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अमेरिकी चुनाव में ट्रंप को झटका, सोना-चांदी में तेज़ उछाल, चांदी ₹5,500 से ज़्यादा महंगी
Mohammad Naved
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2026-11-04 12:58:12
अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के बाद सर्राफ़ा बाज़ार में तेज़ी देखने को मिली। चांदी ₹5,575 महंगी हुई, जबकि सोने की क़ीमत में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया।
📍 नई दिल्ली |
🗓️ 4 नवंबर 2026
✍️ Mohd Naved
ट्रंप को चुनावी झटका, सोने-चांदी के बाज़ार में अचानक तेज़ी
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को लगे सियासी झटके के बीच अंतरराष्ट्रीय और भारतीय सर्राफ़ा बाज़ार में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को सोने और चांदी की क़ीमतों में तेज़ उछाल दर्ज किया गया।
अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद डॉलर में कमज़ोरी और सरकारी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट ने क़ीमती धातुओं की मांग को सहारा दिया। निवेशकों की निगाहें अब अमेरिकी आर्थिक नीतियों, ब्याज दरों और मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हैं।
भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के दोपहर से पहले उपलब्ध बाज़ार आंकड़ों के मुताबिक़, सोना ₹2,500 तक महंगा हुआ, जबकि चांदी में ₹5,575 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये आंकड़े वायदा कारोबार के हैं, खुदरा सर्राफ़ा दुकानों के अंतिम बिक्री भाव नहीं।
सोना ₹1.42 लाख के क़रीब, चांदी ₹1.85 लाख के पार
4 नवंबर को सुबह 11:45 बजे के आसपास उपलब्ध बाज़ार रिपोर्ट में सोने का वायदा भाव ₹1,41,990 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यह लगभग 1.73% की बढ़ोतरी थी।
इसी दौरान चांदी का वायदा भाव 3.10% चढ़कर ₹1,85,499 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
4 नवंबर 2026 | लगभग 11:45 बजे के वायदा भाव
सोना, प्रति 10 ग्राम
₹1,41,990
₹2,500 | 1.73%
चांदी, प्रति किलोग्राम
₹1,85,499
₹5,575 | 3.10%
रिपोर्ट किए गए इंट्राडे एमसीएक्स वायदा भाव। लाइव क़ीमतें लगातार बदलती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी सोने और चांदी की चमक बढ़ी
वैश्विक कमोडिटी बाज़ार में भी बुधवार को तेज़ी देखने को मिली। एक अंतरराष्ट्रीय बाज़ार रिपोर्ट के मुताबिक़, सोने की हाज़िर क़ीमत लगभग 2.2% बढ़कर 4,016.01 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची।
इसी रिपोर्ट में चांदी की क़ीमत में लगभग 3.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अमेरिकी डॉलर में नरमी आने से दूसरे देशों की मुद्राओं में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए इसकी लागत अपेक्षाकृत कम होती है। दूसरी तरफ़ अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटने पर बिना नियमित ब्याज देने वाली धातुओं के प्रति निवेशकों का रुझान बढ़ सकता है।
अमेरिकी चुनाव नतीजों से सोने-चांदी की क़ीमतों का क्या संबंध?
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति पद के लिए नहीं, बल्कि संसद की सीटों और अन्य निर्वाचित पदों के लिए होते हैं। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति की आर्थिक और विधायी योजनाओं पर असर डाल सकते हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी बढ़त के बाद वित्तीय बाज़ार में यह आकलन सामने आया कि अमेरिकी प्रशासन के लिए अपनी कुछ आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
इस संभावना के बीच डॉलर इंडेक्स में गिरावट दर्ज हुई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर दबाव आया।
हालांकि, सोने और चांदी की तेज़ी को केवल रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन का नतीजा मानना सही नहीं होगा। डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदें, कच्चे तेल की क़ीमतें और अंतरराष्ट्रीय तनाव भी इन धातुओं की क़ीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ईरान युद्ध और मध्य पूर्व के हालात भी अहम
अमेरिका और ईरान से जुड़े जारी तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंताएं बढ़ाई हैं। युद्ध, तेल आपूर्ति और महंगाई को लेकर अनिश्चितता का असर सोने और चांदी जैसे निवेश विकल्पों पर पड़ रहा है।
बाज़ार विशेषज्ञों के मुताबिक़, मध्य पूर्व में तनाव कम होने या बढ़ने की कोई बड़ी ख़बर कच्चे तेल, डॉलर और कीमती धातुओं की दिशा बदल सकती है।
कमोडिटी विश्लेषक मनोज कुमार जैन ने 4 नवंबर के बाज़ार परिदृश्य में सोने और चांदी की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई थी। उनके आकलन में कच्चे तेल की क़ीमतों, डॉलर इंडेक्स और भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारक बताया गया।
भारत में सोना खरीदने वालों पर क्या असर पड़ेगा?
भारत में सोने और चांदी की क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के साथ-साथ रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क, स्थानीय मांग और कारोबारी प्रीमियम से प्रभावित होती हैं।
वायदा बाज़ार में तेज़ी का असर घरेलू सर्राफ़ा कारोबार पर पड़ सकता है, लेकिन हर शहर में खुदरा भाव एक जैसे नहीं होते।
गहने खरीदने वाले ग्राहकों को सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू करों को भी ध्यान में रखना चाहिए। वायदा बाज़ार का भाव और ज्वेलरी शोरूम का अंतिम बिल अलग-अलग होते हैं।
क्या सोना और चांदी आगे भी महंगे होंगे?
फिलहाल बाज़ार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी चुनाव परिणामों के अलावा निवेशक फेडरल रिज़र्व की अगली मौद्रिक नीति और अमेरिका के रोज़गार आंकड़ों का इंतज़ार कर रहे हैं।
शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी रोज़गार आंकड़े ब्याज दरों के बारे में निवेशकों की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका सोने और चांदी की तेज़ी पर दबाव डाल सकती है। इसके विपरीत डॉलर की और कमज़ोरी क़ीमती धातुओं को सहारा दे सकती है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए अहम बात
4 नवंबर को सोने और चांदी की तेज़ी ने एक बार फिर दिखाया कि अमेरिकी सियासी घटनाक्रम का असर भारतीय कमोडिटी बाज़ार तक पहुंचता है।
हालांकि, एक कारोबारी सत्र की बढ़त भविष्य में लगातार तेज़ी की गारंटी नहीं है। सोने और चांदी में निवेश का फ़ैसला लेने से पहले ताज़ा भाव, बाज़ार जोखिम और व्यक्तिगत वित्तीय ज़रूरतों का आकलन ज़रूरी है।
आने वाले कारोबारी सत्रों में डॉलर की चाल, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय तनाव सर्राफ़ा बाज़ार की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेतक रहेंगे।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।