ब्रिटेन के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी खराबी के बाद दो दिनों में 2,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं। NATS ने समस्या दूर कर दी है, लेकिन बैकलॉग जारी है। सरकार ने एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है, जबकि एयरलाइंस ने सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
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लंदन | 9 सितंबर 2026 | Apurva Choudhary
यूके एयर ट्रैफिक संकट का असर दूसरे दिन भी जारी
ब्रिटेन में यूके एयर ट्रैफिक संकट का तकनीकी कारण सामने आने के बावजूद इसका परिचालन असर बुधवार को भी बना रहा। National Air Traffic Services यानी NATS के flight-processing system में मंगलवार को आई खराबी ने ब्रिटेन के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ानों की आवाजाही को प्रभावित किया और दो दिनों में रद्द उड़ानों की संख्या 2,000 से ऊपर पहुंच गई।
NATS का कहना है कि मूल तकनीकी समस्या को मंगलवार को ही ठीक कर दिया गया था। लेकिन सिस्टम सामान्य होने के बाद भी एयरक्राफ्ट और क्रू के अपने निर्धारित स्थानों पर नहीं होने, यात्रियों के पुनर्बुकिंग और पहले से जमा हुए flight backlog के कारण बुधवार को भी देरी और cancellations जारी रहीं।
आखिर क्या हुआ था?
मंगलवार, 8 सितंबर को करीब दोपहर बाद NATS के flight-processing system में तकनीकी समस्या सामने आई। इसके बाद ब्रिटेन के airspace में उड़ानों की processing और movement पर प्रतिबंध लगाने पड़े, जिससे Heathrow, Gatwick, Manchester, Stansted और अन्य एयरपोर्ट प्रभावित हुए।
उपलब्ध aviation data के मुताबिक मंगलवार को करीब 1,750 flights रद्द हुईं। बुधवार को भी सैकड़ों cancellations दर्ज हुईं और इसके साथ कुल संख्या 2,000 के पार चली गई। अलग-अलग समय पर उपलब्ध आंकड़ों में अंतर रहा है, क्योंकि flight schedules लगातार बदलते रहे और कुछ cancellations बाद में जोड़ी गईं। यह अंतर महत्वपूर्ण है। शुरुआती रिपोर्टों में मंगलवार को 1,000 से अधिक cancellations का अनुमान था, जबकि बाद में Cirium के आंकड़ों ने दिन का प्रभाव करीब 1,750 cancellations तक दिखाया। इसलिए इस घटना के कुल प्रभाव का आकलन करते समय समय-विशिष्ट आंकड़े देखना जरूरी है।
सिस्टम ठीक, लेकिन ऑपरेशन अभी सामान्य नहीं
NATS ने बताया कि तकनीकी समस्या उसके flight-processing system में थी और engineers ने इसे ठीक कर दिया। NATS प्रमुख Martin Rolfe ने भी कहा कि सिस्टम अब सामान्य रूप से काम कर रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में यात्रियों और उड़ानों का backlog तुरंत खत्म नहीं हो सकता।
यही इस संकट का सबसे अहम पहलू है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम के दोबारा operational होने का मतलब यह नहीं कि पूरा aviation network उसी समय अपनी पुरानी स्थिति में लौट आता है। विमान और crew गलत या अलग एयरपोर्ट पर फंस सकते हैं, जिसके कारण अगली उड़ानों का schedule भी प्रभावित होता है।
Heathrow और Gatwick जैसे बड़े hubs पर इस तरह की disruption का असर तेजी से फैल सकता है। बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में एक flight की देरी आगे की कई services को प्रभावित कर सकती है, खासकर तब जब aircraft rotation और crew scheduling पहले से तय हो।
सरकार ने NATS से मांगी एक सप्ताह में रिपोर्ट
ब्रिटेन की Transport Secretary Heidi Alexander ने NATS CEO Martin Rolfe से घटना की पूरी जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। सरकार की चिंता सिर्फ मंगलवार की तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझना भी है कि ऐसी स्थिति दोबारा होने पर contingency arrangements कितने प्रभावी हैं।
Civil Aviation Authority ने भी NATS से incident report मांगी है। नियामक यह देखना चाहता है कि घटना के बाद क्या अतिरिक्त कदम जरूरी हैं ताकि UK air traffic control system की safety और reliability बनी रहे। इस स्तर पर किसी एक व्यक्ति या संस्था की अंतिम जिम्मेदारी तय करना जल्दबाजी होगी। सरकार की जांच और NATS की तकनीकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होना बाकी है कि मूल failure किस component या process में हुआ और मौजूदा safeguards उसे रोकने में क्यों सफल नहीं हुए।
साइबर अटैक की पुष्टि नहीं, तकनीकी खराबी पर फोकस
घटना के बाद साइबर अटैक की संभावना को लेकर सवाल उठे, लेकिन NATS CEO Martin Rolfe ने इसे खारिज किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक NATS की मौजूदा स्थिति यह है कि समस्या flight-processing system में तकनीकी fault से जुड़ी थी, न कि किसी cyberattack से।
यहां एक अहम editorial distinction जरूरी है। साइबर अटैक को खारिज किया जाना और तकनीकी खराबी के मूल कारण की पूरी तरह पहचान हो जाना दो अलग बातें हैं। फिलहाल विस्तृत जांच पूरी होने तक failure के precise technical कारण और उसमें शामिल सभी operational factors पर अंतिम निष्कर्ष देना उचित नहीं होगा।
एयरलाइंस ने NATS की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
घटना के बाद Ryanair और Wizz Air ने NATS की व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। Ryanair ने CEO Martin Rolfe के इस्तीफे की मांग की, जबकि Wizz Air ने air traffic control व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताई।
एयरलाइंस का तर्क है कि critical aviation infrastructure में बार-बार होने वाली तकनीकी समस्याएं केवल एक दिन की operational inconvenience नहीं हैं। इनके कारण cancellations, passenger rebooking, crew displacement और financial losses का असर पूरे aviation network में फैल सकता है। दूसरी ओर NATS का पक्ष है कि safety सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब किसी technical issue को तेजी से सुरक्षित तरीके से resolve नहीं किया जा सकता, तब air traffic flow को सीमित करना जरूरी हो सकता है। इस नजरिए से disruption को केवल service failure के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता।
क्या यह पहली बड़ी तकनीकी समस्या है?
नहीं। ब्रिटेन के aviation system में पिछले वर्षों में भी बड़े technical incidents सामने आए हैं। 2023 में flight-plan processing से जुड़ी एक बड़ी समस्या के बाद UK Civil Aviation Authority ने NATS की contingency arrangements की समीक्षा की जरूरत बताई थी।
2024 में aviation industry ने पिछले disruption के financial impact को £100 million से अधिक बताया था। इसके अलावा 2025 में भी radar-related technical problem ने ब्रिटेन के कुछ प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ानों को प्रभावित किया था।
हालांकि, इन घटनाओं को एक ही technical failure की श्रृंखला मानना अभी उचित नहीं होगा। अलग-अलग incidents के technical कारण अलग हो सकते हैं। मौजूदा जांच का महत्व इसलिए बढ़ जाता है कि वह यह बताए कि क्या underlying resilience और contingency planning में कोई साझा कमजोरी मौजूद है।
भारत से जुड़ी उड़ानों पर क्या असर पड़ा?
ब्रिटेन के aviation disruption का असर भारत-UK air connectivity पर भी पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार Air India और IndiGo की कुछ flights प्रभावित हुईं और कुछ London-bound services के लिए alternative arrangements या diversions की स्थिति बनी।
भारत से UK जाने या UK से भारत लौटने वाले यात्रियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि airport schedule को स्थिर मानकर यात्रा न की जाए। Flight status लगातार बदल सकता है क्योंकि airlines को aircraft, crew और connecting services को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ रहा है।
यहां भी सभी भारतीय flights को प्रभावित बताना सही नहीं होगा। असर flight-specific रहा है और यात्रियों को अपनी airline से वास्तविक समय का update लेना चाहिए।
क्या यात्रियों के लिए सबसे बड़ा जोखिम देरी है?
तत्काल तौर पर मुख्य परेशानी delays, cancellations और rebooking की है। उपलब्ध रिपोर्टों में aviation safety को compromise होने की बात सामने नहीं आई है; बल्कि NATS ने कहा कि safety को प्राथमिकता देते हुए traffic management किया गया।
लेकिन passenger experience के स्तर पर समस्या गंभीर है। लंबे इंतजार, cancelled flights, alternative bookings और baggage या connecting travel से जुड़ी परेशानियां यात्रियों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। Heathrow और अन्य प्रमुख एयरपोर्ट्स ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपनी flight status जांचने को कहा है।
असली सवाल: सिस्टम की resilience कितनी मजबूत है?
मौजूदा घटना का सबसे बड़ा policy question केवल यह नहीं है कि मंगलवार को क्या खराब हुआ। इससे बड़ा सवाल यह है कि critical air traffic infrastructure में failure की स्थिति के लिए कितने independent safeguards मौजूद हैं और वे कितनी तेजी से system को degraded mode में चला सकते हैं।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UK का aviation network अत्यधिक interconnected है। Heathrow जैसे बड़े international hub पर छोटी अवधि की system disruption भी airlines, airports, passengers और दूसरे देशों के flight schedules तक असर पहुंचा सकती है।
फिर भी उपलब्ध evidence के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरी UK aviation infrastructure अविश्वसनीय हो गई है। NATS का कहना है कि UK air traffic control system safety के लिहाज से मजबूत है, जबकि airlines system resilience पर सवाल उठा रही हैं। जांच रिपोर्ट इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच अधिक स्पष्ट तस्वीर दे सकती है।
आगे क्या होगा?
सबसे पहले airlines और airports को backlog clear करना होगा। इसके बाद सरकार और CAA के सामने incident की technical और operational review का चरण आएगा। एक सप्ताह में मांगी गई NATS रिपोर्ट इस प्रक्रिया का शुरुआती महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी।
यदि जांच में किसी specific technology, process या contingency arrangement की कमजोरी सामने आती है, तो उसके आधार पर system upgrades, अतिरिक्त safeguards या operational procedures में बदलाव किए जा सकते हैं। लेकिन इन कदमों का स्वरूप जांच पूरी होने से पहले निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है।