ट्रीसा-गायत्री ने 15 साल बाद भारत का पदक पक्का किया
विश्व चैंपियनशिप में ट्रीसा-गायत्री का ऐतिहासिक कमाल
चीनी जोड़ी को हराकर ट्रीसा-गायत्री सेमीफाइनल में
ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने नई दिल्ली में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के डबल्स क्वार्टरफाइनल में चीन की चौथी वरीय जोड़ी को हराकर पदक पक्का किया। इस जीत से भारत को 2011 के बाद डबल्स में पहला विश्व चैंपियनशिप पदक मिलेगा। अब भारतीय जोड़ी की निगाहें सेमीफाइनल पर भी हैं।
भारत की ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने नई दिल्ली में चल रही बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में महिला डबल्स का पदक पक्का कर दिया है। भारतीय जोड़ी ने क्वार्टरफाइनल में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जिया यी फान और झांग शू शियान को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत के साथ भारत को महिला डबल्स में 2011 के बाद पहली बार विश्व चैंपियनशिप पदक मिलना तय हो गया।
ट्रीसा-गायत्री की यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर चीन की मजबूत डबल्स परंपरा के सामने भारतीय जोड़ी ने दबाव के बीच मुकाबला अपने पक्ष में किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जोड़ी ने क्वार्टरफाइनल में वापसी करते हुए चीनी जोड़ी को मात दी और 15 साल का इंतज़ार खत्म किया।
भारत ने विश्व चैंपियनशिप के महिला डबल्स में आखिरी पदक 2011 में जीता था। लंदन में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने कांस्य पदक हासिल किया था। 2022 में पुरुष डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के पदक के बाद भारत की डबल्स सफलता का दायरा बढ़ा, लेकिन महिला डबल्स में 2011 के बाद इंतज़ार कायम रहा। इस लिहाज़ से ट्रीसा और गायत्री की उपलब्धि केवल एक टूर्नामेंट की जीत नहीं है। यह भारतीय महिला डबल्स के लंबे इंतज़ार का अंत है। दोनों खिलाड़ियों ने ऐसे दौर में यह काम किया है जब भारतीय बैडमिंटन की पहचान लंबे समय तक पीवी सिंधु, साइना नेहवाल और पुरुष डबल्स की जोड़ीदार सफलताओं से जुड़ी रही। अब महिला डबल्स को भी विश्व स्तर पर एक नई पहचान मिली है।
ट्रीसा और गायत्री इस टूर्नामेंट में अनसीडेड जोड़ी के रूप में उतरी थीं। टूर्नामेंट से पहले उनकी विश्व रैंकिंग 39 बताई गई थी। इसके बावजूद उन्होंने शुरुआती दौर में लगातार बेहतर रैंकिंग वाली जोड़ियों के सामने अपना खेल मजबूत रखा। राउंड ऑफ 32 में भारतीय जोड़ी ने अमेरिका की 16वीं वरीयता प्राप्त लॉरेन लैम और एलिसन क्विन ली को सीधे गेम में 21-15, 21-12 से हराया। यह जीत केवल अगले दौर में पहुंचने की कामयाबी नहीं थी, बल्कि इससे यह संकेत भी मिला कि भारतीय जोड़ी बड़े मुकाबलों में अपनी आक्रामक शैली के साथ दबाव बनाने की स्थिति में है। इसके बाद प्री-क्वार्टरफाइनल में ट्रीसा और गायत्री के सामने जापान की सातवीं वरीय रिन इवानागा और की नाकानिशी थीं। भारतीय जोड़ी ने यहां भी सीधे गेम में 21-16, 21-12 से जीत दर्ज की। पहले गेम में स्कोर 16-16 तक बराबर था, लेकिन इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पांच अंक लेकर गेम अपने नाम किया। दूसरे गेम में उन्होंने मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा।
जापानी जोड़ी के खिलाफ मुकाबले में ट्रीसा की ताकतवर स्मैशिंग और गायत्री की नेट पर मौजूदगी ने अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआती कुछ रैलियों में ही गेमप्लान समझ लिया था और पहले गेम के दूसरे हिस्से में आक्रामक रुख अपनाया। यही रणनीति दूसरे गेम में भी जारी रही। यह जीत भारतीय जोड़ी के लिए मनोवैज्ञानिक तौर पर भी महत्वपूर्ण थी। विश्व चैंपियनशिप में एक मजबूत जापानी जोड़ी को हराकर वे अंतिम आठ में पहुंचीं और उनके सामने पदक से केवल एक जीत की दूरी रह गई। उस जीत के बाद दबाव जरूर था, लेकिन अब भारतीय जोड़ी के पास आत्मविश्वास भी था।
क्वार्टरफाइनल में भारत के सामने जिया यी फान और झांग शू शियान की चौथी वरीयता प्राप्त चीनी जोड़ी थी। दोनों जोड़ियों के बीच पहले भी कड़े मुकाबले हो चुके हैं। 2026 की बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में चीन की इसी जोड़ी ने ट्रीसा और गायत्री को करीबी मुकाबले में हराया था। उस मैच में भारतीय जोड़ी 22-24, 18-21 से हारी थी। मलेशिया ओपन 2025 में भी जिया यी फान और झांग शू शियान ने भारतीय जोड़ी को 15-21, 21-18, 21-19 से हराया था। यानी विश्व चैंपियनशिप का क्वार्टरफाइनल दोनों खिलाड़ियों के लिए एक और बड़ा इम्तिहान था। इसी वजह से मौजूदा जीत का महत्व और बढ़ जाता है। ट्रीसा और गायत्री ने केवल एक शीर्ष चीनी जोड़ी को नहीं हराया, बल्कि पिछले मुकाबलों की निराशा के बाद बड़े मंच पर जवाब भी दिया।
इस विश्व चैंपियनशिप अभियान की पृष्ठभूमि में ट्रीसा जॉली की चोट भी महत्वपूर्ण है। 2026 की शुरुआत में एशिया बैडमिंटन चैंपियनशिप और उबर कप की तैयारी के दौरान ट्रेनिंग में ट्रीसा का पैर गायत्री के पैर पर पड़ गया था। इसके बाद एमआरआई में दो हाई-ग्रेड मांसपेशी चोटों और दो लिगामेंट चोटों का पता चला था। इसके बाद दोनों ने लंबी रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया पूरी की। उनकी वापसी इंडोनेशिया ओपन से हुई और उन्होंने यूएस ओपन में भी हिस्सा लिया। इसके बाद अगस्त में फिलीपींस इंटरनेशनल चैलेंज जीतना उनके लिए महत्वपूर्ण संकेत था कि जोड़ी दोबारा प्रतिस्पर्धी लय में लौट रही है। विश्व चैंपियनशिप में शुरुआती मैचों से ही उनकी फिटनेस और कोर्ट कवरेज बेहतर दिखी। ट्रीसा की आक्रामक स्मैशिंग और गायत्री की नेट प्ले क्षमता ने दोनों की साझेदारी को फिर से प्रभावी बनाया।
ट्रीसा और गायत्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं। दोनों ने 2022 और 2023 में लगातार दो साल ऑल इंग्लैंड के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने कांस्य पदक भी जीता था। दोनों खिलाड़ियों की जोड़ी 2025 की शुरुआत में विश्व की शीर्ष 10 जोड़ियों में भी पहुंची थी। इस उपलब्धि से यह साफ होता है कि मौजूदा विश्व चैंपियनशिप रन अचानक सामने आई सफलता नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में इस जोड़ी ने बड़े टूर्नामेंटों में प्रतिस्पर्धी स्तर दिखाया है। चोट और रैंकिंग में गिरावट के बाद अब दोनों फिर से विश्व मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं।
भारतीय बैडमिंटन में महिला डबल्स लंबे समय से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने 2011 में विश्व चैंपियनशिप कांस्य के साथ एक मानक स्थापित किया था, लेकिन उसके बाद कोई भारतीय महिला डबल्स जोड़ी उस स्तर पर पदक तक नहीं पहुंच सकी।
ट्रीसा और गायत्री की सफलता इस स्थिति को बदलने का मौका देती है। यह एक ऐसा परिणाम है जो आने वाली पीढ़ी की खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। महिला डबल्स में विश्व स्तर की नियमित प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूत घरेलू ढांचे, विशेषज्ञ कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर की जरूरत बनी रहेगी।
पदक सुनिश्चित होना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन ट्रीसा और गायत्री के लिए अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। सेमीफाइनल में जीत उन्हें फाइनल तक ले जाएगी और स्वर्ण या रजत पदक की संभावना बनाए रखेगी। इसलिए मौजूदा उपलब्धि को अंतिम मंजिल के बजाय एक महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर देखना ज्यादा उचित है। भारत की दूसरी बड़ी उम्मीद सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष डबल्स जोड़ी से भी जुड़ी हुई थी। राष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, सात्विक-चिराग ने भी क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई और चीन के तीसरी वरीयता प्राप्त लियांग वेई केंग और वांग चांग से उनका मुकाबला तय हुआ। हालांकि महिला डबल्स में ट्रीसा-गायत्री की उपलब्धि का अपना अलग महत्व है। यह 2011 के बाद भारत का पहला विश्व चैंपियनशिप महिला डबल्स पदक है। इसलिए यह जीत भारतीय बैडमिंटन के पदक रिकॉर्ड में एक अलग अध्याय जोड़ती है।
सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद ट्रीसा और गायत्री के सामने अब विश्व स्तर की एक और मजबूत जोड़ी होगी। यहां से हर मुकाबला उच्च दबाव वाला होगा और छोटी गलतियां भी परिणाम बदल सकती हैं। चोट से वापसी के बाद लगातार कई कठिन मुकाबले खेलना उनकी फिटनेस और रिकवरी के लिए भी अहम रहेगा। लेकिन अभी तक के प्रदर्शन ने यह जरूर साबित किया है कि भारतीय जोड़ी दबाव में खेलने की क्षमता रखती है। उन्होंने अमेरिका की वरीय जोड़ी को हराया, जापान की सातवीं वरीय जोड़ी को मात दी और फिर चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी के खिलाफ सबसे बड़ा उलटफेर किया।
ट्रीसा-गायत्री मेडल भारतीय बैडमिंटन के लिए एक सांख्यिकीय उपलब्धि से आगे का मामला है। महिला डबल्स में 15 साल के अंतराल के बाद विश्व चैंपियनशिप पदक मिलना बताता है कि इस वर्ग में भारत की नई साझेदारी फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के केंद्र में आ रही है। सबसे अहम बात यह है कि यह पदक चोट से वापसी, कठिन ड्रॉ और शीर्ष जोड़ियों के खिलाफ लगातार मुकाबलों के बाद आया है। अब सेमीफाइनल का नतीजा तय करेगा कि यह कांस्य पदक पर रुकता है या भारतीय जोड़ी फाइनल में पहुंचकर इससे बड़ा इतिहास बनाती है। फिलहाल एक तथ्य स्थापित है। ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने भारत के लिए महिला डबल्स का विश्व चैंपियनशिप पदक 15 साल बाद सुनिश्चित कर दिया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।