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इज़राइल में नई सरकार पर सियासी घमासान, रविवार को राष्ट्रपति करेंगे उम्मीदवार का ऐलान

Harish Qureshi • 2026-11-06 15:52:04
इज़राइल में नई सरकार पर सियासी घमासान, रविवार को राष्ट्रपति करेंगे उम्मीदवार का ऐलान

इज़राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग रविवार, 8 नवंबर को नई सरकार बनाने के लिए उम्मीदवार का नाम तय करेंगे। विपक्षी नेता गादी आइज़नकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला है, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने सिफ़ारिश की है। 


इज़राइल | 6 नवंबर 2026 

By Mohd Haris


इज़राइल में संसदीय चुनाव के बाद नई सरकार बनाने की प्रक्रिया एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने ऐलान किया है कि वह रविवार को उस उम्मीदवार का नाम तय करेंगे जिसे अगली सरकार बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह फ़ैसला ऐसे वक़्त सामने आ रहा है जब विपक्षी नेता गादी आइज़नकोट को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुक़ाबले अधिक सांसदों का समर्थन मिला है, लेकिन किसी भी राजनीतिक खेमे के लिए स्थिर गठबंधन तैयार करना आसान नहीं दिखाई दे रहा।

राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने गुरुवार को संसद में निर्वाचित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बातचीत के बाद अपनी आगामी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने संकेत दिया कि सांसदों की सिफ़ारिशों के बावजूद राजनीतिक दलों के आपसी मतभेद नई सरकार के गठन में अहम रुकावट बने हुए हैं।


67 सांसद आइज़नकोट के साथ, नेतन्याहू को 46 का समर्थन

इज़राइल की 120 सदस्यीय संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में नई सरकार के गठन के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। राष्ट्रपति के साथ परामर्श के दौरान 67 सांसदों ने गादी आइज़नकोट को सरकार बनाने का मौक़ा देने की सिफ़ारिश की। दूसरी ओर, 46 सांसदों ने बेंजामिन नेतन्याहू के नाम का समर्थन किया।


राष्ट्रपति के समक्ष सांसदों की सिफ़ारिशें

गादी आइज़नकोट, 67

बेंजामिन नेतन्याहू, 46

अन्य / कोई सिफ़ारिश नहीं, 7

कुल 120 सांसद। आंकड़े राष्ट्रपति के समक्ष उम्मीदवारों की सिफ़ारिशों के हैं, किसी गठबंधन के पक्के समर्थन के नहीं।


चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी नेतन्याहू की लिकुड

27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने 27 सीटें हासिल कीं और सबसे बड़े एकल राजनीतिक दल के रूप में सामने आई। हालांकि, उनके व्यापक धार्मिक और राष्ट्रवादी गठबंधन को कुल 53 सीटें मिलीं। दूसरी तरफ़ गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाले 4 दलों के गठबंधन ने 48 सीटें हासिल कीं। इस गठबंधन में मध्य-वामपंथ से लेकर दक्षिणपंथ तक के राजनीतिक दल शामिल हैं। चुनावी नतीजों में एक और अहम पहलू फ़िलिस्तीनी मूल के इज़राइली नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 2 राजनीतिक दलों का प्रदर्शन रहा। इन दलों ने कुल 19 सीटें जीतीं। दोनों दलों ने राष्ट्रपति के समक्ष आइज़नकोट के नाम की सिफ़ारिश की है। हालांकि, आइज़नकोट ने इन अरब नेतृत्व वाले दलों को अपनी सरकार में शामिल करने से इनकार किया है। नेतन्याहू ने भी उनके साथ सरकार बनाने की संभावना को ख़ारिज किया है। यही वजह है कि आइज़नकोट के समर्थन में 67 सांसदों की सिफ़ारिश होने के बावजूद उनके पास स्थिर संसदीय बहुमत की गारंटी नहीं है।


नेतन्याहू को पुराने सहयोगी से भी झटका

नई सरकार बनाने की कोशिशों के बीच नेतन्याहू को अपने पुराने सहयोगी यूनाइटेड तोराह जुडाइज़्म के रुख़ से भी सियासी चुनौती मिली है। इस अति-रूढ़िवादी यहूदी राजनीतिक दल ने राष्ट्रपति के समक्ष किसी भी उम्मीदवार की सिफ़ारिश नहीं की। रिपोर्ट के मुताबिक़, पार्टी और नेतन्याहू के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा अति-रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट देने वाला प्रस्तावित क़ानून है। पिछली गठबंधन सरकार इस संबंध में क़ानून पारित नहीं कर सकी थी। इस घटनाक्रम ने नेतन्याहू के लिए पुराने राजनीतिक सहयोगियों को एकजुट रखने की चुनौती बढ़ा दी है।


चुनावी प्रक्रिया पर आरोप और निर्वाचन समिति का जवाब

इज़राइल में चुनाव परिणामों को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया है।

नेतन्याहू ने मतदान में संभावित गड़बड़ी की जांच का हवाला देते हुए अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों पर वोट चोरी करने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इज़राइल की केंद्रीय निर्वाचन समिति ने बुधवार को स्पष्ट किया कि चुनाव की विश्वसनीयता से समझौता होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। समिति के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोलबर्ग ने निर्वाचित प्रतिनिधियों से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा बनाए रखने की अपील की। इस मामले में नेतन्याहू के आरोप और निर्वाचन समिति का आधिकारिक मौक़िफ़ अलग-अलग हैं।


राष्ट्रपति के सामने क्या हैं संवैधानिक विकल्प?

इज़राइल की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति राजनीतिक दलों से मशविरा करने के बाद ऐसे सांसद को सरकार बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपते हैं जो गठबंधन तैयार करने की स्थिति में हो।

इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी पार्टी का नेता होना ही पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को संसद में सरकार के लिए ज़रूरी समर्थन जुटाना होता है। राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने कहा है कि वह शुक्रवार और शनिवार को कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत करेंगे। इसके बाद रविवार को सरकार गठन के लिए उम्मीदवार का नाम घोषित किया जाएगा। जिस उम्मीदवार को यह ज़िम्मेदारी मिलेगी, उसके पास सरकार बनाने के लिए शुरुआती 28 दिन होंगे। आवश्यकता पड़ने पर 14 दिन का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। यदि कोई उम्मीदवार सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दूसरे प्रयास या नए चुनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।


नई सरकार बनने तक नेतन्याहू पद पर रहेंगे

सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपने पद पर बने रहेंगे। नई सरकार के गठन का सवाल केवल प्रधानमंत्री के नाम तक सीमित नहीं है। गठबंधन में शामिल होने वाले दलों के बीच नीतिगत सहमति, संसदीय समर्थन और सत्ता में हिस्सेदारी जैसे मुद्दे भी अहम रहेंगे। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तारीख़ रविवार, 8 नवंबर है, जब राष्ट्रपति हर्ज़ोग अपने फ़ैसले का ऐलान करेंगे। उसके बाद यह स्पष्ट होगा कि किस नेता को गठबंधन तैयार करने की पहली औपचारिक ज़िम्मेदारी मिलती है। हालांकि, राष्ट्रपति की ओर से नामांकन और संसद में नई सरकार का गठन दो अलग चरण हैं। इज़राइल की मौजूदा सियासी तस्वीर में सांसदों की सिफ़ारिशों का गणित सामने आ चुका है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि राजनीतिक दल अपने मतभेद दूर करके संसदीय बहुमत के लिए किस तरह का समझौता करते हैं।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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