दुबई में रोजगार के लिए गए पूर्णिया और किशनगंज के सात युवक कथित तौर पर फंस गए हैं। युवकों ने पासपोर्ट रखे जाने और काम नहीं मिलने की शिकायत की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रस्तावित मुलाकात में मामला उठने की संभावना बताई गई है।
20 अगस्त की मीडिया रिपोर्टों में बिहार के पूर्णिया और किशनगंज के सात युवकों के दुबई में फंसे होने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, ये युवक रोजगार की तलाश में दुबई गए थे, लेकिन वहां उन्हें काम नहीं मिला।
युवकों ने वीडियो संदेश के जरिए मदद की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि उनके पासपोर्ट रख लिए गए और उन्हें मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध स्रोतों में नहीं दिखती।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सातों युवक एजेंट के जरिए रोजगार के लिए दुबई पहुंचे थे। इनमें पूर्णिया के रौटा थाना क्षेत्र के तीन और किशनगंज के कोचाधामन क्षेत्र के चार युवक बताए गए हैं।
कुछ रिपोर्टों में दावा है कि युवक 5 अगस्त को दुबई पहुंचे थे। उनका कहना है कि रोजगार मिलने के बजाय उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। एक रिपोर्ट में भोजन नहीं मिलने और सड़कों पर रात गुजारने का भी दावा किया गया है।
युवकों ने वीडियो के जरिए बिहार सरकार और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक पूर्व विधायक ने भी उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत की और मदद का आश्वासन दिया।
इस मामले में अभी विदेश मंत्रालय की ओर से कोई ऐसा आधिकारिक बयान उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला, जिसमें इन सात युवकों की स्थिति या उनकी वापसी की कार्रवाई की पुष्टि की गई हो।
फिलहाल सबसे अहम साक्ष्य युवकों के वीडियो संदेश और उन पर आधारित स्थानीय मीडिया रिपोर्टें हैं। इसलिए पासपोर्ट जब्त करने, बंधक बनाने या मारपीट जैसे आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही पेश किया जाना चाहिए।
यह भी महत्वपूर्ण है कि शुरुआती रिपोर्टों में इन्हें “छात्र” नहीं, बल्कि रोजगार के लिए दुबई गए युवक या प्रवासी कामगार बताया गया है। इसलिए समाचार में “दुबई में फंसे छात्र” लिखना उपलब्ध स्रोतों के अनुरूप नहीं होगा।
अगर युवकों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला मानव तस्करी, रोजगार धोखाधड़ी और प्रवासी कामगारों के अधिकारों से जुड़े पहलुओं तक जा सकता है। इसमें भारत और संयुक्त अरब अमीरात के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
बिहार के लिए यह मामला खास तौर पर अहम है, क्योंकि विदेश में रोजगार की तलाश करने वाले युवाओं को एजेंटों के जरिए भेजे जाने से जुड़े जोखिमों पर फिर सवाल उठेंगे।
बिहार सरकार के लिए चुनौती केवल युवकों की वापसी तक सीमित नहीं होगी। एजेंट की भूमिका, युवकों को विदेश भेजने की प्रक्रिया और अगर किसी तरह की धोखाधड़ी हुई है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
केंद्र के स्तर पर विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन की भूमिका इसलिए अहम होगी, क्योंकि विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित दूतावास के बीच समन्वय जरूरी होता है।
बिहार से बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों का रुख करते हैं। ऐसे मामलों में रोजगार एजेंट की विश्वसनीयता और विदेश भेजने से पहले दस्तावेजों की जांच बड़ा सवाल बनती है।
इस घटना से परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। साथ ही, विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली संभावित धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता और निगरानी की जरूरत सामने आती है।
सबसे अहम सवाल यह है कि युवकों के पासपोर्ट किसके पास हैं और उन्हें किस आधार पर रोका गया है। दूसरा सवाल यह है कि उन्हें दुबई में किस कंपनी या एजेंट के जरिए भेजा गया था।
यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास ने उनसे संपर्क किया है या नहीं। इसी तरह, बिहार और केंद्र सरकार ने उनकी वापसी के लिए कोई औपचारिक कदम उठाया है या नहीं, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
सबसे पहले युवकों की पहचान, लोकेशन और स्थिति की आधिकारिक पुष्टि अहम होगी। इसके बाद संबंधित भारतीय मिशन और स्थानीय UAE अधिकारियों के साथ समन्वय से उनकी सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
अगर एजेंट या किसी कंपनी की भूमिका सामने आती है, तो भारत में भी संबंधित कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर मामले को आरोप और रिपोर्ट के स्तर पर रखना ही तथ्यपरक रुख है।
दुबई में फंसे बिहार के सात युवकों का मामला प्रवासी रोजगार की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सार्वजनिक हित का मुद्दा है। उपलब्ध रिपोर्टों में युवकों ने पासपोर्ट रखे जाने और रोजगार नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए प्राथमिकता उनकी सुरक्षित स्थिति की पुष्टि और जल्द वतन वापसी होनी चाहिए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।