करीब 9.5 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा किया गया है।

यह आंकड़ा केवल राजभर के बयान तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सितंबर 2026 में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अपने कार्यकाल में करीब 9.5 लाख सरकारी नियुक्तियां होने का दावा किया। 13 सितंबर को लखनऊ में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुल करीब 16.5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें 9.5 लाख नियुक्तियां उनके कार्यकाल में हुईं।

सरकारी आंकड़ा और राजनीतिक दावा, दोनों को समझना जरूरी

रोजगार के इस सियासी विवाद में एक अहम फर्क सरकारी नियुक्तियों और व्यापक रोजगार के बीच है। 9.5 लाख का आंकड़ा सरकारी नौकरियों और नियुक्तियों से जुड़ा दावा है। इसे प्रदेश में पैदा हुए कुल रोजगार के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सरकारी नौकरियों के अलावा निवेश, कौशल विकास और विभिन्न योजनाओं के जरिए रोजगार अवसर बढ़ने की भी बात कही है। सितंबर में उनके एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी पक्ष ने रोजगार से जुड़े अन्य अवसरों का भी उल्लेख किया।

इसलिए रोजगार पर बहस करते समय सरकारी भर्ती, निजी क्षेत्र की नौकरियां, आउटसोर्सिंग, स्वरोजगार और निवेश से पैदा होने वाले रोजगार को अलग-अलग देखना जरूरी है।

भर्ती प्रक्रिया पर भी जारी है राजनीतिक बहस

योगी सरकार अपने भर्ती रिकॉर्ड को पारदर्शी प्रक्रिया से जोड़ती रही है। मुख्यमंत्री ने हालिया कार्यक्रमों में कहा कि नियुक्तियों में भेदभाव और लेनदेन की गुंजाइश नहीं रखी गई।

वहीं विपक्ष भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और आउटसोर्सिंग जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। समाजवादी पार्टी ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को खत्म करने की घोषणा को युवाओं के रोजगार अधिकार और स्थायी नियुक्ति से जोड़ा है।

दोनों पक्षों के दावों में राजनीतिक संदर्भ मौजूद है। इसलिए सरकारी नियुक्तियों की संख्या और रोजगार की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक भर्ती रिकॉर्ड, विभागवार नियुक्तियां और रोजगार के स्वतंत्र आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

2027 से पहले रोजगार पर बढ़ेगी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में रोजगार, भर्ती, आरक्षण और युवाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों की रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

अखिलेश यादव की ओर से आउटसोर्सिंग खत्म करने और पक्की नौकरी की बात इसी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। दूसरी ओर राजभर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकारी नियुक्तियों के आंकड़े सामने रखकर अपने शासनकाल के रोजगार रिकॉर्ड को रेखांकित कर रहे हैं।

इस बहस में केवल बयान और दावों से आगे जाकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी भर्तियां पूरी हुईं, कितने पद खाली हैं, चयन प्रक्रिया में कितना समय लगा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा शर्तें क्या हैं।

युवाओं के लिए असली सवाल क्या है

रोजगार की बहस का असर सीधे युवाओं पर पड़ता है। सरकारी नौकरी के सीमित अवसरों के बीच भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता, समय पर परिणाम, नियुक्ति पत्र, आरक्षण व्यवस्था और रोजगार की स्थिरता बड़े सवाल हैं।

उत्तर प्रदेश में रोजगार को लेकर भविष्य की राजनीतिक बहस इसलिए केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि किस सरकार ने कितनी नियुक्तियां कीं। यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहेगा कि युवाओं को स्थायी रोजगार, बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और निजी क्षेत्र में टिकाऊ अवसर कितने मिले।

आगे क्या

रोजगार और भर्ती का मुद्दा आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और प्रमुख हो सकता है। सपा स्थायी रोजगार और आउटसोर्सिंग खत्म करने की अपनी नीति को आगे रख रही है, जबकि सरकार अपनी नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

फिलहाल 9.5 लाख सरकारी नियुक्तियों का आंकड़ा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों द्वारा प्रस्तुत किया गया सरकारी दावा है। दूसरी ओर अखिलेश यादव का जोर भविष्य की रोजगार नीति और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव पर है। पाठकों के लिए दोनों पहलुओं को अलग-अलग समझना जरूरी है, क्योंकि सरकारी नियुक्तियों की संख्या और प्रदेश में कुल रोजगार की स्थिति एक ही आंकड़ा नहीं है।

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Mohammad Naved

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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