संभल में 36 मकानों-दुकानों को नोटिस, क्या चलेगा बुलडोजर?
जामा मस्जिद इलाके में 36 निर्माणों पर नोटिस, अब होगी सुनवाई
संभल में फिर कार्रवाई की तैयारी, 36 लोगों को मिला नोटिस
संभल की शाही जामा मस्जिद के आसपास 36 मकानों और दुकानों को प्रशासन ने नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक निर्माणों के नक्शे स्वीकृत नहीं मिले। संबंधित लोगों को सात दिन में जवाब देना है। कुछ दुकानदारों ने आपत्ति जताकर अदालत जाने की बात कही है। अंतिम कार्रवाई सुनवाई के बाद तय होगी।
उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के आसपास प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है। प्रशासन ने जामा मस्जिद के पीछे के इलाके में 36 मकानों और दुकानों के मालिकों को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के मुताबिक इन निर्माणों के नक्शे स्वीकृत नहीं पाए गए हैं।
यह कार्रवाई संभल महायोजना 2031 के तहत विनियमित क्षेत्र में की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माणों की मौके पर जांच की गई थी और उसके बाद नोटिस जारी किए गए हैं। अभी किसी निर्माण को गिराने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
प्रशासन ने नोटिस पाने वाले लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया है। एसडीएम विकास चंद्र के मुताबिक निरीक्षण के दौरान जिन निर्माणों को चिह्नित किया गया, उन्हें नियमानुसार नोटिस तामील कराए गए हैं। सुनवाई के बाद सक्षम प्राधिकारी आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा। यानी फिलहाल मामला नोटिस और सुनवाई के चरण में है। इसे तत्काल बुलडोजर कार्रवाई के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। प्रशासन ने भी कहा है कि संबंधित लोगों को जवाब देने का अवसर दिया जाएगा।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई चौधरी सराय से चंदौसी चौराहे और जामा मस्जिद होते हुए टंडन तिराहे तक सड़क चौड़ीकरण की योजना से भी जुड़ी है। प्रशासन ने इस इलाके में निर्माणों और सड़क की स्थिति का जायजा लिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने सड़क पर अतिक्रमण की भी पहचान की है। प्रशासन का कहना है कि कुछ जगहों पर बाजार की सड़कों की निर्धारित चौड़ाई कम हुई है और दुकानदारों की ओर से सड़क की जगह पर अतिक्रमण किया गया है। इसलिए मौजूदा कार्रवाई का दायरा केवल मकानों और दुकानों के नक्शों तक सीमित नहीं है। सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण का मुद्दा भी प्रशासनिक कार्रवाई के एजेंडे में है।
नोटिस मिलने के बाद कुछ स्थानीय दुकानदारों ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। आजतक से बातचीत में दुकानदार उस्मान अली ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की बात बताई गई थी, लेकिन उनके मुताबिक माप केवल जामा मस्जिद के पीछे वाले हिस्से में लिया गया। उन्होंने अदालत का रुख करने की बात कही है। दूसरे दुकानदार मोहम्मद उवैश ने बताया कि उन्हें भी नोटिस मिला है, लेकिन उनके पास निर्माण से संबंधित नक्शा मौजूद है। उन्होंने प्रशासन की जांच में सहयोग करने की बात कही है। इससे एक अहम बात सामने आती है। नोटिस पाने वाले सभी लोगों की स्थिति समान नहीं है और अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों तथा प्रशासनिक सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
एसडीएम विकास चंद्र के मुताबिक प्रशासन ने महायोजना 2031 के तहत इलाके का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने 36 ऐसे निर्माणों को चिह्नित किया, जिनके नक्शे स्वीकृत नहीं पाए गए। प्रशासन का कहना है कि पहले संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। जिन लोगों के पास अपने निर्माण के नियमों के अनुरूप होने के प्रमाण होंगे, उनकी स्थिति सुनवाई के दौरान देखी जाएगी। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी 36 मकानों और दुकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। प्रशासनिक प्रक्रिया अभी जवाब और सुनवाई के चरण में है।
यह फिलहाल तय नहीं है। आजतक की रिपोर्ट में भी स्पष्ट किया गया है कि अभी नोटिस जारी हुए हैं और आगे की कार्रवाई जवाब तथा सुनवाई के बाद तय होगी। अगर किसी निर्माण के बारे में यह साबित होता है कि उसका नक्शा स्वीकृत नहीं था और वह लागू नियमों का उल्लंघन करता है, तो प्रशासन नियमानुसार आगे बढ़ सकता है। दूसरी तरफ अगर किसी मालिक के पास वैध दस्तावेज या स्वीकृत नक्शा है, तो सुनवाई में उसका पक्ष महत्वपूर्ण होगा। यही वजह है कि मौजूदा स्थिति को बुलडोजर एक्शन की पुष्टि के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत के रूप में देखना ज्यादा सटीक है।
संभल महायोजना 2031 शहर के नियोजित विकास और भूमि उपयोग से जुड़े प्रावधानों का हिस्सा है। इसके तहत विनियमित क्षेत्र में भवन निर्माण, सड़क की चौड़ाई और दूसरे भूमि उपयोग संबंधी नियम लागू होते हैं। अधिकारियों के मुताबिक जामा मस्जिद के आसपास का इलाका भी इस विनियमित क्षेत्र में आता है। इसलिए निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शे और संबंधित नियमों का पालन प्रशासन की जांच का हिस्सा है। मौजूदा कार्रवाई इसी नियामकीय ढांचे के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
जामा मस्जिद क्षेत्र संभल में लंबे समय से संवेदनशील प्रशासनिक और सियासी मुद्दों के केंद्र में रहा है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और पुलिसकर्मियों समेत कम से कम 29 लोग घायल हुए थे। ऐसे माहौल में किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का असर केवल निर्माण नियमों तक सीमित नहीं रहता। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया, राजनीतिक बयान और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए प्रशासन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और संबंधित पक्षों को पर्याप्त सुनवाई देना खास तौर पर अहम है।
नोटिस पाने वाले कुछ लोगों ने अदालत जाने की बात कही है। अगर वे अपने निर्माण को वैध बताने वाले दस्तावेजों या प्रशासन की माप-जोख पर आपत्ति के साथ न्यायिक राहत मांगते हैं, तो मामला कानूनी प्रक्रिया में जा सकता है। हालांकि अभी किसी अदालत के नए आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना भी उचित नहीं होगा कि प्रस्तावित कार्रवाई पर न्यायिक रोक लग चुकी है। अगला अहम चरण प्रशासन के सामने दिए जाने वाले जवाब और उसके बाद होने वाली सुनवाई है।
मौजूदा मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 36 निर्माणों में से कितने वास्तव में बिना स्वीकृत नक्शे के हैं और कितने मालिक अपने दस्तावेजों से प्रशासन के निष्कर्ष को चुनौती दे पाएंगे। दूसरा सवाल सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है। स्थानीय दुकानदारों ने माप-जोख की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रशासनिक रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण से यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित चौड़ीकरण की सीमा क्या है और किन हिस्सों पर इसका असर पड़ता है।
तीसरा सवाल कानून-व्यवस्था का है। संवेदनशील इलाके में कार्रवाई के दौरान प्रशासन को नियमों के साथ-साथ स्थानीय हालात का भी ध्यान रखना होगा।
पहले नोटिस पाने वाले 36 लोगों के जवाब लिए जाएंगे। इसके बाद प्रशासन दस्तावेजों और निर्माण की स्थिति की जांच करेगा। जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होगा, वहां सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार अगला फैसला लेगा। सड़क पर अतिक्रमण पाए जाने की स्थिति में उसे हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि महायोजना 2031 के तहत जांच दूसरे इलाकों तक भी बढ़ सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में संभल में प्रशासनिक कार्रवाई और स्थानीय लोगों की कानूनी प्रतिक्रिया दोनों पर नजर रहेगी।
संभल की शाही जामा मस्जिद के पास 36 मकानों और दुकानों को नोटिस जारी होना फिलहाल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, अंतिम ध्वस्तीकरण आदेश नहीं। प्रशासन का दावा है कि इन निर्माणों के नक्शे स्वीकृत नहीं पाए गए हैं और संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन दिए गए हैं।
दूसरी तरफ कुछ दुकानदारों ने माप-जोख और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। एक दुकानदार ने अदालत जाने की बात कही है, जबकि दूसरे ने अपने पास नक्शा होने का दावा किया है। अब असली तस्वीर सुनवाई के बाद सामने आएगी। इसलिए इस समय सबसे अहम मुद्दा यह है कि प्रशासन दस्तावेजों की जांच किस तरह करता है और क्या कार्रवाई समान नियमों के आधार पर आगे बढ़ती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।