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24 अगस्त से नया सिम लेने का नियम सख्त, 9 कनेक्शन के बाद रोक

Apurva Choudhary • 2026-08-20 20:53:57
24 अगस्त से नया सिम लेने का नियम सख्त, 9 कनेक्शन के बाद रोक
नया सिम कार्ड नियम 2026 के तहत नौ मोबाइल कनेक्शन वाले ग्राहक को नया कनेक्शन जारी नहीं किया जाएगा। दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को सीमा की जांच कड़ाई से करने के निर्देश दिए हैं। जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर में सीमा छह है। उद्देश्य फर्जी कनेक्शन और साइबर दुरुपयोग रोकना है।

Location: नई दिल्ली, भारत
Date: 20 अगस्त 2026
By: Apurva Choudhary 

24 अगस्त से नया सिम लेने का नियम सख्त, 9 कनेक्शन के बाद रोक
नई दिल्ली। नया सिम कार्ड नियम 2026 के तहत मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा को लागू करने की प्रक्रिया अब और सख्त होने जा रही है। दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे ग्राहक के नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं करने का निर्देश दिया है, जिसके नाम पर पहले से नौ मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। यह व्यवस्था सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों के बीच ग्राहक के कुल कनेक्शनों को ध्यान में रखेगी। 
मौजूदा सरकारी व्यवस्था के मुताबिक सामान्य क्षेत्रों में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम नौ मोबाइल कनेक्शन की सीमा है। जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के लाइसेंस सेवा क्षेत्रों में यह सीमा छह कनेक्शन है। 

क्या बदलेगा 24 अगस्त से?
दूरसंचार विभाग के नए निर्देश के मुताबिक 24 अगस्त 2026 से उन ग्राहकों के लिए नया मोबाइल कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया रोकी जाएगी, जिनके नाम पर पहले से नौ कनेक्शन मौजूद हैं। इस निर्देश की जानकारी टेलीकॉम ऑपरेटरों को जारी आधिकारिक सर्कुलर के जरिए दी गई है, जैसा कि आर्थिक रिपोर्टिंग में सामने आया है। 
इसका सीधा मतलब यह है कि किसी ग्राहक के नाम पर अलग-अलग कंपनियों के कुल नौ मोबाइल नंबर हैं, तो वह दसवां कनेक्शन लेने का पात्र नहीं होगा। सीमा किसी एक कंपनी के सिम कार्ड तक सीमित नहीं है।

9 सिम की सीमा कैसे काम करेगी?
यह व्यवस्था ग्राहक की कुल मोबाइल कनेक्शन संख्या पर आधारित है। यानी अगर किसी व्यक्ति के नाम पर एक ऑपरेटर के चार, दूसरे के तीन और तीसरे ऑपरेटर के दो नंबर हैं, तो कुल संख्या नौ मानी जाएगी।
दूरसंचार विभाग ने पहले भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित सीमा से अधिक कनेक्शन नियमों के विपरीत हैं। ऐसे मामलों में ग्राहक को अतिरिक्त नंबरों को बंद कराने या निर्धारित सीमा के भीतर लाने की प्रक्रिया अपनानी होती है। 
सरकारी निर्देशों के अनुसार सीमा से अधिक पाए गए कनेक्शनों की पहचान डेटा एनालिटिक्स के जरिए की जा सकती है और संबंधित टेलीकॉम कंपनियों के माध्यम से री-वेरिफिकेशन कराया जाता है। 

जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में अलग नियम
देश के ज्यादातर हिस्सों में नौ मोबाइल कनेक्शन की सीमा लागू है। लेकिन जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के संबंधित लाइसेंस सेवा क्षेत्रों में अधिकतम छह कनेक्शन की सीमा है। 
इसलिए इन क्षेत्रों के ग्राहकों पर सामान्य नौ कनेक्शन वाली सीमा लागू नहीं होगी। छह कनेक्शन की सीमा पार होने पर संबंधित प्रक्रिया अलग नियमों के तहत चलेगी।

फोटो आधारित वेरिफिकेशन का क्या मतलब है?
नए कनेक्शन की जांच को केवल नंबरों की गिनती तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक तय सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की पहचान संबंधी जानकारी और फोटो का इस्तेमाल भी वेरिफिकेशन प्रक्रिया में किया जाएगा।
इसका मकसद यह पता लगाना है कि एक ही व्यक्ति अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के जरिए निर्धारित सीमा से ज्यादा कनेक्शन हासिल न कर सके। हालांकि फोटो आधारित प्रक्रिया के प्रत्येक तकनीकी चरण की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में सीमित है, इसलिए इसे केवल उपलब्ध निर्देशों के आधार पर ही समझना चाहिए।
दूरसंचार विभाग पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स आधारित एएसटीआर प्रणाली का इस्तेमाल संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए करता है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार एएसटीआर ऐसे कनेक्शनों की पहचान कर सकता है जो फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए हों या निर्धारित सीमा से अधिक हों। 

डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म क्या करता है?
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म यानी डीआईपी दूरसंचार विभाग का सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। इसे टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विकसित किया गया है। 

डीआईपी पर दूरसंचार कंपनियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और अन्य संबंधित संस्थानों के बीच सूचना साझा की जाती है। फरवरी 2026 में सरकार ने बताया था कि इस प्लेटफॉर्म से 1,200 से अधिक संगठन जुड़े हुए थे। 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एएसटीआर द्वारा संदिग्ध पाए गए 88 लाख से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन री-वेरिफिकेशन में विफल रहने के बाद डिस्कनेक्ट किए जा चुके थे। 

पुराने 9 से ज्यादा नंबरों का क्या होगा?
अगर किसी व्यक्ति के नाम पर पहले से निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं, तो मामला सिर्फ नया सिम जारी नहीं होने तक सीमित नहीं है।
दूरसंचार विभाग के पुराने निर्देशों में कहा गया है कि सीमा से अधिक कनेक्शनों को डिस्कनेक्ट किया जाना चाहिए और बाद में हासिल किए गए कनेक्शन पहले बंद किए जा सकते हैं, ताकि कुल संख्या निर्धारित सीमा के भीतर लाई जा सके। 
इसलिए जिन ग्राहकों के नाम पर लंबे समय से कई नंबर चल रहे हैं, उनके लिए अपने मोबाइल कनेक्शनों की सूची की जांच करना महत्वपूर्ण है।
अपने नाम पर कितने सिम हैं, कैसे जांचें?
दूरसंचार विभाग की संचार साथी सेवा के जरिए नागरिक अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देख सकते हैं। डीओटी के ई-सर्विस पोर्टल पर भी “Know Mobile Connections in Your Name” सुविधा उपलब्ध है। 
अगर सूची में कोई ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसे ग्राहक ने जारी नहीं कराया है या जिसकी अब जरूरत नहीं है, तो संचार साथी की संबंधित सुविधा के जरिए उसके बारे में कार्रवाई की जा सकती है।
यह सेवा सिर्फ नए सिम की सीमा जानने के लिए नहीं, बल्कि पहचान के नाम पर चल रहे अनधिकृत मोबाइल कनेक्शन की निगरानी के लिए भी उपयोगी है। 

सरकार ऐसा क्यों कर रही है?
मोबाइल नंबर अब केवल फोन कॉल की सुविधा नहीं रह गया है। बैंकिंग, यूपीआई, ओटीपी, सोशल मीडिया और कई डिजिटल सेवाओं में मोबाइल नंबर पहचान और प्रमाणीकरण का अहम माध्यम बन चुका है।
ऐसे में फर्जी दस्तावेजों या गलत पहचान पर हासिल मोबाइल कनेक्शन साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो सकते हैं। डीओटी का डिजिटल इंटेलिजेंस ढांचा इसी तरह के दुरुपयोग की पहचान और कार्रवाई के लिए विकसित किया गया है। 
फरवरी 2026 में सरकार ने बताया था कि डीआईपी और संबंधित प्रणालियों के जरिए संदिग्ध कनेक्शनों पर कार्रवाई की गई और संभावित वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने में भी मदद मिली। 

क्या हर 9 सिम वाले व्यक्ति का नंबर बंद होगा?
नहीं। उपलब्ध नियमों का सीधा असर दसवां नया कनेक्शन लेने पर है।
अगर किसी व्यक्ति के नाम पर नौ वैध मोबाइल कनेक्शन हैं और वह निर्धारित सीमा के भीतर है, तो केवल नौ कनेक्शन होने की वजह से उसके मौजूदा नंबर अपने आप बंद नहीं होते।
हालांकि यदि किसी ग्राहक के नाम पर निर्धारित सीमा से अधिक नंबर पाए जाते हैं या किसी कनेक्शन की वैधता पर सवाल उठता है, तो री-वेरिफिकेशन और डिस्कनेक्शन की प्रक्रिया लागू हो सकती है। 

23 अगस्त और 30 नवंबर की तारीख का क्या महत्व है?
उपलब्ध रिपोर्टों में 23 अगस्त से सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की जानकारी और फोटो उपलब्ध कराने तथा 24 अगस्त से नए कनेक्शन पर रोक संबंधी प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। वहीं तकनीकी इंटीग्रेशन के लिए 30 नवंबर 2026 तक की समयसीमा का उल्लेख किया गया है।
हालांकि इन तकनीकी चरणों की पूरी आधिकारिक विस्तृत अधिसूचना सार्वजनिक डीओटी पोर्टल पर खोज के दौरान स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं मिली। इसलिए इन तारीखों को अंतिम तकनीकी कार्यान्वयन विवरण के रूप में पेश करने के बजाय संबंधित निर्देशों की रिपोर्टिंग के रूप में देखना उचित है।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
जिन लोगों के नाम पर नौ या उससे अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं, उन्हें नया सिम लेने से पहले अपने सभी नंबरों की स्थिति जांच लेनी चाहिए।
विशेष रूप से उन पुराने कनेक्शनों की पहचान करना उपयोगी होगा जिनका इस्तेमाल अब नहीं किया जाता या जिनके बारे में ग्राहक को जानकारी नहीं है। संचार साथी की “अपने नाम पर मोबाइल कनेक्शन जानें” सेवा इसके लिए सरकारी माध्यम उपलब्ध कराती है। 
किसी अनजान नंबर के नाम पर सक्रिय होने की स्थिति में उसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित सरकारी सेवा के जरिए शिकायत या डिस्कनेक्शन प्रक्रिया अपनाना ज्यादा सुरक्षित है।

आगे क्या होगा?
24 अगस्त के बाद टेलीकॉम कंपनियों के लिए ग्राहक के नाम पर मौजूद कुल मोबाइल कनेक्शनों की जांच ज्यादा अहम हो जाएगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग ऑपरेटरों के जरिए तय सीमा को पार करने की संभावना को रोकना है।
इसके साथ ही डीआईपी, एएसटीआर और संचार साथी जैसे डिजिटल सिस्टम के बीच समन्वय बढ़ने से मोबाइल कनेक्शन की पहचान, री-वेरिफिकेशन और संदिग्ध नंबरों पर कार्रवाई का ढांचा और मजबूत हो सकता है। 
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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